चीनी सेना ने अरुणाचल प्रदेश के 5 युवकों को छोड़ा: आज की बड़ी ख़बरें

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चीन की सेना ने अरुणाचल प्रदेश से लापता हुए पांच युवकों को शनिवार को भारत को सौंप दिया है. औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद सभी को किबिट्ठु इलाक़े में भारतीय सेना को सौंप दिया गया.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट कर बताया कि पांचों युवक स्वस्थ हैं लेकिन उन्हें कुछ दिनों के लिए क्वारंटीन किया जाएगा.
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शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने सूचना दी थी कि चीन की सेना ने अरुणाचल प्रदेश के युवाओं को वापस लौटाने की पुष्टि की है.
उनके अनुसार, चीन की सेना ने एक पूर्व निर्धारित स्थान पर उन युवकों को भारतीय सेना को सौंपने की बात कही थी.
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बीते रविवार को अरुणाचल प्रदेश के पांच युवक अपर सुबांसिरी ज़िले में भारत-चीन सीमा के पास से लापता हो गए थे.
इसे लेकर चीन से हॉटलाइन पर संपर्क किया था. इसके बाद उन्होंने सूचना दी थी कि 'चीन की पीएलए' ने पुष्टि की है कि पाँचों युवक उन्हें मिले हैं.'
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हालांकि सोमवार को इन पांच भारतीयों के लापता होने को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के सवाल का जवाब देते हुए चीन ने यह भी कहा था कि वह अरुणाचल को भारत का हिस्सा नहीं मानता, बल्कि यह चीन के दक्षिणी तिब्बत का इलाक़ा है.

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इसराइल पर बहरीन के फ़ैसले को ईरान ने कहा शर्मनाक
इसराइल के साथ समझौता कर अपने रिश्तों को सामान्य करने के बहरीन सरकार के निर्णय को ईरान ने शर्मनाक बताया है.
ईरान के विदेश मंत्री ने वहाँ के सरकारी न्यूज़ चैनल से बातचीत में कहा कि 'बहरीन ने एक शर्मनाक निर्णय लिया है.'
उन्होंने कहा, "बहरीन के शासक भी अब यहूदियों के उन गुनाहों में शामिल समझे जायेंगे जिन्हें मध्य-पूर्व क्षेत्र और मुस्लिम जगत के लिए एक ख़तरा माना जाता है."
इसराइल और खाड़ी देश बहरीन अपने संबंधों को पूरी तरह से सामान्य बनाने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करने को सहमत हुए हैं. इस बात की घोषणा अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को की थी.
एक ट्वीट में राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा था, "30 दिनों के अंदर इसराइल के साथ शांति समझौता करने वाला दूसरा अरब देश."
दशकों से ज़्यादातर अरब देश यह कहते हुए इसराइल का बहिष्कार करते रहे हैं कि वो फ़लीस्तीनी विवाद के निपटारे के बाद ही इसराइल से संबंध स्थापित करेंगे.
लेकिन पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई भी इसराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य करने पर सहमत हुआ था.
तभी से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि बहरीन भी ऐसा ही कर सकता है.

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पाकिस्तानी पत्रकार बिलाल फ़ारूक़ी की गिरफ़्तारी पर हंगामा
पाकिस्तान में सरकार के आलोचक पत्रकार बिलाल फ़ारूक़ी को शुक्रवार को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
पाकिस्तान के अख़बार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने बताया कि शनिवार तड़के उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया. बिलाल फ़ारूक़ी इसी अख़बार में न्यूज़ एडिटर हैं.
बिलाल सेना, सरकार और धार्मिक कट्टरवादियों के आलोचक माने जाते हैं.
पुलिस ने बताया कि उन्हें सेना के अपमान और धार्मिक विद्वेष फैलाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़ पुलिस रिपोर्ट में लिखा है कि बिलाल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए पाकिस्तान की सेना का अपमान किया है और असामाजिक तत्व अपने निजी हितों के लिए इन पोस्ट का इस्तेमाल करते रहे हैं.
इस मामले में पुलिस ने साइबर क्राइम क़ानून का हवाला दिया है. इस क़ानून के बारे में आलोचक कहते हैं कि इसकी भाषा इतनी अस्पष्ट है कि इसका ग़लत इस्तेमाल कर सामान्य ऑनलाइन गतिविधियों को अपराध घोषित कर दिया जाता है.

