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चीन संबंधित मोबाइल ऐप को लेकर भारत के लोगों में कितनी नाराज़गी
- Author, सचिन गोगोई
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
भारत-चीन सीमा पर चीन के आक्रामक रूख़ को देखते हुए कोविड-19 महामारी को लेकर चीन से नाराज़ लोगों ने अपने स्मार्टफ़ोन के ज़रिए चीन के ख़िलाफ़ विरोध जताना शुरू हो गई.
भारत की उत्तरी सीमा यानी पूर्वी लद्दाख़ इलाक़े में चीनी सैनिकों से भारतीय सैनिकों से झड़प की ख़बर आने के बाद ये आक्रोश और बढ़ गया है. हालांकि आधिकारिक तौर पर भारतीय सीमा में चीनी सैनिकों के प्रवेश की पुष्टि नहीं की गई है लेकिन कुछ भारतीय मीडिया प्लेटफॉर्म ने दावा किया है कि चीनी सैनिक भारतीय सीमा के कई किलोमीटर अंदर तक आ गए थे. हालांकि दोनों तरफ़ की सेना इलाक़े के चार अलग-अलग ठिकानों पर स्टैंड ऑफ़ की स्थिति में तैनात है.
चीन विरोधी संदेशों में बढ़ोत्तरी
चीन का विरोध करने वाले संदेशों की संख्या व्हाट्सऐप पर काफ़ी बढ़ गई है. इन संदेशों में चीनी ऐप को हटाने की अपील की जा रही है. ट्विटर पर भी बॉयकॉटचाइना, बॉयकॉटचाइनीजऐप और बॉयकॉटचाइनीजप्रॉडक्ट जैसे हैशटेग चीन विरोधी भावनाओं को भड़का रहे हैं.
स्वदेशी सामानों की वकालत करने वाले पहले भी चीनी उत्पादों के बॉयकॉट करने की अपील करते रहे हैं लेकिन चीन से संबंधित मोबाइल फोन ऐप डिलिट करने की बात पहली बार देखी जा रही है.
एनडीटीवी न्यूज़ वेबसाइट की एक ख़बर के मुताबिक़ 'रिमूव चाइना ऐप्स' नाम से एक नया एंड्रायड ऐप रजिस्टर्ड कराया गया. गूगल प्ले स्टोर पर कुछ ही दिनों में इसके पचाल लाख डाउनलोड देखने को मिला. यह ऐप स्मार्टफ़ोन को स्कैन करके सबी चाइनीज ऐप को एक क्लिक करने पर अनइंस्टॉल कर देता है. हालांकि यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर तीन जून से हटा लिया गया है.
जिन मोबाइल ऐप्स को निशाना बनाया जा रहा है उनमें टिकटॉक, पबजी मोबाइल, शेयरआईटी, जेंडर, कैम स्कैनर, ब्यूटी प्लस, क्लैश ऑफ़ क्लेन्स, लाइकी और यूसी ब्राउज़र शामिल हैं.
व्हाट्सऐप पर ऐसे संदेश भी भेजे जा रहे हैं जिसमें कहा जा रहा है अगर भारत के लोग टिकटॉक को अनइंस्टाल करना शुरू कर दें तो इस ऐप को चलाने वाली कंपनी बाइटडांस को हर दिन लाखों डॉलर का नुक़सान होगा.
अंग्रेजी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ टिकटॉक को लेकर लोगों में ग़ुस्सा एक टिकटॉक वीडियो बनाने वाले को लेकर भी देखने को मिला है जिसने अपने वीडियो के ज़रिए महिलाओं पर एसिड हमले को कथित तौर पर प्रमोट किया है.
एक समय ऐसा भी देखने को मिला था जब गूगल प्ले स्टोर पर टिकटॉक ऐप की रेटिंग 4.4 से गिरकर दो रह गई थी, क्योंकि भारतीय यूज़र्स निगेटिव रेटिंग दे रहे थे. हालांकि गूगल ने बाद में क़रीब अस्सी लाख निगेटिव रिव्यू को हटाकर टिकटॉक की रेटिंग फिर से 4.4 कर दी है.
हालांकि इस नाराज़गी का बहुत ज्यादा असर नहीं दिख रहा है क्योंकि एक अरब डॉलर से ज़्यादा मूल्य वाले भारत के कई कामयाब स्टार्टअप में चीनी निवेशकों ने पैसा लगाया हुआ है. इसमें फ्लिपकार्ट, पेटीएम, ओइयो, बैजु, ओला, बिग बास्केट, जोमेटो जैसे ब्रैंड शामिल हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 2.34 अरब डॉलर का है जबकि मुंबई स्थित थिंकटैंक गेटवे हाउस के मुताबिक़ चीनी के तकनीकी निवेशकों ने भारतीय स्टार्टअप्स में चार अरब डॉलर का निवेश किया है. इस थिंकटैंक के अनुसार मार्च, 2020 तक एक अरब डॉलर से ज़्यादा वैल्यू वाले 30 भारतीय स्टार्टअप्स में 18 में चीनी निवेशकों का पैसा लगा हुआ है.
हालांकि कुछ एक्सपर्टों मानते हैं कि चीन से संबंधित ऐप्स से नाराज़गी बहुत समय तक नहीं संभव है क्योंकि उनके विकल्प मौजूद नहीं हैं.
साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट सुबीमल भट्टाचार्जी ने बताया, "राष्ट्रवादी भावनाओं से लोकप्रिय ऐप ग़ायब नहीं हो सकते. यह लंबी लड़ाई है. हमें सोचना होगा कि हम उतना ही लोकप्रिय ऐप स्थानीय स्तर पर कैसे विकसित कर सकते हैं."
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