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कोरोना वायरस की वजह से सोने की कीमत लगातार बढ़ रही है?
- Author, मोहम्मद शाहिद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कोरोना वायरस महामारी के दौर में एक ओर जहां दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है और नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है, वहीं दूसरी ओर सोने और चांदी के दाम दिन-ब-दिन आसमान छू रहे हैं.
महामारी के बाद पहले से ख़स्ताहाल देश की अर्थव्यवस्था और बुरी स्थिति में पहुंच चुकी है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने इस साल में भारत की विकास दर को लेकर अनुमान लगाया है कि यह 4.5 फ़ीसदी रह सकती है.
भारत ही नहीं आईएमएफ़ ने दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए इस विकास दर का आकलन 4.9 फ़ीसदी किया है.
इन सबके बीच एक ख़बर ज़रूर सबका ध्यान खींचती है, वो है सोने के दाम.
सोने की कीमत भारत में जून महीने की शुरुआत में 46,600 प्रति 10 ग्राम के आसपास थी जो अब 48,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच चुकी है.
वहीं, जून महीने में दुनिया में सोने के दामों में बीते आठ सालों में सबसे अधिक रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.
शुक्रवार को सोने के दामों में गिरावट ज़रूर दर्ज की गई लेकिन यह सिर्फ़ 400 रुपये के आसपास थी. विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के दामों में अभी और तेज़ी देखने को मिलेगी.
एक तरफ़ कोरोना वायरस की महामारी दुनिया में फैल रही है और व्यापार के अधिकतर क्षेत्रों में थोड़ी सुस्ती है, वैसे में सोना क्यों उछाल मार रहा है?
इस पर हमने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद में प्रोफ़ेसर और इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर के चेयरपर्सन प्रोफ़ेसर अरविंद सहाय से बात की.
सोना कमोडिटी है सुरक्षित?
निवेशक या लोग मुनाफ़े के पीछे भागते हैं और यह मुनाफ़ा उन्हें स्टॉक मार्केट, फ़िक्स्ड डिपॉज़िट, विभिन्न प्रकार के बॉन्ड या सोने में पैसा लगाने से मिलता है.
हालात जब सामान्य होते हैं तो यह लाभ स्टॉक मार्केट, बॉन्ड आदि से मिलता है लेकिन जब दुनिया की अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता की स्थिति बन जाती है तो निवेशक सोने की ओर भागते हैं.
उनको लगता है कि सोने से उन्हें सुरक्षा मिलेगी और उसकी क़ीमत नहीं घटेगी. इसकी वजह से निवेशकों में सोने की मांग बढ़ गई है. यह मांग पिछले डेढ़ साल से बढ़ रही है.
नवंबर 2018 में सोने के दाम 30,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास थे लेकिन आज उसी सोने के दाम 50,000 तक पहुंचने जा रहे हैं. बीते चार महीने पहले देखें तो इसका दाम 40-42 हज़ार के आसपास था.
ऐसा नहीं है कि यह अनिश्चितता केवल कोरोना वायरस की वजह से पैदा हुई है. इससे पहले चीन और अमरीका के बीच चले ट्रेड वॉर ने भी इस अनिश्चितता को और बढ़ाया था और सोने के दम बढ़े थे. कोरोना वायरस ने इसके दाम को और रफ़्तार दी है.
कोरोना वायरस ने कैसे असर डाला?
कोरोना महामारी के कारण लोगों की नौकरियां चली गई हैं, अर्थव्यवस्था की विकास दर और घट गई है. पहले विकास दर में 5 फ़ीसदी का अनुमान लगाया गया था लेकिन अब इसमें 6 फ़ीसदी की गिरावट की बात की जा रही है.
लोगों के पास ख़र्च करने के लिए पैसा नहीं है, दुकानें-रेस्टॉरेंट, एयरलाइंस, रेलवे सब बंद है. जिनके पास नौकरियां नहीं हैं वो इस संकट में हैं कि उनका घर कैसे चलेगा, इन सबने अनिश्चितता बढ़ाई है और यह कोरोना वायरस महामारी के कारण आई है.
इस अनिश्चितता ने लोगों में डर पैदा किया है जिसकी वजह से वो ख़र्च करने को तैयार नहीं हैं लेकिन वो सुरक्षा चाहते हैं. यह सुरक्षा वो सोने में निवेश करके ढूंढ रहे हैं. इसकी वजह से निवेश की खपत बढ़ी है.
