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'वे यातना देकर हाथियों को मार देते हैं और घड़ियाली आंसू बहाते हैं'
- Author, स्वामीनाथन नटराजन
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
गुजरे सात सालों से संगीता अय्यर धर्म के नाम पर हाथियों के उत्पीड़न को ख़त्म करने के मिशन पर हैं.
वे बीबीसी को बताती हैं, "किस तरह के ईश्वर अपनी ही बनाई गई चीज़ के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार बर्दाश्त कर सकता है? यह बेहद परेशान करने वाला है."
केरल में पैदा हुईं और अब टोरोंटो रह रहीं अय्यर डॉक्युमेंट्री बनाती हैं. वे कहती हैं कि बहुत सारे दूसरे बच्चों की तरह से ही उन्हें भी हाथी देखना अच्छा लगता था.
संगीता अय्यर कहती हैं, "जब मैं छोटी थी तो मैं हाथियों की परेड देखा करती थी और मुझे वो बहुत अच्छा लगता था."
बाद में उन्हें पता चला कि समारोहों में इस्तेमाल होने वाले हाथियों को कितने दर्द से गुजरना पड़ता है.
गहरे जख्म
सालों तक कनाडा में रहने के बाद वे 2013 में भारत लौट आईं ताकि अपने पिता की पहली पुण्यतिथि पर मौजूद रह सकें. इस ट्रिप के दौरान संगीता ने हाथियों को बिना उनके रस्मो-रिवाज वाले गहनों और कपड़ों के देखा. वे उन्हें देखकर हिल गई थीं.
वे कहती हैं, "कई हाथियों के कूल्हों पर गहरे जख़्म थे. इनकी एड़ियों से खून बह रहा था क्योंकि जंजीरों ने इनकी खाल को काट दिया था. इनमें से कई हाथी अंधे हो चुके थे."
वर्किंग और परफॉर्मिंग एनिमल्स की शर्तें साफ रूप से लिखी हुई हैं. संगीता की डॉक्युमेंट्री- गॉड्स इन शेकल्स- में मंदिरों के हाथियों के बुरे हालातों का खुलासा किया गया है.
वे कहती हैं, "ये असहाय होते हैं और इनकी जंजीरें बहुत भारी होती हैं. मेरे लिए यह सब देखना असहनीय था."
प्रतिष्ठा का मामला
हिंदू और बौद्ध परंपरा में हाथियों का अहम दर्जा होता है. सदियों से मंदिरों और बौद्ध मठों में पवित्र कामकाज करने में हाथियों का इस्तेमाल होता है.
श्रद्धालु हाथियों का आशीर्वाद भी लेते हैं.
कुछ हाथियों की प्रतिष्ठा उनके जीवन के बाद भी जारी रहती है.
केरल के मशहूर गुरुवयूर मंदिर के पास ही आपको एक केशवन नाम से बेहद प्रिय हाथी का बड़ा स्टेच्यू दिखेगा.
ढोंग
यह दावा किया जाता है कि केशवन ने 1976 में 72 साल की उम्र में मरने से पहले मंदिर की परिक्रमा की थी.
मंदिर के हाथियों की मौत पर आम लोगों का इकट्ठा होना और शोक जताना एक आम बात है.
संगीता कहती हैं, "वे प्रताड़ना देकर हाथियों को मार देते हैं और उनकी मौत के बाद दिये जलाते हैं और घड़ियाली आंसू बहाते हैं"
वे खुद को एक धार्मिक हिंदू मानती हैं जो कि मंदिरों में हाथियों के इस्तेमाल को बंद करने की वकालत करती हैं.
भारत में 2,500 हाथी इंसानों के क़ब्जे़ में हैं. इनमें से करीब 20 फ़ीसदी हाथी अकेले केरल में हैं. इन हाथियों पर मंदिरों और इंडीविजुअल्स का मालिकाना हक है.
संगीता हाथियों के सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकात्मक स्वरूप को समझती हैं. लेकिन, वे यह जानती हैं कि हाथी बेहद समझदार, भावुक और सामाजिक प्राणी होते हैं.
आतिशबाजी
इनके पांव पक्की जमीनों और पत्थरों के बने रास्तों पर चलने लायक नहीं होते हैं. ये रास्ते गर्मियों में बेहद गर्म हो जाते हैं.
त्योहारों के दौरान तेज आवाज में संगीत बजाया जाता है, शोरगुल होता है, भीड़भाड़ होती है और आतिशबाजी होती है. इस पूरे माहौल में इन हाथियों को रहना होता है.
इन्हें पीटा जाता है ताकि ये दिखावटी बने रहें और कोई प्रतिक्रिया न करें.
संगीता कहती हैं, "इन हाथियों पर अंकुश, कांटे वाली जंजीरों और नुकीले कांटे वाले वाले लोहे के डंडों का इस्तेमाल किया जाता है."
अपने काम के सिलसिले में उन्होंने 25 घंटे की फुटेज़ बनाई और क्रूरता के कई वाक़ये दर्ज किए.
वे कहती हैं, "मैं बुरी तरह से हिल गई थी. मैंने खुद से कहा कि मैं इन खूबसूरत जानवरों से मुंह नहीं मोड़ सकती."
हाथियों पर होने वाले जुल्म की कहानियां सुनाते हुए वे भावुक हो जाती हैं.
तिरुवंबड़ी मंदिर प्राधिकार के यहां मौजूद एक हाथी रामबद्रन की दुर्दशा वे बताती हैं. "इस हाथी की सूंड़ को लकवा मार गया था और यह पानी के टैंक में अपनी सूंड़ डाल देता था, लेकिन इसके लिए पानी पीना मुश्किल था. यह बेहद दर्दनाक था."