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उनकी गिरफ़्तारी के बाद सोशल मीडिया पर पत्रकारों और आम लोगों ने नाराज़गी ज़ाहिर की. कई लोगों ने गिरफ़्तारी को सही भी ठहराया.
कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा था कि पाकिस्तान में मीडिया स्वतंत्र है.
लेकिन हाल ही में पाकिस्तान में उन पत्रकारों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई है जो सरकार के आलोचक रहे हैं.
जुलाई में सरकार और सेना के आलोचक पत्रकार मतीउल्लाह जान को अग़वा कर लिया गया था. कई घंटे बाद वे वापस अपने घर लौट पाए.
आज तक उनके अगवा होने को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है.
इसी हफ़्ते एक पूर्व पत्रकार इस्लामाबाद में लापता हो गए और कई दिन बाद लौटे. उन्होंने नहीं बताया कि उनके साथ क्या हुआ.
बिलाल ने इस पूर्व पत्रकार के 'ज़बरदस्ती गायब' कर दिए जाने को लेकर ट्वीट किया था- 'ताक़तवर लोग इस देश में क़ानून से भी ऊपर हैं.'
पिछले साल पत्रकार शाहज़ेब जिलानी को भी साइबर आतंकवाद, हेट स्पीच, धोखाधड़ी, मानहानि की धाराओं में गिरफ़्तार किया था. लेकिन सबूत ना होने की वजह से कोर्ट ने मुक़दमा ख़ारिज कर दिया.
पिछले साल कम से कम चार पत्रकार और ब्लॉग लिखने वालों की उनकी रिपोर्ट के चलते हत्या कर दी गई.
इस हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) ने पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा को लेकर चिंता जताई थी.
अपने बयान में यूएनएचसीआर ने कहा, "हमने अपनी चिंता सरकार से साझा की है और तुरंत ठोस कदम उठाने को कहा है ताकि पत्रकारों और मानवाधिकार के रक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो."

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दिल्ली मेट्रो की सभी लाइनें आज से शुरू, जानिए ज़रूरी बातें
दिल्ली मेट्रो की सभी लाइनें यात्रियों के लिए अब खोल दी गई हैं. मेट्रो सेवा को धीरे-धीरे पूरी तरह चालू करने के तीसरे चरण में शनिवार से एयरपोर्ट मेट्रो भी शुरू कर दी गई है.
मेट्रो अपने सामान्य वक़्त के मुताबिक़ ही चलेंगी यानी सुबह छह बजे से रात 11 बजे तक.
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डीएमआरसी के मैनेजिंग डायरेक्टर मंगू सिंह ने यात्रियों से अपील की है कि अपनी यात्रा को इस तरह से प्लान करें कि अति व्यस्त समय में जाने से बचें.
उन्होंने कहा कि सभी दफ़्तर के मालिकों से भी प्रार्थना है कि ''वे अपने कर्मचारियों को भीड़ से बचाने के लिए टाइम बदलने की सुविधा दें. ये ना समझें कि सब कुछ ठीक हो गया है. जो घर से काम कर सकते हैं, वे उसे जारी रखें.''
अपने वीडियो मैसेज में मंगू सिंह ने कहा, "पहले हम 250 से 300 यात्री एक कोच में ले जाते थे लेकिन अब सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से क्षमता घटाकर 50 कर दी गई है."
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डीएमआरसी ने बताया कि इससे पहले दो चरणों में मेट्रो सेवा शुरू की गई थी जिसमें एक दिन में एक लाख 28 हज़ार के क़रीब लोगों ने यात्रा की. सामान्य दिनों में मेट्रो की राइडरशिप लगभग 26 लाख प्रतिदिन होती है.
नोएडा-ग्रेटर नोएडा रूट पर पहले की तरह सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक सेवाएं मिलेंगी. 'पीक आवर' में 7:30 मिनट का अंतर होगा जबकि 'नॉर्मल आवर' में 10 मिनट की फ्रिक्वेंसी होगी.
कोरोना संक्रमण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने कुछ प्रोटोकॉल्स तैयार किए हैं जिनका यात्रियों को पालन करना होगा.

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मेट्रो स्टेशन में थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही अंदर आने दिया जाएगा, मास्क पहनना ज़रूरी है.
टोकन का इस्तेमाल बंद है, स्मार्ट कार्ड से ही लोग सफ़र कर पाएंगे. कंटेनमेंट जोन्स के स्टेशन बंद रहेंगे.
कोविड-19 की वजह से 22 मार्च से ही दिल्ली मेट्रो सेवा बंद थी.
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