निसर्ग तूफ़ान: मुंबई पर क़हर ढाने वाले तूफ़ान आने की वजह क्या है?

    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में अंफन तूफ़ान आने के कुछ दिन बाद भारत के दूसरे समुद्री तटों पर एक अन्य तूफ़ान निसर्ग ने दस्तक दे दी है.

ये तूफ़ान बुधवार को दोपहर एक बजे से चार बजे के बीच लैंड फॉल (समुद्री तटों से टकराकर ज़मीनी इलाक़ों में घुसते हुए) करके भारी नुक़सान पहुंचा चुका है.

बुधवार शाम के बाद इस तूफ़ान की तीव्रता कम होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं.

लेकिन मुंबई देश के उन शहरों में नहीं है जिन्हें सामान्यत: समुद्री चक्रवातों का सामना करना पड़ता हो.

मुंबई तक क्यों नहीं आते तूफ़ान

समुद्र में जब पानी का तापमान बढ़ने लगता है तो गर्म हुए पानी के ऊपर मौजूद हवा गर्म होकर ऊपर की ओर उठने लगती है.

गर्म हवा के ऊपर उठने से जगह ख़ाली होती है. ऐसे में आसपास मौजूद ठंडी हवा रिक्त स्थान को भरने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ती है.

पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने की वजह से ठंडी हवा एक चक्र की तरह रिक्त स्थान के आसपास घूमने लगती है. यही हवा घूमते घूमते कई किलोमीटर लंबे चक्रवात का रूप ले लेती है.

चक्रवात को ऊपर जो बादलों का छाता दिखता है, वह गर्म हवा के साथ ऊपर गई नमी के बादलों में परिवर्तित होने की वजह से पैदा होता है.

लेकिन निसर्ग तूफ़ान का जन्म अरब सागर में हुआ है जहां इस तरह के तूफ़ान नहीं आते हैं.

जलवायु परिवर्तन पर आधारित अध्ययन आईपीसीसी रिपोर्ट के लेखक डॉ. अंजल प्रकाश इसे एक दुर्लभ तूफ़ान मानते हैं.

वे कहते हैं, "अरब सागर में बंगाल की खाड़ी की अपेक्षा कम समुद्री चक्रवात आते हैं. क्योंकि अरब सागर की मौसमी स्थितियां समुद्री चक्रवातों के लिए मुफ़ीद नहीं हैं. लेकिन जब भी अरब सागर में तूफ़ान आते हैं, ज़्यादातर मॉनसून आने के बाद, तो वे पश्चिम की ओर मुड़कर अदन या ओमान की खाड़ी की ओर जाते हैं. या वे उत्तर की ओर बढ़ते हुए गुजरात की ओर जाते हैं. ये पहला मौक़ा है जब मॉनसून आने के पहले किसी तूफ़ान का जन्म हुआ हो और मुंबई के तटों से टकराया हो."

ये तूफ़ान क्या कहते हैं?

कुछ दिनों के अंतराल पर भारत में बंगाल की खाड़ी में एक भीषण तूफ़ान अंफन और अब निसर्ग का आना भविष्य के लिए क्या संकेत देता है.

बीबीसी ने इसे समझने के लिए जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर शोध करने वाले वैज्ञानिक डॉ. रॉक्सी मेथ्यू कॉल से बात की.

रॉक्सी बताते हैं, "सामान्यत: इस तरह के तूफ़ान नहीं आते हैं. लेकिन बीते दो तीन दशकों से अरब सागर के समुद्री जल के गर्म होने की वजह से इस क्षेत्र की हवा में नमी और गर्मी बनी रहती है. इससे मॉनसून के पहले भी तूफ़ान जैसी स्थिति उत्पन्न होती है. और इस तूफ़ान में यही चीज़ सामने आ रही है."

"लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ने की वजह से इस तरह की मौसमी घटनाओं में बढ़ोतरी और इनकी ताक़त में भारी बढ़त होगी. सरल शब्दों में कहें तो आने वाले सालों में साइक्लोन ज़्यादा आएंगे और भीषण तूफ़ानों की शक्ति में वृद्धि होगी."

जलवायु परिवर्तन से कैसे जुड़ा है निसर्ग तूफ़ान

जलवायु और मौसम दो अलग - अलग चीज़ें हैं. जलवायु किसी क्षेत्र विशेष की मौसमी घटनाओं के सदियों के आकलन पर तय की जाने वाली चीज़ है. वहीं, मौसम प्रति दिन तापमान घटने - बढ़ने और बारिश होने से जुड़ी चीज़ है.

ऐसे में निसर्ग तूफ़ान के लिए जलवायु परिवर्तन को ज़िम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है.

डॉ. अंजल प्रकाश इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि जब कार्बन डाइ ऑक्साइड पेड़ पौधों के संपर्क में आता है तो वे उसे अवशोषित कर लेते हैं.

कार्बन सिंक एक प्राकृतिक जलाशय है जो रिलीज़ होने की तुलना में अधिक कार्बन को अवशोषित करता है, और जिससे कार्बन डाइआक्साइड की एकाग्रता वातावरण से कम होती है. विश्व स्तर पर, दो सबसे महत्वपूर्ण कार्बन सिंक वनस्पति और महासागर हैं.

डॉ. प्रकाश कहते हैं, "दुनिया भर में समुद्री जल कार्बन डाइ ऑक्साइड की वजह से गर्म हो रहा है. ऐसे में जब लगातार समुद्री जल गर्म रहता है तो मॉनसून से पहले भी मॉनसून जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं. हवा में नमी इतनी मौजूद रहती है जिससे तूफ़ान जैसी स्थितियां पैदा होना शुरू हो जाती हैं. ऐसे में जो चीज़ें पहले कभी कभार होती थीं, वे अब सामान्य होती जा रही हैं."

आगे क्या होगा?

इस तूफ़ान को ध्यान में रखते हुए आने वाले समय को लेकर डॉ. रॉक्सी मैथ्यू कॉल चिंतित नज़र आते हैं.

वे कहते हैं, "जब हम ये बात करते हैं कि कोई तूफ़ान आने वाला है. तो मौसम विभाग ये बता सकता है कि ये तूफ़ान कितना शक्तिशाली होगा या फिर इससे कितना और किस तरह का नुक़सान हो सकता है. लेकिन इस तरह की घटनाएं पर बात करते हुए, हमें ये भी याद रखना होगा कि ये घटनाएं तब सामने आ रही हैं जब शहरों में जल-निकासी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और समुद्री जल स्तर भी बढ़ चुका है. ऐसे में जब भारी बारिश, तेज़ हवा, ऊंचा समुद्री जल स्तर और जल-निकासी का न होना एक साथ मिलकर सामने आते हैं तो ये एक बड़ी समस्या खड़ी कर सकते हैं भले ही इनका स्तर वैज्ञानिक मानकों पर ज़्यादा न हो."

मुंबई में ये तूफ़ान आने के बाद भारी तबाही होने की ख़बरें आ रही हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि शहरों को इस तरह की आपदाओं के लिए किस तरह तैयार होना चाहिए.

डॉ. अंजल प्रकाश इस पर बात करते हुए कहते हैं, "अब तक हमने विकास की परिभाषा में से पर्यावर्णीय कारकों को दरकिनार किया हुआ था. हम पर्यावरण को नुक़सान होने की क़ीमत पर भी विकास करते जा रहे थे. लेकिन अब उसका परिणाम सामने आ रहा है."

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