संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से, कोरोना महामारी के कारण कई बदलाव

    • Author, शुभम किशोर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है.

कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद ये पहला मौका होगा जब संसद बैठेगी, इसलिए कई बदलाव किए गए हैं.

एक अक्तूबर तक चलने वाले इस सत्र में सोशल डिस्टेंसिंग समेत कोरोना से जुड़े अन्य नियमों का पालन करने के इंतज़ाम किए गए हैं.

मॉनसून सत्र में हर दिन लोकसभा और राज्यसभा के चार-चार घंटों के सेशन होंगे.

राज्यसभा सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगी. लोकसभा दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगी.

हालांकि, पहले दिन यानी सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही पहले सेशन में होगी.

23 नए बिल लाने की योजना

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सरकार इस सत्र में 23 नए बिल लेकर आएगी, इनमें से 11 पुराने अध्यादेश हैं जो बिल के रूप में आएंगे.

इनमें से एक स्वास्थ्य कर्मियों पर होने वाली हिंसा की रोकथाम के लिए है. अभी लागू अध्यादेश के मुताबिक कोविड -19 के दौरान स्वास्थ्यकर्मी के साथ हिंसा करना एक ग़ैर ज़मानती अपराध है और इसके लिए सात साल तक की सज़ा और 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है. इसके तहत डॉक्टर, स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोग और आशा कार्यकर्ता भी आती हैं.

सांसदों का वेतन कम करने के प्रावधान वाला बिल भी संसद में पेश किया जाएगा. इसे लेकर भी सरकार पहले ही अध्यादेश ला चुकी है. इसके मुताबिक एक अप्रैल 2020 से एक साल तक के लिए सांसदों का वेतन 30 प्रतिशत कम कर दिया गया है. बची हुई रकम का इस्तेमाल कोरोना महामारी से लड़ने के लिए किया जाएगा.

नए बिलों में जम्मू और कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक 2020 शामिल है. विधेयक में उर्दू और अंग्रेज़ी के अलावा कश्मीरी, डोगरी और हिंदी को जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषा बनाना का प्रावधान है. इसके अलावा हाथ से मैला ढोने वालों, कृषि, कोऑपरेटिव और आर्थिक बदलावों से जुड़े बिल भी संसद में पेश किए जाएंगे.

नए बिलों को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, "पहले तो मैं कह दूँ कि तीन अध्यादेशों का हम बिल्कुल स्पष्ट तरीके से विरोध कर रहे हैं, इसमें कोई किंतु नहीं है, परंतु नहीं है, स्पष्ट तरीके से, 100 प्रतिशत कृषि संबंधित तीन अध्यादेश, जो जारी किए गए थे, हम इसके ख़िलाफ़ हैं. जैसा कि आप लोग जानते होंगे ये दो अध्यादेश एग्री मार्केटिंग पर हैं और तीसरा वाला एसेंशियल कमोडिटी कानून पर है."

उन्होंने कहा, "दो अध्यादेश ऐसे हैं, जो सांसद और मंत्रियों के वेतन में 30 प्रतिशत की कटौती की बात करते हैं. हम उसका पूरा समर्थन कर रहे हैं, पर हम इस संदर्भ में सवाल उठा रहे हैं. एक, यहां सांसदों का वेतन कटा जा रहा है और साथ-साथ आप 20,000-25,000 करोड़ लेकर सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट की शुरुआत कर रहे हैं. तो एक तरफ आप कह रहे हैं कि सरकार की तिजोरी में पैसा नहीं है और दूसरी तरफ राजपथ की ओर से सरकारी दफ्तरों, कार्यालयों का 20-25 हजार करोड़ का पुनर्विकास हो रहा है, ऐसा क्यों हो रहा है?"

सभी का होगा कोविड – 19 टेस्ट

राज्यसभा की एक एडवाइज़री के मुताबिक परिसर में घुसने वाले सभी लोगों का कोविड -19 टेस्ट किया जाएगा.

राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को अपना टेस्ट करवाया. सभी सदस्यों से आग्रह किया गया था कि वे सत्र शुरू होने से 72 घंटे पहले आरटी-पीसीआर टेस्ट करवा लें.

सांसदों की सुविधा के लिए संसद परिसर के अंदर ही टेस्ट की सुविधा मुहैया करवाई गई और राज्यसभा सचिवालय से आग्रह किया गया कि सभी की रिपोर्ट सत्र शुरू होने से पहले उन्हें दे दी जाए.

सांसदों के ड्राइवर समेत दूसरे स्टाफ़ के भी टेस्ट किए जाएंगे, किसी के पॉज़ीटिव पाए जाने पर प्रोटोक़ॉल के अनुसार कदम उठाए जाएंगे.

हर सांसद को कोविड किट दी जाएगी जिनमें मास्क, सैनीटाइज़र और ज़रूरत की दूसरी चीजें शामिल होंगी.

सोशल डिस्टेंसिंग का रखा जाएगा खयाल

संसद सत्र के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का ख़ास खयाल रखा जाएगा.

राज्यसभा के सांसदों में से 57 सांसद राज्यसभा के अंदर बैठेंगे, 51 गैलरियों में और 136 लोकसभा के चेंबर में बैठेगें.

अध्यक्ष के दोनों तरफ़ खड़े होने वाले मार्शल फ़ेस मास्क औऱ शील्ड का प्रयोग करेंगे.

लोकसभा के सदस्यों में से 257 सदस्य लोकसभा चैंबर में बैठेंगे, 172 लोकसभा की गैलेरी में और 60 सदस्य राज्यसभा के चेंबर में.

सीटों के बीच पॉली कार्बन शीट लगाई जाएंगी. दोनों ही सदनों में 4 स्क्रीन लगाई जाएंगी.

सांसदों की सीटों पर माइक्रोफ़ोन और साउड कंसोल की व्यवस्था की गई है ताकि वो बहस में हिस्सा ले सकें.

सदन के भीतर दस्तावेज़ों की हार्ड कॉपी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

सभी दस्तावेज डिजिटल रूप में मौजूद होंगे. लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के मुताबिक टेंपरेचर स्कैनर और थर्मल कैमरा से मॉनीटरिंग भी की जाएगी.

ऐप से ली जाएगी एटेंडेंस

अभी तक सांसदों की अटेंडेंस रजिस्टर पर मार्क की जाती थी लेकिन कोरोना को ध्यान में रखते हुए एक मोबाइल ऐप बनाया गया है जिस पर सांसद अपनी उपस्थिति दर्ज करवा सकते हैं.

लोकसभा की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक ये ऐप सिर्फ पार्लियामेंट हाउस कॉमप्लेक्स के कोर एरिया में ही काम करेगा और बाहरी इलाकों में नहीं.

हालांकि, सांसदों के लिए रजिस्टर भी मौजूद रहेंगे.

मीडिया और गेस्ट के लिए नए नियम

मीडिया के लोगों के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है. एक बार में एक तय संख्या से ज़्यादा मीडियाकर्मियों को अंदर आने की इजाज़त नहीं होगी. सेंट्रल हॉल में सांसद या मीडियाकर्मी नहीं जा पाएंगे.

विज़िटर और गेस्ट को भी परिसर के अंदर आने की इजाज़त नहीं होगी.

सोनिया गांधी और राहुल गांधी नहीं होंगे उपस्थिति

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी मेडिकल टेस्ट के लिए शनिवार को विदेश रवाना हो गई हैं. राहुल गांधी भी उनके साथ गए हैं. इसलिए वो सत्र के शुरुआती दिनों में मौजूद नहीं रहेंगे.

कांग्रेस पार्टी महासचिव और प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह जानकारी दी है. ॉ

सुरजेवाला ने ट्वीट किया, "कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चिकित्सा जांच के लिए आज विदेश गई हैं. यह चिकित्सा जांच महामारी के कारण टल गई थी. उनके साथ राहुल गांधी भी गए हैं."

