हार्दिक पटेल का अध्यक्ष बनना क्या अहमद पटेल का कमज़ोर होना है? - प्रेस रिव्यू

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हार्दिक पटेल को गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद कुछ अख़बारों ने इसे सोनिया गांधी के क़रीबी कहे जाने वाले 'अहमद पटेल की गुजरात की राजनीति पर पकड़ कमज़ोर होने का संकेत' बताया है.
इकोनॉमिक टाइम्स अख़बार ने लिखा है कि 'कांग्रेस पार्टी ने इस पीढ़ीगत बदलाव के ज़रिए एक मज़बूत संदेश देने की कोशिश की है. साथ ही यह नियुक्ति कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष के पूर्व राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल की गुजरात कांग्रेस की राजनीति पर पकड़ कमज़ोर होने का संकेत भी है.'
रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेताओं के बीच इस निर्णय से असंतोष का माहौल बना हुआ है जबकि प्रदेश बीजेपी के नेताओं को चिंता हो रही है कि हार्दिक पटेल ना सिर्फ़ पाटीदारों के, बल्कि सूरत के हीरा उद्योग से जुड़े प्रवासियों के भी वोट खींच सकते हैं.
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कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हार्दिक पटेल की नियुक्ति का निर्णय राहुल गांधी ने लिया है जो पार्टी में एक नई ऊर्जा डालने का उनका प्रयास है.
दिल्ली के एक बड़े कांग्रेसी नेता ने इकनॉमिक टाइम्स से कहा, "हार्दिक पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का फ़ैसला बहुत ही सधा हुआ फ़ैसला है. वे बहुत ही सक्रिय नेता हैं और ज़मीनी स्तर पर कांग्रेस को खड़ा करने में सहायक साबित होंगे. इसलिए उन्हें एक महत्वपूर्ण पद दिया गया है, पर ये प्रदेश कांग्रेस का सबसे बड़ा पद नहीं है."
नियुक्ति के बाद हार्दिक पटेल ने कहा, "मैंने पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं से बात की. कुछ ने मुझे ख़ुद बुलाया और सभी मेरे इस पद पर नियुक्त होने से ख़ुश हैं. हर किसी का मुझे समर्थन है. आख़िरकार हम सब चाहते हैं कि गुजरात में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बने."
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हार्दिक पटेल पिछले कुछ समय से लगातार कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिल रहे थे. हार्दिक ने गुजरात में ज़मीनी स्तर पर कांग्रेस के लिए काम करने की इच्छा भी ज़ाहिर की थी.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 'कांग्रेस पार्टी हार्दिक पटेल को राष्ट्रीय स्तर का पद देना चाहती थी लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया और कहा कि अभी वे राज्य स्तर पर ही काम करना चाहते हैं.'

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राजस्थान में सियासी उठापटक के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर सोमवार को विधायक दल की बैठक होनी है. इसमें अनिवार्य रूप से हाज़िर रहने के लिए पार्टी के सभी विधायकों के लिए व्हिप जारी किया गया है.
इस बैठक से पहले राजस्थान के डिप्टी सीएम जिन्हें बागी कहा जा रहा है, उन्होंने दावा किया है कि 30 विधायक उनके समर्थन में हैं और राज्य की गहलोत सरकार अल्पमत में है. जबकि राजस्थान कांग्रेस के इंचार्ज अविनाश पाण्डे ने दावा किया है कि उनके पास 109 विधायकों का समर्थन पत्र है और गहलोत सरकार बहुमत में है.
दैनिक भास्कर अख़बार ने इस सियासी उठापटक पर एक इनसाइड स्टोरी की है. अख़बार ने लिखा है कि 'सचिन पायलट को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाने, प्रदेश में दो डिप्टी सीएम बनाने की अटकलों और राजद्रोह के नोटिस से बात बिगड़ी.'
सचिन पायलट का कहना है कि विधायकों की खरीद-बिक्री के मामले में एसओजी ने उन्हें 120-बी के तहत बयान लेने का नोटिस दिया है. 120-बी राजद्रोह में लगती है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित एक स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा की मौत की ख़बर प्रकाशित की है.
अख़बार ने लिखा है कि नोएडा के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने वाली दसवीं क्लास की 14 वर्षीय छात्रा के ख़ुदकुशी कर लेने की बात स्कूल प्रबंधन ने ना सिर्फ़ लड़की के माता-पिता से छिपाई, बल्कि पुलिस को सूचित किये बिना बड़े ही चुपचाप तरीक़े से उसके शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया.
हरियाणा से वास्ता रखने वाले लड़की के माता-पिता ने एक साल पहले ही अपनी बेटा का इस स्कूल में दाखिला करवाया था.
परिवार का आरोप है कि उनकी बेटी ने 3 जुलाई को आत्महत्या कर ली थी जिसे स्कूल की कुछ लड़कियों ने देखा भी, लेकिन स्कूल ने यह बताई छिपाई.
परिवार को लड़की के बैग से कुछ नोट्स मिले हैं जिनमें कई बार उसके साथ हुए दुर्वव्यहार के बारे में लिखा है.
परिवार का आरोप है कि स्कूल ने उन्हें एक लंबी कहानी सुनाने के बाद ज़बरन ऐसे कागज़ों पर हस्ताक्षर करवाये जिनमें लिखा था कि 'छात्रा की मौत नेचुरल कारणों से हुई.'
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि 'छात्रा के माता-पिता मनगढ़ंत कहानी बना रहे हैं. लड़की ने सुसाइड नोट में अपनी माँ के ख़िलाफ़ लिखा था. परिवार शव का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहता था, इसलिए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया.'

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सभी प्रमुख अख़बारों ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के उस आदेश को जगह दी है जिसमें कहा गया है कि गाड़ियों का फ़िटनेस प्रमाण-पत्र जारी होने से पहले देशभर के वाहनों का फ़ास्टैग ब्योरा दर्ज किया जाये.
इसके लिए मंत्रालय ने एनआईसी को पत्र लिखा है और उसकी प्रतियां सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी गई हैं.
मंत्रालय ने कहा कि वाहन पोर्टल का नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (एनईटीसी) के साथ तालमेल किया गया है.
वाहन सिस्टम में वाहन पहचान नंबर या वाहन पंजीकरण नंबर के जरिये फास्टैग का सारा ब्योरा दर्ज किया जा रहा है.
कहा गया है कि मंत्रालय ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि नए वाहनों के पंजीकरण के साथ और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने से पहले फास्टैग का ब्योरा दर्ज किया जाए.
मंत्रालय ने इस योजना के लिए नवंबर 2017 में अधिसूचना जारी की थी. इस साल मई तक देशभर में कुल 1.68 फास्टैग जारी हो चुका है.
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