You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कश्मीर के टिकटॉक स्टार लद्दाख में क्यों मांग रहे हैं शांति की दुआ?
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में इंटरनेट पर प्रतिबंध लगना आम बात है लेकिन ऐसे दौर में भी यहां के युवा कलाकार, अभिनेताओं और मॉडलों ने दुनिया के नए ट्रेंड तक अपनी पहुंच बनाए रखने के लिए ख़ासी जद्दोजहद की है.
लेकिन टिकटॉक समेत 59 चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगने के बाद अब सोशल मीडिया के सितारे लद्दाख में भारत-चीन के बीच शांति बहाली की प्रार्थना करने को मजबूर हैं.
सानिया मीर एक मशहूर फ़िल्म अभिनेत्री बनना चाहती हैं. उन्होंने कुछ बॉलीवुड फ़िल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाई हैं और उनको फ़िल्म इंडस्ट्री में अभिनेता सलमान ख़ान के अलावा कई बड़े नामों के साथ भी काम करने का मौक़ा मिला है.
वो कहती हैं कि अगर वो सोशल नेटवर्किंग ऐप टिकटॉक पर नहीं आई होतीं तो उनका बॉलीवुड में पहुंचने का सपना कभी हक़ीक़त नहीं बन पाता.
टिकटॉक पर लोग अपने अभिनय का टैलेंट भी दिखाते रहे हैं.
लेकिन अब भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव के बाद भारत के टिकटॉक बैन करने के फ़ैसले ने सानिया समेत उन कई कश्मीरी युवाओं को निराश कर दिया है जिन्होंने इसके ज़रिए नाम और पहचान हासिल किया था.
बैन के बाद भी वीडियो बनाना जारी
इस प्रतिबंध ने न केवल कश्मीर के उभरते अभिनेताओं की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया है बल्कि इसने सानिया जैसे कई लोगों को हैरान भी किया है.
सानिया कहती हैं, "मैं आज तक यह भी नहीं जानती थी कि यह चीनी मोबाइल ऐप है. यहां पर फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप जैसी ऐप्स भी हैं और दुनियाभर के लोग इस पर एक-दूसरे से जुड़ते हैं. यह ऐसी दुनिया है जिसमें सीमाएं नहीं हैं. अगर लद्दाख में विवाद के कारण यह हुआ है तो मैं लद्दाख में अमन की दुआ करूंगी. मेरी तमन्ना है कि भारत और चीन इस मुद्दे को जल्द सुलझा लें और टिकटॉक पर से बैन हटा दें."
वो इस प्रतिबंध से बेहद निराश हैं लेकिन उन्होंने वीडियो बनाना बंद नहीं किया है.
सानिया कहती हैं, "हर सुबह मैं टिकटॉक ऐप खोलती हूं और वीडियो बनाती हूं लेकिन मुझे तब दुख होता है जब मैं इसे अपलोड नहीं कर पाती. लेकिन मैं ऐसा करती रहूंगी क्योंकि जब टिकटॉक को वापस बहाल किया जाएगा तब मैं इनको याद के तौर पर अपलोड करूंगी."
ये भी पढ़ें: टिकटॉक के ये सितारे अब कहां दिखाएंगे अपना टैलेंट
'वीडियो अपलोड करने में लगते थे घंटों'
आसिफ़ा भी टिकटॉक इस्तेमाल करती रही हैं लेकिन अब उनकी पसंदीदा ऐप पर बैन लगने के बाद लग रहा है कि किसी ने उनको क़ैद कर लिया है.
वो कहती हैं, "कश्मीर लगभग एक साल से लॉकडाउन में है. संचार के सभी साधन बहुत पहले से हमारे लिए बंद थे. अभी तक हमारे पास हाईस्पीड इंटरनेट तक नहीं है. मुझे अपनी चीज़ें अपलोड करने में घंटों लगते हैं. टिकटॉक पर प्रतिबंध ने जैसे मुझे क़ैद कर दिया है और मेरा दिल तोड़ दिया है."
जुनैद मीर एक स्टैंडअप कॉमेडियन हैं. वो टिकटॉक पर चर्चित रहे हैं और उनके एक लाख फॉलोअर्स रहे हैं. वो कहते हैं इस प्रतिबंध ने "हमारी उम्मीदों की हत्या कर दी है."
मीर कहते हैं कि कश्मीर में कइयों को टिकटॉक की वजह से कमाई हो रही थी.
वो कहते हैं, "मैं हैरत में हूं कि टिकटॉक को क्यों बैन किया गया. कंपनी ने भारत के पीएम केयर्स फ़ंड में कोरोना संकट से निपटने के लिए 3 करोड़ रुपये दान दिए थे. अगर लद्दाख में तनाव से इसका कुछ लेना-देना है तो मैं उम्मीद करूंगा कि दोनों पक्ष इसे जल्दी सुलझाएंगे और टिकटॉक को बहाल करेंगे."
ये भी पढ़ें: टिकटॉक सहित 59 ऐप्स बैन: कैसे लागू होगी ये पाबंदी?
कश्मीरियों के संघर्षों को सोशल मीडिया ने आसान किया
कश्मीरी युवाओं की एक अच्छी ख़ासी संख्या है जो म्यूज़िक, एक्टिंग, पेंटिंग और दूसरी कलाओं में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए संघर्ष कर रही है.
सोशल मीडिया ने उनके संघर्ष को थोड़ा आसान किया है.
सानिया मीर कहती हैं, "एक सही दर्शक वर्ग तक पहुंचने में एक अभिनेता को सालों लगाने पड़ते हैं. टिकटॉक एक एक्टिंग स्कूल की तरह था. वहां पर शानदार अभिनेता, संगीतकार और दूसरी प्रतिभाओं वाले लोग थे जो अपनी प्रतिभा को निखार रहे थे."
"मैं बॉलीवुड तक नहीं पहुंचती अगर किसी ने मुझे टिकटॉक पर नहीं देखा होता. मैं बता नहीं सकती कि मैं कैसा महसूस कर रही हूं. प्रतिबंध की ख़बर एक बम की तरह गिरी है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)