कोरोना वायरसः बिहार में ब्लॉक स्तर के क्वारंटीन सेंटर 15 जून से बंद

    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए

बिहार में ब्लॉक स्तर पर बने सभी क्वारंटीन सेंटर 15 जून को बंद कर दिए जाएंगे.

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, बिहार सरकार के सचिव अनुपम कुमार के मुताबिक़, "ब्लॉक स्तर पर क्वारंटीन सेंटर 15 जून तक कार्य करेंगे. वजह ये कि जितने प्रवासियों को आना था, वे सभी आ चुके हैं या फिर एक-दो दिन के अंदर आ जाएंगे. दो हफ़्ते का क्वारंटीन तब तक पूरा हो जाएगा. इसलिए क्वारंटीन सेंटर 15 जून के बाद बंद हो जाएंगे. बाक़ी बिहार सरकार के गृह मंत्रालय से जारी नई गाइडलाइंस का यथावत पालन किया जाएगा."

मज़दूरों का रजिस्ट्रेशन भी बंद

राज्य सरकार ने मज़दूरों का रजिस्ट्रेशन भी बंद कर दिया है. आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने 31 मई को राज्य के सभी ज़िलाधिकारियों को इस बाबत आदेश जारी किया है. आदेश के मुताबिक़ अनलॉक-1 के बाद श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आए यात्रियों के अलावा किसी अन्य साधन से आ रहे लोगों का ब्लॉक स्तर पर रजिस्ट्रेशन 1 जून के बाद नहीं होगा.

31 मई तक बिहार में 12,251 ब्लॉक क्वारंटीन सेंटर थे जिसमें 13,31,266 लोग रहे और उनमें से 7,94,474 अपना क्वारंटीन पूरा करके घर वापस जा चुके हैं. ग़ौरतलब है कि सरकार ने दूसरे राज्यों से लौट रहे प्रवासी मज़दूरों के लिए 'क' और 'ख' श्रेणी बनाई थी.

सरकार पहले प्रवासी मज़दूरों के लिए तीन स्तर पर क्वारंटीन सेंटर चला रही थी प्रखंड, पंचायत और ग्राम स्तरीय. लेकिन बाद में सरकार ने 11 शहरों (श्रेणी 'क') से आए प्रवासी मज़दूरों को प्रखंड स्तरीय क्वारंटीन में और बाक़ी अन्य शहरों (श्रेणी 'ख') से आए मज़दूरों को होम क्वारंटीन करने का फ़ैसला 22 मई को लिया.

'क' श्रेणी में दिल्ली, मुंबई, पुणे, सूरत, ग़ाज़ियाबाद, फ़रीदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा, बेंगलुरू, अहमदाबाद और कोलकाता को रखा गया था.

इस दौरान कुल 1433 श्रमिक ट्रेन (दूसरे राज्य से और राज्य के अंदर, दोनों) चली जिसमें 19 लाख से ज़्यादा लोगों ने सफर किया है.

ज़िला स्तर पर क्वारंटीन सेंटर चलते रहेंगे

ऐसे में ये सवाल अहम है कि सरकार के इस फ़ैसले को कैसे देखा जाए?

राज्य सरकार ने ये फ़ैसला ऐसे वक़्त में लिया है जब राज्य में कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ों की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक़, बिहार में 1 जून तक कुल 3692 मरीज़ कोरोना के मिले थे जिसमें 3 मई के बाद आने वाले प्रवासियों की संख्या 2569 है.

महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात से आए प्रवासी मज़दूरों में सबसे ज़्यादा कोरोना पॉज़िटिव मामले मिले हैं.

जन स्वास्थ्य अभियान से जुड़े डॉ शकील कहते हैं, "क्वारंटीन सेंटर का मक़सद था कि बाहर से आए लोग सीधे कम्युनिटी में न जाकर क्वारंटीन में रहे. लेकिन अगर बाहर से लोग नहीं आ रहे हैं तब तो क्वारंटीन सेंटर बंद करने का फ़ैसला ठीक है. लेकिन ज़िला स्तर पर एक क्वारंटीन सेंटर सरकार को अभी चलाना होगा. क्योंकि लोग कम संख्या में ही सही लेकिन आते रहेंगे और इस बीमारी का संक्रमण तो अभी जारी रहेगा."

बिहार में हो रही वर्चुअल रैली

वहीं वरिष्ठ पत्रकार पुष्यमित्र कहते हैं, "क्वारंटीन सेंटर की व्यवस्था तो ठीक से हो ही नहीं पाई. लेकिन कुछ मामलों को छोड़ दें तो क्वारंटीन सेंटर ने बहुत हद तक सामुदायिक संक्रमण को रोका था. चूंकि क्वारंटीन सेंटर की बदहाली की ख़बरें आ रही थी और बिहार में सरकार चुनावी मोड में जा रही है, इसलिए सरकार ने अपनी ये ज़िम्मेदारी अपने सर से उतारकर पब्लिक के कंधों पर डाल दी है."

राज्य मे औसतन 3,000 जाँच रोज़ाना हो रही है जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ख़ुद कई मौक़ों पर कह चुके हैं कि रोज़ाना दस हज़ार टेस्ट करने की ज़रूरत है.

पुष्यमित्र कहते हैं, "बिहार को तो टेस्ट चाहिए लेकिन यहां वर्चुअल रैली हो रही है." बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बिहार बीजेपी 9 जून को वर्चुअल रैली कर रही है.

क़र्ज़ लेकर खाते लोग, सरकार के दावे हवा हवाई

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि बाहर से आए संक्रमित लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चिकित्सीय सुविधाओं के साथ साथ आइसोलेशन वार्ड और बेड्स की संख्या बढ़ाई जाए. साथ ही मनरेगा के जरिए लोगों को ग्रामीण स्तर पर काम उपलब्ध कराने, श्रम प्रधान या लेबर इन्टेन्सिव स्कीम पर ज़ोर देने का भी निर्देश बार-बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जारी कर रहे हैं. लेकिन ज़मीन पर ये सभी दावे हवा हवाई ही साबित हो रहे हैं.

पुष्कर में दर्ज़ी का काम कर रहे शाहान आलम अपने घर सुपौल लौट आए हैं.

वो कहते हैं, "वापस लौटकर क़र्ज़ लेकर खा रहे हैं. काम धंधा तो कुछ नहीं है. कब तक ऐसे चलेगा, कहना मुश्किल है."

वहीं मोहम्मद हज़रत कहते हैं, "मनरेगा का कोई काम नहीं मिला है. अनाज भी नहीं मिला है. आधार कार्ड का फ़ोटो कॉपी लेकर गया था लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला है. कार्ड बनाने को कह रहे हैं लेकिन सरकार के लोग कहते हैं बाद में बनेंगे सारे कार्ड."

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