असम गैस रिसावः 'पूरे इलाके में तेल की बारिश, अब घर लौटना मुश्किल'

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- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, असम के जोरहाट से, बीबीसी हिंदी के लिए
"सुबह के क़रीब साढ़े दस बज रहे थे. बुधवार का दिन था. मैं घर पर ही काम कर रही थी. तभी अचानक बम धमाके जैसी आवाज़ सुनी. मैं काफी डर गई थी. वैसे भी मैं लो-बीपी (निम्न रक्तचाप) की मरीज़ हूं. मैंने बाहर निकल कर देखा ऑयल फील्ड से काला धुआं निकल रहा था. तभी कई लोग घर से बाहर निकल कर चिल्लाने लगे. गांव में अफरा-तफरी मच गई. हम सब लोग ऑयल फील्ड से दूर भागे. एक पल के लिए लगा कि सब मारे जाएंगे. पूरे इलाके में तेल की बारिश जैसी हो रही थी."
36 साल की लाबोइनया सैकिया अपने घर के पास मौजूद ऑयल फील्ड से हुई गैस रिसाव की घटना को याद कर आज भी डर जाती है.
असम के तिनसुकिया ज़िले के बाघजान गांव में मौजूद ऑयल इंडिया लिमिटेड के एक तेल के कुएं से हो रहे गैस रिसाव को पांच दिन हो गए है लेकिन इसे अबतक नियंत्रित नहीं किया जा सका है. लाबोइनया सैकिया का घर बाघजान में ऑयलफील्ड के बिलकुल पास है और गैस रिसाव की इस घटना के बाद प्रशासन ने दो किलोमीटर के दायर में बसे पूरे गांव को खाली करवा लिया है.
तिनसुकिया ज़िला प्रशासन की एक जानकारी के अनुसार गैस रिसवा वाले दिन से बाघजान गांव के क़रीब दो हज़ार लोगों को स्कूल में बने शिविरों में रखा जा रहा है. ज़िला प्रशासन ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से गांव वालों के लिए खाने-पीने की सारी व्यवस्था करने में जुटा है.

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इस समय बाघजान एमई स्कूल में स्थापित किए गए शिविर में रह रहीं लाबोइनया ने बीबीसी से कहा, "प्रशासन और ऑयल के लोग हमारा ध्यान रखने का भरोसा दे रहे हैं लेकिन इलाके में जिस कदर गैस लीक हो रही है उसे मुझे नहीं लगता कि हम अपने घर लौट पाएंगे. ऑयल के अधिकारी तो एयर कंडीशन में रहते है और यहां से तेल निकाल कर करोड़ों इनकम करते हैं लेकिन हम ग़रीब लोग है. बहुत मेहनत करके अपने परिवार का पेट पाल रहे थे. हमारा तो सब कुछ बर्बाद हो गया. हमारे इलाके में पांच दिन से तेल की बारिश जैसी हो रही है, ऐसी स्थिति में हम घर कैसे लौट पाएंगे."
घर के पास ही पान की छोटी सी दुकान चलाकर अपना गुज़ारा करने वाली लाबोइनया ने कई साल पहले अपने पति को खो दिया था.
वह कहती हैं, "घर से कुछ भी नहीं ला पाए. अपनी जान बचाकर यहां आए हैं. हमारे पास पैसे भी नहीं हैं. लॉकडाउन ने वैसे ही हमारी कमर तोड़ दी है. इसलिए जबतक वापस घर जाने की व्यवस्था नहीं की जाती, ऑयल इंडिया कंपनी को हमारे खाने-पीने और रहने की ज़िम्मेदारी उठानी होगी. हमारे बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी देना होगा. मेरा एक बेटा और दो बेटियां स्कूल में पढ़ रही हैं. क्योंकि गैस लीक से हमारे इलाके को जो नुकसान हुआ है उसे सामान्य स्थिति में लाने के लिए काफी समय लगेगा."
लाबोइनया कहती हैं, "सरकार कहती है कि कोरोना वायरस से बचना है तो दूर-दूर रहो. लेकिन यहां शिविर में हम साथ रह रहे हैं. यहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कैसे होगा? प्रशासन से लेकर मीडिया और कई संगठनों के लोग रोज़ाना आ रहे हैं, अगर हम में से किसी को कोरोना ने पकड़ लिया तो सबकी जान मुश्किल में आ जाएगी."
क्या है पूरा मामला?

