पाकिस्तान ने भारत में रफ़ाल फाइटर जेट के आने पर क्या कहा?- आज की बड़ी ख़बरें

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पाकिस्तान ने कहा है कि रफ़ाल लड़ाकू विमान ख़रीदे जाने समेत भारत के ज़रिए हथियार जमा किए जाने की वो अनदेखी नहीं कर सकता है.
रफ़ाल लड़ाकू विमान से परमाणु हथियार भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता आइशा फ़ारूक़ी ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफ़िंग के दौरान कहा, "भारतीय वायुसेना के ज़रिए हाल ही में रफ़ाल विमान हासिल किए जाने की ख़बरें हमने देखी हैं. भारत के कुछ पूर्व अधिकारियों और कई अंतरराष्ट्रीय मैगज़ीन के अनुसार रफ़ाल विमानों में दोहरी क्षमता होती है, उनका इस्तेमाल परमाणु हथियारों के लिए भी किया जा सकता है."
बुधवार का पाँच रफ़ाल विमान फ़्रांस से भारत पहुँचे थे. भारत ने फ़्रांस से कुल 36 रफ़ाल विमान ख़रीदे हैं और ये पहली खेप थी.भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रफ़ाल विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने को, 'हमारे सैन्य इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत' बताया था.
भारत-चीन एलएसी पर लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के ठीक छह हफ़्तों बाद भारत में ये रफ़ाल विमान पहुँचे हैं.आइशा फ़ारूक़ी ने कहा कि भारत अपने परमाणु हथियारों के ज़ख़ीरे को बढ़ा भी रहा है और उसे आधुनिक भी बना रहा है.
भारत ने हिंद महासागर को परमाणु हथियारबंद कर दिया है और अपने मिसाइल सिस्टम के ज़रिए उसने अपने हथियारों की तैयारी को और बढ़ा दिया है.
पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपनी जायज़ सुरक्षा ज़रूरतों से ज़्यादा सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है और पश्चिमी देश अपने संकुचित व्यवसायिक फ़ायदे के कारण भारत को आधुनिक तकनीक और हथियार मुहैया कराने में उसकी मदद कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इस तरह के हथियारों की लेन-देन विवादित और संघर्ष वाले क्षेत्रों में हथियारों की होड़ को रोकने के लिए बनाए गए विभिन्न निर्यात नियंत्रण नियमों का भी उल्लंघन करते हैं.
उन्होंने कहा कि इस तरह के आधुनिक उपकरण और हथियार की लेन-देन अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ता देशों की हथियारों की जमाख़ोरी को रोकने के प्रति प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाते हैं.पाकिस्तान ने कहा है कि रफ़ाल लड़ाकू विमान ख़रीदे जाने समेत भारत के ज़रिए हथियार जमा किए जाने की वो अनदेखी नहीं कर सकता है.

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महबूबा मुफ़्ती की नज़रबंदी तीन महीने के लिए और बढ़ाई गई
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती की पब्लिक सेफ़्टी एक्ट (पीएसए) के तहत नज़रबंदी तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई है.
उनकी नज़रबंदी पाँच अगस्त को ख़त्म होने वाली थी लेकिन प्रशासन ने उससे पहले ही उनकी नज़रबंदी को बढ़ाने का फ़ैसला कर लिया.
शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रधान सचिव शालीन काबरा ने उनकी नज़रबंदी को बढ़ाने का आदेश जारी किया.
मुफ़्ती को पिछले साल (2019) पाँच अगस्त को हिरासत में लिया गया था जब भारत की केंद्र सरकार ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को मिलने वाले विशेष दर्जे को समाप्त करने का फ़ैसला किया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख़ में बाँट दिया था.
छह फ़रवरी 2020 को उनके साथ-साथ एक और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह पर भी पीएसए लगाया गया था.
उमर अब्दुल्लाह और उनके पिता फ़ारूक़ अब्दुल्लाह को मार्च में रिहा कर दिया गया था लेकिन महबूबा मुफ़्ती की नज़रबंदी बरक़रार रखी गई थी.
पीएसए के तहत हर तीन महीने पर उसकी मियाद बढ़ाई जाती है नहीं तो नज़रबंद होने वाले व्यक्ति को रिहा करना पड़ता है.
छह मई को महबूबा मुफ़्ती की नज़रबंदी को पीएसए के तहत और तीन महीने के लिए बढ़ाने का फ़ैसला किया गया था.
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