बिहार बाढ़ः 75 लाख की आबादी प्रभावित, राहत कैंप सिर्फ़ 7

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
राजधानी पटना से दरभंगा की तरफ जाते वक़्त ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर के एन एच 57 पर सैकड़ों परिवार अपनी गृहस्थी का बचा खुचा सामान लेकर बीते 18 दिन से बसे है. मोटी पॉलीथिन शीट को त्रिकोण आकार में तानकर इन लोगों ने घर बनाया है.
जिसके बाहर इनकी पुराने मॉडल की दर्जनों साइकिल, अल्यूमीनियम के बर्तन, धूप में मर्दाना कपड़े और रंग-बिरंगी साडियां किसी चीज़ का सहारा लेकर सूखने को पड़ी है. उनकी एकमात्र संपत्ति उनके मरियल से लग रहे जानवर है. जो इस एन एच में कुछ ऊंचे स्थान पर बंधे है. कुछ लोग इनके लिए मुश्किल से जुटाया हुआ हरा चारा काट रहे है.
हरा चारा काट रहे बरूआरी गांव के एक निवासी कहते है, "मवेशी के लिए कुछ नहीं मिला है. कहीं से ढूंढ कर लाते है. बाक़ी हम लोगों को मुखिया जी की तरफ से खिचड़ी दो वक़्त मिलता है, वही खाते हैं. पानी उतर जाएगा तो गांव लौट जाएगें. अपना कमाएगें, खाएगें."
इन सैंकड़ो अस्थायी घर में कई बच्चे भी है. जिसमें से कुछ स्कूल भी जाते थे. लेकिन उनकी किताबें अब बाढ़ के पानी के साथ बह गई. लेकिन किताबों की चिंता तो इन बाढ़ प्रभावित लोगों के दिलो दिमाग में दूर-दूर तक नहीं है. बल्कि अभी उनकी चिंता दूसरी है. सर्पीले एन एच पर तेज़ भागती गाड़ियों से ये परिवार डर रहे है.
चटक नीले रंग की साड़ी पहनी एक बाढ़ पीड़ित कहती है, "गाड़ी से बहुत डर लगता है. दिन में बच्चों के लिए डरते है तो रात में इसके कारण नींद नहीं आती. लेकिन डर के क्या करेंगें?"
सबसे ज्यादा प्रभावित दरभंगा

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बिहार की कुल 75 लाख से ज़्यादा बाढ़ प्रभावित जनसंख्या में अकेले दरभंगा ज़िले की 20 लाख से ज़्यादा की आबादी है. इसके बाद मुजफ्फरपुर की 14 लाख और पूर्वी चंपारण की 10 लाख से ज़्यादा की आबादी प्रभावित है. दरभंगा ज़िले के 18 ब्लॉक में से दरभंगा सदर, बहादुरपुर, हायाघाट, केवटी, बहेड़ी समेत 15 ब्लॉक बाढ़ प्रभावित है.
दरभंगा प्रमंडल के उपनिदेशक, जनसंपर्क एन के गुप्ता कहते है, "राहत का काम लगातार जारी है. हम लोग 392 सामुदायिक रसोई के ज़रिए 1024 गांव के रोज़ाना 2 लाख से ज़्यादा लोगों को भोजन उपलब्ध करा रहे है. कई जगह सूखा राशन भी बांटा रहा है. लोगों को साफ़ पानी मिले इसके लिए 1 लाख 20 हजार हौलोजन टैबलेट वितरित किए गए है."
हनुमाननगर प्रखंड के मनौली गांव के राम स्वार्थ सिंह अपने पूरे परिवार के साथ छत पर रहने को मजबूर है. उनके घर के निचले तल्ले में पानी भरा हुआ है. उन्होने बीबीसी को फोन पर बताया, " नीचे पूरे घर में पानी जमा है. घर का सारा सामान बह रहा है. हम लोग छत पर तो रह रहे है लेकिन हमारी जीवन भर की कमाई ख़त्म हो रही है. सरकार नाव तो दे, कम से कम."
वहीं गांव के ही अंबेश कुमार कहते है, "चारों तरफ पानी है लेकिन पीने का पानी नहीं है. गांव में ऊंचा स्थान पर जो कल (नल) है, वहीं से हम लोग पीने के लिए पानी ढो कर लाते है."
वहीं समस्तीपुर के कल्याणपुर प्रखंड की मीरा देवी कहती है, "बेटा बीमार हो गया. गांव में गले तक पानी भरा है. किसी तरह हेल कर उसे ब्लॉक के अस्पताल लाए है, लेकिन यहां भी दवाई नहीं है."
बिहार में 75 लाख बाढ़ प्रभावित