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दरअसल ऑयल इंडिया लिमिटेड के तेल के कुएं से हो रही गैस रिसाव की घटना बीते बुधवार सुबह की है लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी इस रिसाव को नियंत्रण करने में जुटी संकट प्रबंधन टीम और बाहर से आए विशेषज्ञ अबतक सफल नहीं हो पाए हैं.
ऑयल इंडिया लिमिटेड के प्रवक्ता त्रिदीप हज़ारिका ने बीबीसी से कहा, "हमारी टीम और बाहर से आए विशेषज्ञ गैस रिसाव को नियंत्रण करने से जुड़े काम में लगे हुए हैं और आने वाले बुधवार को हम एक अंतिम प्रयास करेंगे. यह एक तरह से पहला प्रयास होगा. हमारी ऑयल इंडिया की टीम के अलावा ओएनजीसी से आठ विशेषज्ञ आए हैं जो बीते तीन-चार दिनों से इस काम में लगे हैं. हमें लग रहा है कि इस काम में जल्द ही सफलता मिलेगी. अगर ख़ुदा न खास्ता हमें ज़रूरत पड़ी तो तीन अमरीकी विशेषज्ञों से भी संपर्क किया जा रहा है. इस काम में सरकार पूरी मदद कर रही है."
जवाबदेही किसकी?
आखिर किन कारणों से इतने बड़े स्तर पर ऑयलफील्ड में गैस रिसाव हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है? इस सवाल का जवाब देते हुए त्रिदीप हज़ारिका ने कहा, "इस पूरी घटना की जांच करवाने के लिए जांच कमेटी बनाई गई है लेकिन इस समय दिक्कत यह है कि जहां गैस रिसाव हो रहा है वहां जांच दल के लोग नहीं जा सकते. फिलहाल गैस रिसाव वाली जगह तक पहुंचना आसान नहीं है. इस गैस रिसाव को लेकर हमारे हाथ जो तथ्य लगे हैं उनकी जांच की जा रही है. इस बीच जो प्राइवेट पार्टी जॉन एनर्जी लिमिटेड हमारे लिए इस ऑयलफील्ड में काम कर रही थी उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया है."
वे कहते हैं, "अगले एक-दो दिन में उनका भी जवाब हम लोगों को मिल जाएगा. वहां हमारे ऑयल इंडिया के भी लोग थे तो सभी लोगों की ज़िम्मेदारी की जांच की जाएगी."

