कोझिकोड विमान हादसा: क्या नौ साल पुरानी चेतावनी को याद नहीं रखा गया? - प्रेस रिव्यू

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एयर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान शुक्रवार रात केरल के कोझिकोड हवाई अड्डे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें विमान के दोनों पायलटों समेत 18 लोगों की मौत हो गई.

इस हादसे पर टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार ने कैप्टन मोहन रंगानाथन का बयान प्रकाशित किया है जिनके अनुसार "कोझिकोड का करीपुर एयरपोर्ट बहुत असुरक्षित एयरपोर्ट है और इस हवाई अड्डे पर, ख़ासकर ख़राब मौसम में या बारिश के बाद विमान को उतरने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए."

कैप्टन मोहन रंगानाथन नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा बनायी गई 'सेफ़्टी एडवाइज़री कमेटी' के मुख्य सदस्यों में से एक रहे जिन्होंने नौ साल पहले यह चेतावनी दी थी.

अख़बार ने लिखा है कि "कोझिकोड में हुए विमान हादसे को देखकर लगता है कि उनकी चेतावनी को अनसुना किया गया."

कैप्टन मोहन रंगानाथन ने अख़बार से बातचीत में कहा कि "मैंने यह चेतावनी मंगलौर विमान हादसे के बाद दी थी जिसमें 150 से ज़्यादा लोगों की जान गई थी, मगर उस पर ध्यान नहीं दिया गया. करीपुर एयरपोर्ट भी मंगलौर की तरह एक पहाड़ी पर स्थित 'टेबल-टॉप हवाई अड्डा' है जिसकी हवाई पट्टी के एक सिरे पर ढलान है. फिर हवाई पट्टी समाप्त होने के बाद बफ़र ज़ोन भी पर्याप्त नहीं है."

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किसी हवाई पट्टी के इर्द-गिर्द खाली छोड़ दी गई जगह को 'बफ़र ज़ोन' कहा जाता है. इस जगह का इस्तेमाल यह होता है कि प्रतिकूल परिस्थितियों में अगर विमान हवाई पट्टी से आगे निकल जाये तो भी उसे रोकने का मौक़ा रहे.

कैप्टन रंगानाथन के अनुसार, हवाई पट्टी के अंत में कम से कम 240 मीटर का बफ़र ज़ोन होना चाहिए, लेकिन कोझिकोड हवाई अड्डे पर यह सिर्फ़ 90 मीटर है जिसे डीजीसीए ने मंज़ूरी भी दे रखी है.

रिपोर्ट के अनुसार, मंगलौर हादसे के बाद डीजीसीए ने ही कोझिकोड हवाई अड्डे समेत भारत के कम से कम 10 हवाई अड्डों 'हाई रिस्क' श्रेणी में चिन्हित किया था. लेह, कुल्लू, शिमला, पोर्ट ब्लेयर, अगरतला, लेंगपुई, मंगलौर और पटना के हवाई अड्डों का नाम 'हाई रिस्क' सूची में रखा गया था.

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'सुशांत सिंह राजपूत के केस को क्वारंटीन किया गया'

बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी विनय तिवारी शुक्रवार को मुंबई से पटना वापस लौट गये. वे सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच के लिए मुंबई गई बिहार पुलिस की टीम को लीड करने पहुँचे थे.

इससे पहले उनके मुंबई पहुंचने पर बीएमसी के अधिकारियों ने राज्य की नीति का हवाला देते हुए उन्हें 'ज़बरन' क्वारंटीन में भेज दिया था जिस पर काफ़ी हंगामा भी हुआ था.

'द इंडियन एक्सप्रेस' अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि "पटना पुलिस की विशेष गुज़ारिश पर विनय तिवारी को छोड़ा गया. बीएमसी के अधिकारियों ने उनसे कहा कि वे 8 अगस्त से पहले मुंबई शहर से निकल जायें."

अख़बार के अनुसार, मुंबई से निकलते समय पत्रकारों से बातचीत में तिवारी ने कहा कि "बीएमसी ने मुझे नहीं, बल्कि सुशांत सिंह राजपूत के मामले की जाँच को क्वारंटीन किया. बिहार पुलिस की जाँच को रोका गया."

हालांकि, गुरुवार को बीएमसी के कमिश्नर पी वेलरासु ने बिहार पुलिस को एक चिट्ठी लिखकर कहा था कि "वो यह जानकर हैरान हैं कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कोरोना महामारी के दौर में बिहार से हमारे राज्य में आता है और उसे महामारी से संबंधित राज्य के दिशानिर्देशों की कोई जानकारी नहीं थी."

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क़रीब 40% लाभार्थियों को जुलाई में नहीं मिला मुफ़्त राशन

सरकारी योजना के तहत जो अनाज ग़रीबों में बाँटा जाना था, वो उन्हें नहीं दिया गया. इस पर केंद्रीय खाद्य मंत्री राम विलास पासवान से बातचीत के आधार पर 'द हिन्दू' अख़बार ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है.

अख़बार ने पासवान के हवाले से लिखा है कि पंजाब और पश्चिम बंगाल समेत 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण अन्न योजना के तहत जुलाई में मुफ़्त अनाज का वितरण नहीं किया.

इसके परिणामस्वरूप राशन दुकानों के ज़रिये मुफ़्त खाद्यान्न पिछले महीने 81 करोड़ लाभार्थियों में से केवल 62 प्रतिशत तक (49.87 करोड़ तक) ही पहुँच पाया.

पासवान के अनुसार, जुलाई में कम अनाज वितरण का कारण यह भी है कि कुछ राज्य दो महीने, तीन महीने या छह महीने में एक बार में ही अनाज वितरण का कार्यक्रम चलाते रहे हैं.

इस योजना में अप्रैल से ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा क़ानून (एनएफएसए) के तहत चिन्हित लाभार्थियों को मुफ़्त अनाज का वितरण किया जा रहा है. इस पहल का मक़सद कोविड-19 महामारी के कारण लोगों को होने वाली कठिनाइयों से राहत दिलाना है.

इसके अंतर्गत प्रति लाभार्थी 5 किलो अनाज (गेहूँ या चावल) और एक किलो चना उपलब्ध कराया जाता है. योजना शुरू में तीन महीने के लिये लागू की गयी थी लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर नवंबर तक कर दिया गया.

पीटीआई

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भारत ने कहा- 'दाऊद पड़ोसी मुल्क की सरपरस्ती में है'

हिंदुस्तान अख़बार की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया है कि 1993 के मुंबई विस्फोट का मुख्य साज़िशकर्ता दाऊद इब्राहिम और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अन्य आतंकवादी पड़ोसी मुल्क़ की 'सरपरस्ती' में हैं.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उच्च-स्तरीय चर्चा के दौरान भारत ने कहा कि "भारत सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद से पीड़ित रहा है. हमने दो देशों के बीच संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंधों के दंश को प्रत्यक्ष रूप से झेला है. संगठित अपराधी सिंडिकेट, डी-कंपनी, जो सोना और नकली नोटों की तस्करी करता था वह रातों-रात आतंकवादी संगठन में बदल गया और उसने 1993 में मुंबई शहर में सिलसिलेवार विस्फोट कराये. उन हमलों में 250 से ज़्यादा मासूमों की जान गई और लाखों-करोड़ों डॉलर की संपत्ति का नुकसान हुआ."

बयान में किसी देश का नाम लिये बगैर कहा गया कि मुंबई विस्फोटों का सरगना 'एक पड़ोसी देश की सरपरस्ती में है'. इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि वह जगह हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों के व्यापार और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों तथा आतंकी संगठनों का गढ़ है.

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