चीन ने कहा- भारत सीमा विवाद को और जटिल न बनाए

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भारत में चीन के दूतावास ने उम्मीद जताई है कि भारत सीमा विवाद को और जटिल नहीं बनाएगा. चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने बुधवार रात ट्वीट कर कहा कि दोनों देशों को इस मामले में मिलकर क़दम उठाना होगा.
जी रोंग ने अपने ट्वीट में लिखा- उम्मीद है कि भारत ऐसा कोई क़दम नहीं उठाएगा, जिससे सीमा पर स्थिति और जटिल हो. चीन उम्मीद करता है कि भारत सीमावर्ती इलाक़ों में शांति और स्थिरता के लिए उपयुक्त माहौल तैयार करेगा. उन्होंने द्विपक्षीय रिश्तों में प्रगति का भी ज़िक्र किया.
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एक सवाल के जवाब में कि भारतीय पक्ष का कहना है कि चीन के साथ सीमा पर संघर्ष लंबा खिंच सकता है, चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन कूटनीतिक और सैनिक माध्यम से एक-दूसरे से संपर्क में हैं. मौजूदा समय में भारत-चीन सीमा पर तनाव कम हो रहा है.
इस बीच भारत में चीन के दूतावास की पत्रिका के जुलाई अंक में भारत और चीन के रिश्तों पर विस्तार से बात की गई है. इस पत्रिका में भारत में चीन के राजदूत सुन वीडॉन्ग ने लिखा है कि किसी भी रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं.
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चीनी राजदूत ने लिखा है कि भारत और चीन के बीच के सीमा विवाद और सीमा पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना से दोनों देशों और इनके नेताओं शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी की द्वीपक्षीय साझेदारी की दूरदृष्टि से हमें भटकना नहीं चाहिए.
उन्होंने सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति में कमी का ज़िक्र किया है और कहा है भारत और चीन को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार होना चाहिए. चीन के राजदूत ने कहा कि 1990 के दशक से चीन और भारत इस सहमति पर पहुँचे थे कि वे दोनों एक दूसरे के लिए ख़तरा नहीं हैं.
'एक दूसरे के लिए ख़तरा नहीं भारत और चीन'

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उन्होंने लिखा है- 2018 के वुहान सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि दोनों देश एक दूसरे के लिए विकास के मौक़े उपलब्ध कराएँगे न कि एक दूसरे के लिए ख़तरा पैदा करेंगे.
चीन के राजदूत सुन वीडॉन्ग ने कहा कि यही आधारभूत सिद्धांत दोनों देशों के भविष्य के रिश्ते का आधार होना चाहिए. उन्होंने इस पर भी ज़ोर दिया कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को विवाद में बदलने नहीं देना चाहिए.
चीनी राजदूत ने कहा कि चीन और भारत को सीमा विवाद का उपयुक्त समाधान निकालना चाहिए, जो दोनों पक्षों को मंज़ूर हो. उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत और चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में दरार का ढोल पीट रहे हैं, ये ग़लत सोच है. उन्होंने कहा कि भारत और चीन को शक की बजाए विश्वास बनाने की ज़रूरत है.
15 जून को गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच संघर्ष में भारत के 20 सैनिकों की मौत हो गई थी. चीन ने हताहतों के बारे में आधिकारिक रूप से अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है. तब से सीमावर्ती इलाक़े में दोनों देशों की ओर से सैनिकों का जमावड़ा है.

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हालाँकि दोनों देशों में सैनिक और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है और तनाव कम करने की भी दावा किया जा रहा है.
हालाँकि पिछले महीने जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख़ में कहा था कि दोनों देशों में बातचीत जारी है और समस्या का हल निकल जाना चाहिए. लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि ये मामला कहाँ तक हल होगा, इसकी गारंटी वे नहीं दे सकते.
15 जून की घटना के बाद भारत और चीन के बीच कई स्तर पर बातचीत हुई है. दोनों देशों की सेनाएँ कई इलाक़ों से पीछे भी हटी हैं, लेकिन अब भी कुछ इलाक़ों को लेकर दोनों देशों में बातचीत जारी है.
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