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'लोगों को गैस से ख़तरा नहीं'
ऑयल इंडिया लिमिटेड पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. गांव के लोगों को हुई क्षति की भरपाई कैसे होगी? जिस इलाके में गैस रिसाव की यह घटना हुई है उसके बिल्कुल पास मौजूद डिब्रू सैखोवा नेशनल पार्क समेत संवेदनशील वेटलैंड है जहां लुप्तप्राय प्रजातियों के पक्षी आते हैं.
बाघजान गांव के पास से गुजरने वाली डिब्रू नदी के पानी पर भी गैस रिसाव के कारण काफी असर पड़ा है. सोशल मीडिया पर जो वीडियो शेयर किए जा रहे हैं उसमें देखा जा रहा है कि गैस रिसाव के प्रभाव से नदियों में मछलियां मर गई हैं. साथ ही लुप्तप्राय एक डॉल्फिन भी पानी में मरी पड़ी है.
ऑयल इंडिया लिमिटेड के प्रवक्ता कहते हैं, "पर्यावरण को हुए नुकसान से जुड़ी तमाम बातों को हमारे अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के समक्ष रखा गया है. वे अभी यहां आए हुए हैं. फिलहाल हमारी कंपनी की तरफ़ से गांव वालों की भी पूरी मदद कर रहे हैं. लोगों को शिविरों में अच्छी व्यवस्था के तहत रखा गया है. इसके अलावा एनडीआरएफ को बुलाया गया है वे लोगों की देखभाल करेंगे."
ऑयल के प्रवक्ता कहते हैं, "जहां तक किसी के बीमार पड़ने की बात है तो यह प्राकृतिक गैस है इसमें कोई रसायन नहीं होता जिससे सीधे कोई नुकसान हो. लेकिन पर्यावरण पर इसका ज़रूर प्रभाव पड़ सकता है. इसके लिए ज़िला प्रशासन से लेकर वन और पर्यावरण विभाग के लोग यह जांचने में लगे हैं कि इससे अबतक पर्यावरण पर कितना असर पड़ा है. इसकी जांच के बाद जो नुकसान भरपाई करनी होगी वो ऑयल इंडिया लिमिटेड की तरफ से किया जाएगा. हमने सरकार से सभी विभागों को जांच कर एक निष्पक्ष रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है ताकि जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जा सके."
'तेल भी चाहिए, पर्यावरण भी'
इस बीच स्थिति का जायजा लेने के बाद असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ऑयल इंडिया लिमिटेड के सीएमडी से स्थिति पर चर्चा की है. हालांकि गैस रिसाव से पर्यावरण को हो रही क्षति को लेकर राज्य सरकार की भूमिका पर कई लोग सवाल खड़े कर रहे हैं.

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असम के वन एवं पर्यावरण मंत्री परिमल शुक्लवैद मानते है कि गैस रिसाव की इस घटना से पर्यावरण पर काफी असर पड़ा है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैंने अपने अधिकारियों के साथ इस घटना पर बात की है. इसके अलावा प्रदूषण बोर्ड के चेयरमैन को घटना वाली जगह जाकर पर्यावरण को हुए नुकसान का अध्ययन करने को कहा है. सभी पहलुओं को समझकर ही आगे का रास्ता निकालना होगा. क्योंकि ऑयल इंडिया का जो यहां प्रदर्शन है उसे भी हम बंद नहीं कर सकते और न ही पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं. हमें तेल भी चाहिए और पर्यावरण भी. इसलिए हमने अपने अधिकारियों से अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है. इस समय सबसे ज़रूरी काम गैस रिसाव को बंद करना है."
गैस रिसाव से हुए नुकसान पर स्थानीय युवक तिखनोज्याति हज़ारिका कहते हैं, "इस घटना के बाद हमारा इलाका अब रहने लायक नहीं बचा. गैस रिसाव की इस घटना से न केवल आसपास के पर्यावरण को क्षति पहुंची है बल्कि हमारे गांव के लोग बेघर हो गए हैं. बाघजान गांव में छह सौ से अधिक परिवार बसे हैं और गैस लीक होने के बाद उन सबको अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा. यहां ज़्यादातर लोग किसान हैं और कई लोग पास की नदियों में मछलियां पकड़ कर अपना गुजारा करते हैं. लेकिन गैस रिसाव के कारण यहां से गुज़रने वाली डिब्रू नदी, लोहित नदी का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो गया है."
"कई लोगों के मवेशी मर गए हैं. पेड़ पौधे बर्बाद हो गए हैं. ऑयल फील्ड वाली जगह से दो किलोमीटर दूर तक गैस की दुर्गंध इतनी ज़्यादा है कि वहां आप जा नहीं सकते. गैस लीकेज को तो देर सबेर बंद कर दिया जाएगा लेकिन हम लोगों को सामान्य वातावरण में फिर से बसाने में फिलहाल कितना समय लगेगा, कोई नहीं जानता."
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