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11 अगस्त को जारी बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ो के मुताबिक राज्य के 16 जिलों में 75,02,621 लोग बाढ़ प्रभावित है. कुल 126 प्रखंड प्रभावित हैं जिसमें 1260 पंचायतें है.
75 लाख से भी ज़्यादा बाढ़ प्रभावित जनसंख्या में से सिर्फ 5,36,371 लोगों को ही निकाला गया है. इतनी बड़ी प्रभावित जनसंख्या के लिए सिर्फ 7 राहत शिविर चल रहे हैं जिसमें महज़ 12,479 लोग ही रह रहे हैं.
1204 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं जिसमें 9,29,998 लोग खाना खा रहे हैं. वहीं अब बाढ़ के चलते 24 लोगों की और 66 पशुओं की मौत हो चुकी है. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ़ की कुल 33 टीम को बाढ़ राहत के काम में लगाया गया है.
इस संबंध में आपदा प्रबंधन मंत्री लक्ष्मेश्वर राय, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, विभाग के अपर सचिव एम रामचन्द्रुडु ने बात नहीं की.
लक्ष्मेश्वर राय ने क्षेत्र में होने, प्रत्यय अमृत ने मीटिंग में होने और एम रामचन्द्रुडु ने कहा, कि वो इस मामले पर मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं है.
वहीं कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने बीबीसी को बताया, "अभी तक विभाग का अनुमान है कि 8 लाख हेक्टेयर खेती की ज़मीन में पानी घुसा है. लेकिन इसके चलते फसल का कितना नुक़सान हुआ, इसका आंकड़ा पानी निकलने के बाद ही पता चलेगा. बाकी पशुधन के लिए बाढ़ प्रभावित ज़िले में 519 आश्रय स्थल बनाए गए है. उनके लिए चारा, एम्बुलेंस, 350 हेल्थ वर्कर्स के अलावा 200 पशु चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है."
नेपाल सहयोग नहीं कर रहा : नीतीश

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बीती 10 अगस्त को बाढ़ की स्थिति को लेकर 6 राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए समीक्षा बैठक की थी.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक़, "भारत नेपाल समझौते के आधार पर बिहार का जल संसाधन विभाग सीमावर्ती इलाक़े में बाढ़ प्रबंधन का कार्य करता है. हाल के वर्षों में नेपाल सरकार द्वारा पूरा सहयोग नहीं दिया जा रहा है. इस वर्ष भी मधेपुरा ज़िले में पहले से बने हुए बांध की मरम्मती और मधुबनी में नो मैन्स लैंड में बने बांध की मरम्मती कार्य में नेपाल सरकार द्वारा सहयोग नहीं किया गया."
राज्य में बाढ़ प्रभावित परिवार को राहत के तौर पर 6 हज़ार रूपए दिए जाते हैं. इस साल भी अब तक 6 लाख से ज़्यादा परिवारों को ये राशि दी जा चुकी है.
देश का सबसे अधिक बाढ़ ग्रस्त राज्य

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बता दें राज्य में सितंबर माह तक बाढ़ की आशंका बनी रहती है. बिहार भारत का सबसे अधिक बाढ़ ग्रस्त राज्य है और यहां देश का 17.2 प्रतिशत बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है.
राज्य के 38 में से 28 ज़िले बाढ़ प्रभावित हैं जिसमें से 21 उत्तर बिहार के हैं. उत्तर बिहार की ज़्यादातर नदियों जैसे कोसी, गंडक, बागमती, कमला, बूढ़ी गंडक आदि का उद्गम नेपाल है. और हर साल ये बिहार में बाढ़ की वजह भी बनती है.
बिहार कोरोना और बाढ़ से दोहरी लड़ाई लड़ रहा है. कोरोना जिससे निपटने की प्राथमिक ज़िम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है और बाढ़ जिसका प्रबंधन आपदा प्रबंधन विभाग कर रहा है.
दिलचस्प है कि बिहार में इन दोनों विभागों को संभालने की ज़िम्मेदारी प्रत्यय अमृत को दी गई है जो दोनों ही विभाग के प्रधान सचिव है.
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