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मॉनसून सत्र में तीन तलाक़ बिल पर बीजेपी का ज़ोर
- Author, मोहम्मद शाहिद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बुधवार से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है लेकिन इसके शुरू होने से दो दिन पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के एक ट्वीट से हलचलें शुरू हो गई हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को ट्वीट करके कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में महिला आरक्षण बिल को पास कराने को लेकर बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हैं.
उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र को भी ट्वीट किया. उन्होंने ट्वीट में लिखा, "हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि वह महिला सशक्तिकरण के योद्धा हैं. वक़्त आ गया है कि वह पार्टी की राजनीति से ऊपर उठें, कही गई बात को पूरा करते हुए महिला आरक्षण बिल संसद में पास कराएं. कांग्रेस उन्हें बिना शर्त समर्थन देती है."
संसद के मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पेश होगा या नहीं, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन जानकार मानते हैं कि इस सत्र का कम हंगामेदार रहना मुश्किल है.
कांग्रेस की क्या है रणनीति?
मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होकर 10 अगस्त तक चलेगा. 2019 के आम चुनावों से पहले इस सत्र को काफ़ी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी सत्र से सत्तारुढ़ दल की आगे की चुनावी रूपरेखा तय होगी.
महिला आरक्षण विधेयक का मुद्दा छेड़कर कांग्रेस ने ज़रूर आगामी सत्र को लेकर अपनी मंशा ज़ाहिर कर दी है.
सोमवार को मॉनसून सत्र को लेकर कांग्रेस की बैठक हुई और उसने तय किया है कि पार्टी महिला आरक्षण के अलावा अल्पसंख्यकों, किसानों, दलितों का मुद्दा उठाएगी.
कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "कांग्रेस का पहला मुद्दा विधायिका में महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण दिलाने का होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनावों में महिलाओं से वादा किया था कि वह इसे लागू करेंगे. इतना भारी बहुमत मिलने के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो राहुल गांधी जी ने चिट्ठी लिखी और पहले सोनिया गांधी जी ने भी चिट्ठी लिखी थी जिसका जवाब आज तक नहीं आया है."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आय बढ़ने का दावा करते हैं लेकिन कांग्रेस इस सत्र में किसानों का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाएगी.
प्रियंका ने कहा, "मोदी सरकार कह रही है कि उसने न्यूनतम समर्थन मूल्य 50 फ़ीसदी बढ़ा दिया है लेकिन व्यापक लागत को जोड़ा जाए तो वह 10-12 फ़ीसदी ही है. इस तरह से किसानों के साथ धोखा हुआ है. एससी-एसटी एक्ट को जिस तरह से बदलने की कोशिश की गई, उसका मुद्दा भी हम उठाएंगे."
महिला आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी ने कहा है कि राहुल गांधी इसके अलावा और भी बहुत से मुद्दों पर उन्हें समर्थन दे सकते हैं.
बीजेपी प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "अगर समर्थन के लिए इतने उत्साहित हैं तो और दूसरे कामों को लेकर भी समर्थन कर सकते हैं."
बजट सत्र के न चल पाने को लेकर बीजेपी साफ़तौर पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को ज़िम्मेदार ठहराती है. पिछली बार सदन नहीं चल पाने के कारण इस बार लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सांसदों को पत्र लिखकर सबसे अपील की है कि 16वीं लोकसभा के अंतिम वर्ष में अधिक से अधिक काम करें और राजनीतिक लड़ाई सदन के बाहर लड़ें.
इस बार का सत्र कैसा रहने वाला है, इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार राधिका रामसेशन कहती हैं कि यह मॉनसून सत्र बहुत दिनों तक या बहुत आराम से नहीं चलने वाला है.
रामसेशन कहती हैं, "यह काफ़ी छोटा सत्र है और सरकार कौन-से विधेयक पारित कर पाएगी इस पर संशय है. बीजेपी कहती रही है कि महिलाओं को 33 फ़ीसदी आरक्षण देने के वह पक्ष में है और वह कहती है कि उसने पार्टी में यह किया भी है. हालांकि, उसने नहीं किया है."