इसकी हालत इतनी ख़राब हो गई थी कि एनिमल वेल्फेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया ने इसकी दयालु रूप से हत्या करने का सुझाव दिया था. लेकिन, मरने तक इसे मंदिर के समारोहों में इस्तेमाल किया जाता रहा.
लगातार खून बहना
एक और हाथी के शरीर में घावों में पस पड़ गया था. वे बताती हैं, "सांकड़ें उसकी खाल में गहरे तक धंस गई थीं. इन घावों से लगातार खून बहता रहता था. मैं नहीं जानती कि इंसान ऐसा कैसे कर लेते हैं?"
महावत हाथियों को यातनाएं देते हैं, लेकिन कमाई के चक्कर में इन चीजों पर कोई ध्यान नहीं देते हैं.
मुनाफे़ का कारोबार
वे कहती हैं, "हाथी लॉबी ग्रुप बेहद मजबूत है क्योंकि इसमें बहुत सारा पैसा है. कुछ हाथियों को 10,000 डॉलर प्रति त्योहार से भी ज़्यादा पैसों में लाया जाता है."
थेचिकोट्टुकावु रामचंद्रन एक ऐसा ही हाथी है जो कि मोटी कमाई कराता है. इसे एशिया के सबसे ऊंचे पालतू हाथी के तौर पर माना जाता है.
यह अभी भी त्रिशूर में होने वाली सालाना हाथी परेड में एक आकर्षण होता है और इसका एक विकीपीडिया पेज भी है.
रामचंद्रन अब 56 साल का है और आंशिक रूप से अंधा हो गया है. कई दफा यह तनाव की वजह से भीड़ पर दौड़ पड़ा है और इस वजह से छह लोग मारे गए हैं. इसके बावजूद वन्य अधिकारियों की इसे रिटायर करने की कोशिशों को अड़ंगा लगा है.
इसे अभी भी शोर-शराबा करती भीड़ में भेजा जाता है.
संगीता कहती हैं कि नए त्योहारों को खड़ा किया जा रहा है ताकि और ज़्यादा पैसा बनाया जा सके.
एशियाई हाथियों में केवल नर हाथियों के ही दिखाने के दांत होते हैं. केरल के मंदिर ऐसे ही हाथियों को पसंद करते हैं. लेकिन, मादा हाथी भी दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इस्तेमाल की जाती हैं.
देखते ही हुआ प्यार
2014 में संगीता ने एक मादा हाथी को देखा और वे इसे देखकर मुग्ध हो गई थीं. वे कहती हैं, "जब मैंने पहली बार लक्ष्मी को देखा तो यह पहली नजर का प्यार था."
वे कहती हैं, "मैंने उसे छुआ. उसकी गर्दन के नीचे हाथ फेरा. उसने मेरे सिर पर अपनी सूंड़ रख दी ताकि मुझे सूंघ सके. उनकी सूंघने की शक्ति जबरदस्त होती है."
एक साल बाद जब वे लक्ष्मी से मिलीं तो वे शॉक्ड रह गईं. वे कहती हैं, "मैं उसकी आंखों से आंसू बहते देखकर सदमे में आ गई."
लक्ष्मी ने महावत का खाना उठा लिया था और गुस्से में महावत ने उसे बुरी तरह से मारा. उसने अंकुश से उसकी आंख में मारा और इससे लक्ष्मी अंधी हो गई.
संगीता को लगता है कि निश्चित रूप से लक्ष्मी बहुत भूखी रही होगी.
वे कहती हैं, "मंदिरों में इन हाथियों को खाना इसलिए नहीं दिया जाता क्योंकि इन्हें डर होता है कि ये मंदिरों के अंदर गोबर करेंगे."
संगीता ने शिकायत की और महावत को हटा दिया गया.
प्रताड़ना
हाथी महावत की बात मानें इसके लिए वे इन्हें प्रताड़ित करते हैं.
नर हाथियों को कैद में एक हिंसक ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. वे कहती हैं, "महावत बांधकर हाथइं को 72 घंटे तक मारते हैं ताकि ये बुरी तरह से टूट जाएं. इसके बाद हाथी महावत के कहने पर चलने लगते हैं."
अवैध रूप से पकड़ना
श्रीलंका और थाइलैंड जैसे बौद्ध देशों में भी हाथियों को ऐसी ही ड्यूटी करनी पड़ती हैं.
संगीता को लगता है कि मांग के चलते हाथियों के बच्चों को अवैध रूप से पकड़ने की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं. साथ ही इससे जबरदस्ती ब्रीडिंग को भी बढ़ावा मिल सकता है.
जबरदस्ती ब्रीडिंग एक तरह से किसी महिला के साथ रेप होने जैसा है.
हाथियों के बच्चों को टूरिस्ट्स के मनोरंजन में इस्तेमाल किया जाता है. वे कहती हैं कि थाइलैंड इन चीज़ों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है.
संगीता को भारत सरकार से विमिन अचीवर्स का अवॉर्ड मिला है. लेकिन, उनके राज्य में उनके प्रयासों पर मिलीजुली प्रतिक्रिया मिलती है.
वे कहती हैं "कुछ लोग इसे पूरी तरह से ख़ारिज करते हैं. वे खुद को ग़लत मानना ही नहीं चाहते."
मुखर होती आवाज़
उन्हें संस्कृति के तथाकथित रखवालों से धमकियां मिलती हैं. वे कहती हैं, "मुझे सोशल मीडिया पर दबाने की कोशिश की जाती है. लेकिन, हमारी आवाज़ अब पहले से ज़्यादा तेज़ और मज़बूत हो रही है."
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