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कोराना दौर में प्लेसमेंट ऑफ़र वापस ले रही हैं कंपनियाँ, छात्र परेशान
- Author, शुभम किशोर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
आईआईटी गुवाहाटी से पढ़े राघव पांडे फ़िलहाल हैदराबाद की एक कंपनी में काम कर रहे हैं, लेकिन यह उनका ड्रीम जॉब नहीं है, ना ही उन्हें उतने पैसे मिल रहे हैं, जितनी उन्हें उम्मीद थी. दिसंबर महीने में उनकी प्लेसमेंट एक अच्छी कंपनी मे हो गई थी.
बीबीसी से वो कहते हैं, "मुझे पहले ही दिन नौकरी मिल गई थी, एक स्टार्टअप ने मुझे बिज़नेस एनैलिस्ट के पद के लिए चुना. मैं आगे की पढ़ाई करना चाहता था, नौकरी मेरे लिए एक बैकअप था, जनवरी में उन्होंने मुझे ऑफ़र लेटर दे दिया. सब कुछ सही चल रहा था, फिर कोरोना आ गया, मैं अपने घर चला आया. कुछ दिनों बाद मेरे प्लेसमेंट कॉर्डिनेटर का फ़ोन आया, उन्होंने बताया कि मेरा जॉब ऑफ़र वापस ले लिया गया है."
इंजीनियरिंग फ़िजिक्स में बीटेक करने वाले राघव के मुताबिक़ इस ख़बर ने उनको परेशान कर दिया. उन्होंने नए सिरे से नौकरी खोजनी शुरू की.
हैदराबाद की एक कंपनी से उन्हें ऑफ़र मिला, लेकिन उतने पैसे का नहीं जितना वो चाहते थे. उन्होंने कई और जगहों पर कोशिश की, लेकिन उन्हें कुछ बेहतर नहीं मिला और उन्होंने कम पैसे में काम करना स्वीकार कर लिया.
कोविड 19 के दौरान दुनियाभर के छात्रों पर बुरा असर पड़ा है, स्कूल के छात्र ऑनलाइन पढ़ाई करने को मजबूर हैं, तो कॉलेज में दाख़िले को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
ज्वाइनिंग में हो रही है देरी
लेकिन वो लोग, जिनका यह कॉलेज में आख़िरी साल था और जिन्हें प्लेसमेंट का इंतज़ार था, उन्हें अब अपने भविष्य को लेकर चिंता सता रही है.
आईआईटी धनबाद से माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले प्रणव सिंह बताते हैं, "मुझे एक कंपनी ने ऑफ़र दे दिया है, लेकिन क्योंकि हमारा काम घर से नहीं हो सकता इसलिए ज्वाइनिंग नहीं हुई है, उन्हे अक्तूबर तक इंतज़ार करने के लिए कहा है, जब हालात ठीक होंगे तो तारीख़ बताई जाएगी, हमारी नौकरी पर तो बहुत असर नहीं पड़ेगा लेकिन अगले बैच पर इसका बुरा असर हो सकता है. साल के अंत में उनके प्लेसमेंट शुरू होते हैं, अगर पिछले बैच की ज्वाइनिंग नहीं मिलेगी, तो कंपनियाँ और नौकरियाँ नहीं दे पाएँगी."
कुछ दूसरी सरकारी संस्थाओं में पढ़ने वाले बच्चों को भी ऐसी ही समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, ख़ासतौर पर वो जिनका प्लेसमेंट किसी स्टार्टअप में हुआ है.
छात्रों का कहना है कि बड़ी कंपनियाँ तो इस संकट के दौर में अपने आप को संभाल लेंगी, लेकिन स्टार्टअप, जो अच्छे पैकेज पर लोगों को नौकरियाँ दे रहे थे, वो अब ऑफ़र वापस ले रहे हैं.
आईटी कंपनियाँ, जिनके लिए वर्क फ़्रॉम होम आसान है और जिन्हें बहुत नुक़सान नहीं हुआ है, उनके प्लेसमेंट पर बहुत ज़्यादा असर नहीं पड़ा है, लेकिन सर्विस सेक्टर की कंपनियों पर कोरोना की बुरी मार पड़ी है.
आईआईटी गांधीनगर के एक छात्र ने बताया कि कंपनियों के रुख़ में बदलाव देखा जा सकता है, वो पहले से बहुत अधिक सेलेक्टिव हो गई हैं. कई दूसरी स्ट्रीम के छात्रों का भी कहना है कि कंपनियाँ पहले की तरह प्लेसमेंट के लिए नहीं आ रहीं.
दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने नाम न उजाकर करने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि कई वैसी कंपनियाँ, जो हर साल कैंपस प्लेसमेंट के लिए आती थीं, इस साल नहीं आईं.
पहले के सालों के मुक़ाबले उनके कॉलेज में प्लेसमेंट का रिकॉर्ड ख़राब रहा है. हालाँकि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में स्थिति बदलेगी.
क्या कहना है कॉलेजों का
बीबीसी ने हालात जानने के लिए कुछ कॉलेजों से संपर्क किया.
आईआईटी मद्रास के एडवाइज़र (ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट) प्रोफ़ेसर सीएस शंकर राम के मुताबिक़, "जहाँ तक इस साल की बात है, हमने कंपनियों और बच्चों के लिए रजिस्ट्रेशन खोल दिया था. कई लोगो को प्री प्लेसमेंट ऑफ़र भी मिले. जहाँ तक कंपनियों की बात है, हमें उनकी तरफ़ से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. अभी मेरे पास अभी बिल्कुल सटीक डेटा नहीं है, लेकिन संकेत अच्छे हैं."
वो आगे बताते हैं, "एक आम राय बन रही थी कि कोविड के कारण हालात बहुत ख़राब होंगे, लेकिन अभी तक का डेटा बता रहा है कि हालात इतने ख़राब नहीं है, थोड़ा असर ज़रूर हो सकता है, अगले एक से दो महीने में मैं आपको इस पर बेहतर जानकारी दे पाऊंगा."
आईआईटी मंडी के असोसिएट प्रोफ़ेसर सनी जफ़र के मुताबिक़, कंपनियों के ऑफ़र में पिछले सालों के मुक़ाबले कोई कमी नहीं आई है, लेकिन ज्वाइनिंग की तारीख़ों में देर ज़रूर हो रही है.
लेकिन क्या कंपनियाँ बाद में ऑफ़र वापस भी ले सकती है, इसके जवाब में ज़फ़र कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि अब कंपनियाँ ऑफ़र वापस लेंगी, अगर ऑफ़र वापस लेना होता, तो वो अबतक ले चुकी होतीं."
आईआईएम इंदौर के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर हिमांशु राय ने लिखित जवाब में बीबीसी को बताया, "कोविड के दौरान भी कंपनियों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है. हमें ख़ुशी है कि देश की बड़ी कंपनियों ने हमारे छात्रो पर अपना भरोसा जताया है."
संस्थान छात्रों को भरोसा दिला रहे हैं, कई कंपनियाँ भी प्लेसमेंट में रुचि दिखा चुकी हैं, छात्रों का ये भी कहना है उनके कॉलेज अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश कर रहे हैं.
लेकिन कोरोना को लेकर अनिश्चितता और कई कंपनियों को हो रहे आर्थिक नुक़सान को देखते छात्र अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं.
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