क्या टल सकता है राज्य सभा के उपसभापति का चुनाव?

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारतीय संसद का ऊपरी सदन यानी राज्य सभा में राजनीतिक दलों की अजीब स्थिति है. इस सदन में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी को बहुमत तो नहीं ही है, विपक्षी दलों के पास भी आंकड़े नहीं हैं.

यही वजह है कि उपसभापति के चयन को लेकर मामला फंसा हुआ है.

इसी महीने कांग्रेस के नेता और उपसभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल समाप्त हो गया है. कांग्रेस ने उन्हें दोबारा मनोनीत नहीं किया है और ऐसी स्थिति में उपसभापति का चयन किया जाना है.

भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि उपसभापति भी उसका हो. मगर बहुमत नहीं होने की वजह से वो पार्टी के किसी सदस्य के नाम को आगे नहीं कर पा रही है.

राज्य सभा में सदन के नेता अरुण जेटली के घर पर इस मुद्दे को लेकर बैठक भी बुलाई गई, जिसमे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सहित वरिष्ठ नेताओं ने भी शिरकत की.

इसी बैठक में सुझाव आया कि एनडीए के किसी घटक दल से उपसभापति का नाम आगे किया जाए और उसपर आम सहमति बनाने की कोशिश की जाए.

हालांकि शिरोमणि अकाली दल के सदस्य नरेश गुजराल के नाम पर चर्चा की गयी. मगर उनके नाम पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाई है.

वहीं, विपक्षी दल भी चाहते हैं कि उपसभापति विपक्ष से ही चुना जाए.

इसको लेकर भी आम सहमति बनाने की कोशिश की गयी. चार राज्यों के मुख्यमंत्री यानी चार क्षेत्रीय दलों के नेता दिल्ली में मिले. मागर इनके बीच भी सहमति नहीं बन पाई.

इन नेताओं में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के एचडी कुमारस्वामी और केरल के पिनाराई विजयन शामिल थे.

मगर अभी तक कोई भी नाम तय नहीं हो पाया है.

कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा में 51 सदस्य हैं. इसका मतलब है कि वो अपना उम्मीदवार क्षेत्रीय विपक्षी दलों पर नहीं थोप पाएगी.

भारतीय जनता पार्टी अपने घटक दलों के सहारे भी बहुमत में नहीं है. इसलिए पार्टी के लोगों को लगता है कि अगर नरेश गुजराल का नाम आगे किया जाता है तो बीजू जनता दल और दूसरे दलों का समर्थन भी उसे मिल सकता है.

बीजू जनता दल के नेता और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और नरेश गुजराल अच्छे दोस्त हैं और हम उम्र भी हैं. राजनीति में आने से पहले दोनों ने साथ में मिलकर व्यवसाय भी किया है.

दोनों ही राजनीति में आना नहीं चाहते थे और दोनों को ही उनके पिता ने राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया.

मगर इनके नाम पर सहमति बन पाएगी या नहीं, इसको लेकर चर्चा चल रही है.

वहीं, विपक्ष की तरफ से तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सुखेंदु शेखर राय के नाम पर चर्चा चल रही है. लेकिन बाम दल इनका समर्थन करेंगे, ऐसे आसार नज़र नहीं आ रहे हैं.

एनडीए के एक महत्वपूर्ण घटक - जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद हरिवंश कहते हैं कि भाजपा अगर उपसभापति के चयन को लेकर विपक्ष के साथ आम सहमति बना पाती है तो ये अप्रत्याशित होगा.

ख़ास तौर पर मौजूदा राजनीतिक माहौल में. हालांकि उनका यह भी कहना था कि राजनीति में ऐसा माहौल बना हुआ है जब सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों में सहमति हो ऐसा मुश्किल है.

भारतीय जनता पार्टी को लंबे समय से कवर करते रहने वाली वरिष्ठ पत्रकार राधिका रामासेशन कहती हैं कि ज़रूरी नहीं है कि उपसभापति का चयन चुनाव की प्रक्रिया से ही किया जाए.

लेकिन मानसून सत्र से पहले ही तय हो जाना चाहिए कि कौन उम्मीदवार होंगे.

वो कहती हैं कि जहां सत्तारूढ़ गठबंधन को बहुमत नहीं है वहीं विपक्षी दलों में भी आपस में मतभेद हैं. ऐसे में आम सहमति बनाने की डगर सबके लिए मुश्किल होगी.

राजनीतिक मामलों के जानकार उर्मिलेश कहते हैं कि अमूमन ऐसा देखा जाता रहा है कि जिस दल को सदन में बहुमत होता है वो अपना उपसभापति भी बनवा लेती है.

मगर राज्यसभा में सीटों का गणित किसी के भी पक्ष में नहीं है. इस लिए पेंच फंसा हुआ है.

संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है जो 20 अगस्त तक चलेगा. इसलिए राज्य सभा के उपसभापति को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज़ हो गई हैं.

भाजपा हो या विपक्ष, सभी अपने अपने उम्मीदवारों के लेकर चर्चा कर रहे हैं.

मगर क्या मौजूदा राजनीतिक माहौल में राज्यसभा के उपसभापति के चयन को लेकर आम सहमति बन पाएगी ? ये एक बड़ा सवाल है.

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