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कोरोना के कारण सबरीमला मंदिर का सोना गिरवी रखने पर मजबूर हुआ बोर्ड
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
कोरोना महामारी का असर आम लोगों की आमदनी पर तो पड़ ही रहा है, मंदिरों की आमदनी में भी भारी गिरावट देखी जा रही है.
दरअसल मंदिरों की आमदनी का एक बड़ा ज़रिया चढ़ावे के रूप में आने वाला नकद या सोना चांदी है. लेकिन कोरोना महामारी के कारण चढ़ावे में भी काफ़ी कमी आ गई है.
हालत ये है कि मंदिर प्रशासन सोने के बदले क़र्ज़ लेने को मजबूर हो गया है.
केरल के त्रावणकोर देवासोम बोर्ड (टीडीबी) के अधिकारियों ने अपने अंतर्गत आने वाले केरल के सभी 1250 मंदिरों के सोने का आकलन करना शुरू कर दिया है.
अधिकारियों के अनुसार वो इस सोने के बदले भारतीय रिज़र्व बैंक की गोल्ड मॉनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत लोन लेना चाहते हैं.
सबरीमला की सालाना 350 करोड़ की कमाई
बोर्ड के अंदर आने वाले सबसे अमीर मंदिर सबरीमला को सालाना क़रीब 350 करोड़ रुपए की आमदनी हो जाती थी लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसकी आमदनी भी बहुत कम हो गई है.
टीडीबी के चेयरमैन एन वासू ने बीबीसी हिंदी से बातचीत के दौरान कहा, "हमलोग अपने सभी मंदिरों में रखे सोने के वज़न की जाँच कर रहे हैं और इसकी लिस्ट को अपडेट कर रहे हैं. इस प्रक्रिया के पूरे हो जाने के बाद हमलोग गोल्ड मॉनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत लोन लेंगे."
शुरुआती आकलन के अनुसार बोर्ड क़रीब 1000 किलो सोना गिरवी रखने की योजना बना रहा है. वासू ने कहा कि हो सकता है कि उससे भी ज़्यादा सोना गिरवी रखा जाए.
उनका प्रस्ताव है कि उन्हें सोने की क़ीमत पर 2.5 प्रतिशत ब्याज मिलेगा जिससे उन्हें सालाना क़रीब 10 करोड़ रुपए मिलते रहेंगे.
लेकिन वासू के अनुसार सालाना दस करोड़ भी शायद पर्याप्त नहीं होंगे.
उनका कहना था, "इसके बावजूद हम लोग अपनी वित्तीय परेशानियों को पूरी तरह ख़त्म नहीं कर सकेंगे. हमारे पाँच हज़ार रेगुलर कर्मचारी हैं जिनकी हमें तन्ख़्वाह देनी होती है. हमारे चार हज़ार रिटायर्ड कर्मचारी हैं जिनकी पेंशन देनी होती है. इसी में हर महीने क़रीब 40 करोड़ रुपए चले जाते हैं. इसके अलावा पूजा की सामग्री और कुछ और काम में क़रीब 10 करोड़ ख़र्च होते हैं. कुल मिलाकर हमारा महीने का ख़र्च क़रीब 50 करोड़ है."
पिछले छह महीनों में आमदनी की कमी के कारण मंदिर प्रशासन पर मंदिर को चलाने को लेकर भारी दबाव है.
वासू के अनुसार बोर्ड को अब तक क़रीब 300 करोड़ का घाटा हो चुका है. बोर्ड की आमदनी का सबसे बड़ा ज़रिया सबरीमला मंदिर है.
वासू का कहना था, "सबरीमला में सीज़न के समय तमाम ख़र्चों को काटकर भी हम लोगों के पास 350 करोड़ रुपए बच जाते थे. बोर्ड को सबसे ज़्यादा पैसा वहीं से आता है. राज्य सरकार ने 100 करोड़ का वादा किया था, लेकिन अभी 50 करोड़ रुपए दिए हैं. लेकिन दूसरे राज्यों की तरह इस राज्य (केरल) पर भी कोरोना के कारण वित्तीय बोझ बढ़ गया है."
बोर्ड के चेयरमैन वासू ने ये भी स्पष्ट किया कि दो तरह के ज़ेवरों को लोन के लिए इस्तेमालन नहीं किया जाएगा. एक तो वो आभूषण जो मूर्तियों को पहनाए जाते हैं और दूसरे वो जो जिनकी एंटीक वैल्यू है.
उन्होंने कहा कि लोन के लिए केवल उसी सोने को गिरवी रखा जाएगा जो भक्तों ने चढ़ावे के रूप में दिए हों.
केरल हाईकोर्ट जाएगा बोर्ड
वासू ने कहा कि सोने को गिरवी रखने की इजाज़त लेने के लिए बोर्ड केरल हाईकोर्ट जाएगा क्योंकि उनके अनुसार "देवता नाबालिग़" हैं.
उनके अनुसार इस सारी प्रक्रिया में क़रीब दो से तीन महीने लगेंगे.
साल 2015 में रिज़र्व बैंक ने गोल्ड मॉनेटाइज़ेशन स्कीम शुरू किया था. इसके तहत कोई व्यक्ति या संस्था सोने को गिरवी रखकर लोन ले सकता है.
केरल की टीडीबी पहली संस्था नहीं है जो सोने को गिरवी रखकर लोन लेने के बारे में सोच रही है. इससे पहले तिरुमल तिरुपति देवास्थानम (टीटीडी) और पुणे की शिर्डी साई बाबा मंदिर ने भी अपने सोने को गिरवी रख कर लोन लिया था. सोने को गिरवी रखकर होने वाली आमदनी पर सरकार कोई टैक्स नहीं लगाती है.
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने इसी हफ़्ते क़रीब 10 बड़े मंदिरों के बोर्ड के साथ दिल्ली में बैठक की थी. उस बैठक में टीडीबी के अधिकारी भी शामिल थे.
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