लोगों के अलावा पूरी दुनिया के बड़े-बड़े केंद्रीय बैंकों ने सोने की ख़रीद बढ़ा दी है. इनमें भारत का केंद्रीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), यूरोपीयन सेंट्रल बैंक, पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना, फ़ेडरल रिज़र्व जैसे बैंक शामिल हैं.
5,000 साल पहले भी सोने को मूल्यवान माना जाता था क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सोने की वैल्यू हमेशा बढ़ती है घटती नहीं है लेकिन इसकी वैल्यू घटती बढ़ती रहती है.
आईआईएम अहमदाबाद के इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर का अनुमान है कि आने वाले 5-6 महीनों में सोने के दाम और बढ़ेंगे क्योंकि इस सेंटर ने साल 2018 में ही आंकलन किया था कि आगे सोने के दाम और बढ़ेंगे.
भारत में सोने की खपत
भारत में सोने की मांग तीन तरह से होती है. पहला गहनों के लिए, दूसरा निवेश के लिए और तीसरा केंद्रीय बैंक अपने पास रिज़र्व रखने के लिए सोना ख़रीदते हैं. देश के केंद्रीय बैंक में जितना सोना होगा उसकी बदौलत उस देश की क्रेडिट रेटिंग उतनी अच्छी होगी.
भारत में सोने के दाम बढ़ने की एक दूसरी वजह बैंकों का 2018-19 में 600 टन सोना ख़रीदना भी है क्योंकि इससे मांग बढ़ी और सोने के दाम ऊपर गए.
फ़िलहाल भारत में गहने के लिए सोने की खुदरा मांग में अधिक गिरावट है लेकिन निवेश की मांग बहुत बढ़ गई है.
भारत में प्रतिवर्ष सोने की खपत 700-800 टन है जिसमें से 1 टन का उत्पादन भारत में ही होता है और बाकी आयात किया जाता है.
इसमें से भी 60 फ़ीसदी गहने के इस्तेमाल में जाता है, 30 फ़ीसदी का बार-कॉइन्स के रूप में निवेश के तौर पर इस्तेमाल होता है जबकि बाकी का उद्योग या मंदिर में चढ़ावे के रूप में जाता है.
भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर?
सोने के दाम में उतार-चढ़ाव से भारतीय अर्थव्यवस्था पर ज़्यादा असर नहीं पड़ने वाला है. हम सोने का आयात अधिक करते हैं जिसके कारण यह केवल व्यापार घाटे के अंतर्गत आता है. इससे अधिक सोने का अर्थव्यवस्था पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है.
महामारी की वजह से हम जिस स्थिति में हैं उससे सोने के कारण अर्थव्यवस्था पर अधिक असर नहीं होने वाला है. लेकिन सरकार अगर कुछ नीतियां बनाए तो उसकी वजह से सोने का इस्तेमाल हम अर्थव्यवस्था में कर सकते हैं.
हमारे देश में तक़रीबन 25,000 टन सोना लोगों के पास रखा हुआ है. इसमें से 10-12 हज़ार टन सोना अमीर लोगों के पास है.
यह सोना बैंक के लॉकरों या घर की अलमारियों में पड़ा है. इस सोने का इस्तेमाल देश की अर्थव्यवस्था में नहीं हो पा रहा है.
सरकार नीति बनाकर यह कर सकती है कि वो इस सोने को इस्तेमाल में ला सकती है और इससे पैसा अर्थव्यवस्था में पहुंचा सकती है क्योंकि लॉकर या अलमारी में पड़ा सोना बिना इस्तेमाल हुए पैसे की तरह है.
उदाहरण के तौर पर मान लीजिए आपके पास एक किलो सोना है जिसकी कीमत क़रीब 48 लाख होगी. उसको गिरवी रखने पर तकरीबन 80 फ़ीसदी तक रक़म मिलेगी जिसको लेकर किसी कारोबार में लगाया जा सकता है या कर्मचारियों को तनख़्वाहें दी जा सकती हैं.
यानी लॉकर में बिना इस्तेमाल हुआ सोना पैसे में बदल गया और वो लोगों के हाथों में पहुंचा जिससे आर्थिक गतिविधि में इज़ाफ़ा हुआ.
यह बेकार पड़े सोने के इस्तेमाल का समय है क्योंकि इससे आर्थिक गतिविधि में तेज़ी आएगी.
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