सोनिया गांधी और राहुल गांधी की इस गैर मौजूदगी का कांग्रेस पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर कांग्रेस पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई कहते हैं, "पहले ही विपक्ष मज़बूत नहीं है, सोनिया और राहुल के नहीं होने से विपक्ष और कमज़ोर पड़ जाएगा."

न प्रश्न काल, न सर्वदलीय बैठक

संसद के मॉनसून सत्र से पहले सभी दलों की औपचारिक बैठक इस बार नहीं हुई. सरकार ने प्रश्न काल हटाने का फैसला पहले ही कर लिया था. विपक्ष इसका लगातार विरोध कर रहा है.

इस सत्र में प्राइवेट मेम्बर बिजनेस की इजाज़त नहीं दी गई है. शून्य काल होगा और सांसद जनता से जुड़े ज़रूरी मुद्दे भी उठा सकेंगे, लेकिन उसकी अवधि घटा कर 30 मिनट कर दी गई है

हालांकि, सरकार की तरफ़ से विपक्ष को भरोसा दिलाया गया है कि प्रश्न काल की उनकी माँग पर विचार किया जाएगा.

क्या सत्र बुलाना सिर्फ खानापूर्ति है?

हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर चंचल कुमार सिंह बताते हैं, "संविधान के अनुच्छेद 85 में ये प्रावधान है कि संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से ज़्यादा का अंतर नहीं हो सकता है. और इस छह महीने की गिनती पिछले सत्र के आख़िरी दिन से अगले सत्र के पहले दिन के बीच की जाती है."

संसद का पिछला सत्र 29 मार्च तक चला था. इसलिए सितंबर के आख़िर तक संसद का फिर से बैठना संविधानिक रूप से ज़रूरी भी था. लेकिन इस बार संसद की कार्यवाही के लिए जो नियम कायदे तय किए गए हैं, उसे देखते हुए कई जानकारों की ये राय है कि सरकार सदन का सत्र बुलाकर महज़ खानापूर्ति कर रही है.

वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी कहती हैं, "विपक्ष लगातार मांग कर रहा था इसलिए सरकार ने सत्र बुला लिया, लेकिन कई वरिष्ठ सांसद और दक्षिणी राज्यों के सांसद कोरोना के कारण इसमें हिस्सा नहीं ले पाएंगे. देश की अलग-अलग जगहों पर ज़मीनी हालात क्या हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाएगी जो कि अभी के दौर में यह बहुत ज़रूरी है. सरकार को ऐसे इंतज़ाम करने चाहिए थे कि वो जहां हैं वहीं से शामिल हो सकते हैं."

नीरजा मानती हैं कि प्रश्नकाल के न होने से भी काफ़ी नुक़सान होगा, कई महत्वपूर्ण सवालों के जावाब देने से सरकार बच जाएगी.

राशिद किदवई की राय भी मिलती-जुलती है. उनके मुताबिक, "प्रश्नकाल तो विपक्ष का एक हथियार है, इसके नहीं होने से विपक्ष की ताकत कम होगी."

कोरोना के कारण पैदा हुए हालात, गिरती अर्थव्यवस्था और चीन से तनाव – आमतौर पर ऐसे मुद्दों को लेकर सदन में हंगामा होने की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार विरोध का तरीका क्या होगा?

नीरजा चौधरी कहती हैं, "विपक्ष विरोध की कोशिश तो करेगा लेकिन मुझे नहीं लगता है वो बहुत सफ़ल होंगे. उनकी संख्या पहले से ही बहुत कम है. वो एक जगह पर नहीं बैठेंगे, वो वेल में भी नहीं जा सकते और अगर वॉकआउट कर गए, तो कोई फ़ायदा नहीं होगा.”

पिछले सत्र के समय कुछ सांसदों ने कोरोना के माहौल को देखते हुए संसद सत्र जल्द समाप्त करने की मांग की थी. लेकिन तब उनकी माँग को एक बार खारिज कर दिया गया था.

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