You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सोनभद्र में हज़ारों टन सोना मिलने की संभावना, कब शुरू होगी खुदाई
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में में ज़मीन के अंदर सैकड़ों टन सोना दबा होने का पता चला है. राज्य के खनिज विभाग ने इसकी पुष्टि की है और जल्द ही विभाग इस सोने को निकालने के लिए खुदाई शुरू कर देगा.
बताया जा रहा है कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया यानी जीएसआई की टीम पिछले पंद्रह साल से इस मामले में सोनभद्र में काम कर रही थी. आठ साल पहले टीम ने ज़मीन के अंदर सोने के ख़जाने की पुष्टि कर दी थी. यूपी सरकार ने अब इसी सोने की खुदाई करने के मक़सद से इस टीले को बेचने के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है.
सोनभद्र के खनन अधिकारी केके राय कहते हैं, "जीएसआई की टीम लंबे समय से यहां काम कर रही थी. अब नीलामी को लेकर आदेश आ चुका है. इसी क्रम में जियो टैगिंग शुरू की गई है और जल्द ही नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. ज़िले में यूरेनियम के भंडार का भी अनुमान है जिसके लिए केंद्र सरकार की कुछ टीमें खोज में लग गई हैं और जल्द ही वो अपने अभियान में सफल होंगी."
खनन अधिकारी के मुताबिक, नीलामी से पहले चिह्नित खनिज स्थलों की जियो टैगिंग के लिए गठित सात सदस्यीय टीम 22 फरवरी तक खनन निदेशक को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. इसके बाद ही ऑनलाइन निविदा जारी करने का राज्य सरकार निर्देश देगी. उन्होंने बताया कि निविदा को हरी झंडी मिलने के बाद खनन की अनुमति मिलेगी.
जीएसआई की मानें तो सोनभद्र की सोन पहाड़ी पर क़रीब तीन हज़ार टन सोना और हरदी ब्लॉक में क़रीब छह सौ किलो सोने का भंडार है. जीएसआई के मुताबिक इन जगहों के अलावा पुलवार और सलइयाडीह ब्लॉक में भी लौह अयस्क के भंडार का पता चला है. हालांकि इतने लौह अयस्क में कितना सोना मिलेगा, यह अयस्क की गुणवत्ता पर निर्भर करता है. जानकारों के मुताबिक़, यदि अयस्क अच्छा है तो इससे निकलने वाले सोने की मात्रा अयस्क की आधी मात्रा के बराबर हो सकती है.
जीएसआई ने यहां की ज़मीन में 90 टन एंडोलुसाइट, नौ टन पोटाश, 10 लाख टन सिलेमिनाइट के भंडार की भी खोज की है और जल्द ही इन धातुओं की खुदाई का रास्ता भी साफ़ हो सकेगा. भूतत्व और खनिज विभाग ने ने ई-ऑक्शन यानी नीलामी की प्रक्रिया के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है और जल्द ही सोने के ब्लॉकों की नीलामी कर दी जाएगी.
साल 2005 में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने अध्ययन करके सोनभद्र में सोना होने के बारे में बताया था और इस बात की पुष्टि भी साल 2012 में हो गई. लेकिन इसे निकालने यानी खनन की दिशा में अब तक कोई ठोस काम नहीं हुआ. लेकिन अब ब्लॉकों की नीलामी के लिए शासन ने सात सदस्यीय टीम भी गठित कर दी है. यह टीम पूरे क्षेत्र की जिओ टैगिंग करेगी और 22 फरवरी 2020 तक अपनी रिपोर्ट भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय लखनऊ को सौंप देगी."
भारी मात्रा में खनिज पदार्थ पाए जाने की संभावना के चलते ज़िले के कई भू-भागों में हेलिकॉप्टर से सर्वेक्षण किया जा रहा है. इस सर्वेक्षण में विद्युतचुम्बकीय उपकरणों स्पेक्ट्रोमीटर उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है. इन उपकरणों का कुछ भाग हेलिकॉप्टर के नीचे लटका रहता है जो कि ज़मीन की सतह से क़रीब सौ मीटर की ऊंचाई पर उड़ते हुए सर्वेक्षण करता है.
सोनभद्र के ज़िलाधिकारी एन. राजलिंगम के अनुसार, "जिस पहाड़ी में सोना मिला है, उसका क्षेत्रफल क़रीब 108 हेक्टेयर है. सोन की पहाड़ियों में तमाम क़ीमती खनिज संपदा होने के कारण पिछले 15 दिनों से इस इलाक़े का हेलिकॉप्टर सर्वेक्षण किया जा रहा है. सोनभद्र के डीएम के मुताबिक, सोनभद्र के अलावा भारत सरकार मध्य प्रदेश के सिंगरौली ज़िले, यूपी के ही बलरामपुर और झारखंड के गढ़वा ज़िले के आंशिक भू-भागों में हेलिकॉप्टर के ज़रिए सर्वेक्षण किया जा रहा है."
स्थानीय पत्रकार ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी बताते हैं, "सोनभद्र की दुद्धी तहसील क्षेत्र में स्थित सोन पहाड़ी का इतिहास सदियों पुराना है. यहां पर कभी राजा बरियार शाह का क़िला हुआ करता था. क़िले के दोनों ओर शिव पहाड़ी और सोन पहाड़ी स्थित हैं. मान्यता है कि राजा के किले से लेकर दोनों पहाड़ियों में अकूत सोना, चांदी और अष्ट धातु के खजाने छिपे हुए हैं. इसी जगह एक किसान को क़रीब दस साल पहले जुताई के दौरान बहुमूल्य धातुओं का ख़ज़ाना मिला था जिसे प्रशासन ने अपने कब्ज़े में ले लिया था."
ये भी पढ़ें
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)