"महिला आरक्षण विधेयक पुरुष सांसद नहीं चाहते हैं और इसके साथ कई पेंच भी है. इसके अलावा समाजवादी पार्टी, जेडीयू और अन्य क्षेत्रीय पार्टियां इसके ख़िलाफ़ रही हैं. इन परिस्थितियों में नहीं लगता है कि यह पारित होगा."
तीन तलाक़ को लेकर गंभीर मोदी सरकार
केंद्र सरकार ने इस सत्र में तकरीबन 18 महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किए हैं जिनमें उसका सबसे अधिक ज़ोर तीन तलाक़ बिल पर है. हाल ही में आज़मगढ़ में चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक़ पर कांग्रेस को घेरा था.
कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी तीन तलाक़ बिल को पारित करने को लेकर कहती हैं कि तीन तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया था लेकिन उस पर कोई नीति लाने की जगह मोदी सरकार सिर्फ़ राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगी है.
वह कहती हैं, "सरकार ने जो अब नीति बनाई है वह उस समुदाय की महिलाओं के विरुद्ध है क्योंकि जब यह मामले कोर्ट में आएंगे तो वे महिलाएं ख़ुद को ठगा पाएंगी. इसमें हमने देखा कि विपक्षी दलों की राय नहीं ली गई और महिलाओं को वहीं का वहीं छोड़ दिया."
तीन तलाक़ के अलावा बीजेपी अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित विधेयक को लेकर गंभीर है.
इस पर रामसेशन कहती हैं, "ख़राब प्रबंधन के कारण पिछड़े वर्गों के लिए राष्ट्रीय आयोग बनाने का क़ानून पारित नहीं हो पाया था. इसको बीजेपी इस बार पारित करवाना चाहेगी. बीजेपी इस बार वह विधेयक पारित कराना चाहेगी जो सामाजिक न्याय या बीजेपी के सांप्रदायिक एजेंडे को पूरा करते हों ताकि आने वाले चुनावों में उनको कुछ लाभ मिले."
राज्यसभा के उप-सभापति पद पर पेंच
इस समय राज्यसभा के उप-सभापति का पद ख़ाली है और इसको लेकर विपक्ष अपना उम्मीदवार उतारने का प्रयास कर रहा है.
प्रियंका कहती हैं कि सारे दलों को लेकर साथ चलेंगे ताकि एक राय बने और गठबंधन की तरफ़ क़दम हो और साथ ही एक उम्मीदवार उतारा जाए.
वह कहती हैं कि अभी इस मुद्दे पर राय नहीं बन पाई है. वहीं, रामसेशन कहती हैं कि उप-सभापति पद के लिए बीजेपी भी चुनाव नहीं चाहती है.
उनका कहना है, "दो दिन से इसे टाले जाने की बात चल रही है क्योंकि अगर यह हुआ तो एनडीए गठबंधन के सहयोगी तितर-बितर हो सकते हैं. विपक्ष भी अपना उम्मीदवार खड़ा करना चाह रहा है और टीएमसी के उम्मीदवार का नाम भी है. ऐसा लग रहा है कि राज्यसभा के सभापति और उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू एक पैनल बना सकते हैं जिसमें छह सांसद होंगे. यह एक प्रावधान है."
मॉनसून सत्र में क्षेत्रीय दल भी अपने-अपने विधेयक ला सकते हैं. पिछले सत्र में टीडीपी अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास कर रही थी लेकिन वह ला नहीं पाई. इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस भी आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर विधेयक ला सकती है.
वहीं, बीजेपी तीन तलाक़ को आपराधिक घोषित करने के अलावा मेडिकल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग, आपराधिक क़ानून संशोधन विधेयक 2018, भगोड़ा आर्थिक अपराध विधेयक 2018 जैसे विधेयकों को पारित कराना चाहेगी.
इन सबसे इतर देखना यह होगा कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने जो सर्वदलीय बैठक बुलाई है, उसमें क्या आम सहमति बनती है.
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