कोरोना वायरस और बाढ़ से एक साथ लड़ना असम के लिए कितना मुश्किल
इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma/BBC
इमेज कैप्शन, वर्नाली डेका, डिप्टी कमिश्नर....में
Author, दिलीप कुमार शर्मा
पदनाम, असम के जोरहाट से, बीबीसी हिंदी के लिए
संक्रमण की हालत जानने के लिए ज़िले का नाम अंग्रेज़ी में लिखें
असम में तेज़ी से सामने आ रहे कोविड-19 के मामलों ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं. दरअसल बीते केवल सात दिनों में राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमण के 646 नए मामले सामने आए हैं.
इस तरह गुरुवार शाम क़रीब 7 बजे तक असम में कोविड-19 मरीजों की कुल संख्या 856 हो गई है. जबकि बीती 21 मई रात 10 बजे तक प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या केवल 210 थी. वहीं, असम तथा इसके पड़ोसी राज्य मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही तेज बारिश से कई इलाकों में बाढ़ आ गई हैं.
असम राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से 28 मई शाम साढ़े पांच बजे जारी की गई एक जानकारी के अनुसार प्रदेश के 9 जिलों में 300 गांव बाढ़ के पानी में डूब गए है.
जबकि करीब 2 लाख 94 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए है. इन बाढ़ प्रभावित जिलों में कुल 91 राहत शिविर खोले गए है जिनमें बेघर हुए करीब 16 हजार लोगों ने शरण ले रखी है. अबतक बाढ़ के पानी में बह जाने से दो लोगों की मौत हो गई है.
ऐसे में राज्य प्रशासन के अधिकारियों के सामने कोरोना वायरस से उत्पन्न स्थिति से निपटने के साथ ही प्रदेश में पहले चरण की आई बाढ़ ने दोहरा संकट खड़ा कर दिया है.
दोहरा संकट
प्रशासनिक अधिकारी फिलहाल बाढ़ की चपेट में आए लोगों को सुरक्षित स्थान पहुंचाने और उनके लिए खाने-पीने की व्यवस्था करने में लगे है.
लेकिन कोविड-19 की स्थिति से निपटने के लिए मौजूद दिशानिर्देश और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे तमाम नियमों के बीच बाढ़ में फंसे लोगों को कैसे और कहां रखा जाएगा तथा उनके लिए इतनी तादाद में शिविरों की व्यवस्था कैसे होगी. ऐसे कई सवाल प्रशासन को समस्या में डाल रहें है.
इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma/BBC
कोरोना वायरस और बाढ़ जैसी दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहे असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्णा ने बीबीसी से कहा, "हमने स्थिति से निपटने के लिए कुछ दिन पहले जिला प्रशासन को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर अर्थात एसओपी जारी की हुई है. उसमें जिला प्रशासन अधिकारी से साफ कहा गया है कि बाढ़ग्रस्त इलाकों में काम करते वक्त सोशल डिसटेंशिग का पूरा ध्यान रखना है. राहत शिविरों में लोगों को सोशल डिसटेंसिंग का पालन करवाना है. बाढ़ग्रस्त इलाकों में पहले से ही ऐसी जगह तलाश करके रखने का निर्देश दिया गया है जहां जरूरत पड़ने पर क्वारंटीन सेंटर बनाया जा सके. इसके साथ ही मेडिकल सुविधाओं से जुड़ी तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा हैं."
असम में बीते सालों में आई बाढ़ के मुक़ाबले इस बार खासकर कोविड-19 संक्रमण के दौरान आई बाढ़ सरकार के लिए कितनी बड़ी चुनौती है?
इस सवाल का जवाब देते हुए मुख्य सचिव कृष्णा कहते है, "आम तौर पर आने वाली बाढ़ के मुकाबले इस बार हमारे लिए चैलेंज बड़ा है. बाढ़ के समय इतनी बढ़ी संख्या में प्रभावित लोगों को बचाना और उनको सुरक्षित स्थान पहुंचाना आसान काम नहीं है. कोविड-19 गाइडलाइन के तहत लोगों को राहत शिविरों में रखना होगा लिहाज़ा इस बार काफी बड़ी चुनौती है. जिला प्रशासन से कहा गया है कि बचाव कार्य के दौरान लोगों को मास्क पहना कर लाया जाए तथा जो भी कोविड-19 के लिए एडवाइजरी है उसका पूरा पालन किया जाए."
असम में प्रत्येक साल बाढ़ के कारण बड़ी तादाद में जानोमाल का नुकसान होता है. इस बार पहले चरण की बाढ़ में ग्वालपाड़ा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. ग्वालपाड़ा जिले में 161 गांव बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए है. जबकि 2 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए है.
इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma/BBC
इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma/BBC
ग्वालपाड़ा की जिला उपायुक्त वर्नाली डेका ने बीबीसी से कहा,"जिले में बाढ़ के कारण 56 राहत शिविर खोले गए है जिनमें सोशल डिसटेंसिंग का ध्यान रखते हुए करीब 18 हजार लोगों को रखा गया है. हमने कोविड-19 बीमारी को ध्यान में रखते हुए बाढ़ पीड़ित लोगों के बचाव कार्य के लिए एक अलग नेटवर्क बनाया है. इसके अलावा प्रत्येक रिलीफ कैंप में एक डेसिग्नेटेड कैंप इंचार्ज नियुक्त किया है ताकि वह हमें कैंप में रहने वाले लोगों की क्षमता तथा सोशल डिसटेंसिंग के बारे में लगातार जानकारी देते रहें."
"राहत शिविरों में आए ज्यादातर पुरुष अपने सामान-संपत्ति का ध्यान रखने के लिए घर पर बांस का ऊंचा चांग बनाकर ही रहते है. केवल महिलाएं और बच्चे शिविरों में रह रहें है.इसके लिए हमारी एक अधिकारी भी स्कूलों में बने राहत शिविरों के एक नेटवर्क पर ध्यान रख रही है. अगर किसी राहत शिविर में क्षमता से अधिक लोग आ जाते है तो हम उन्हें दूसरे कैंपो में पहुंचाते है ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता रहे."
इमेज स्रोत, EPA/STR
ग्वालपाड़ा जिला प्रशासन के सामने केवल बाढ़ पीड़ितों को ही राहत शिविरों में पहुंचाने की जिम्मेवारी नहीं है बल्कि सामने आ रहें कोविड-19 के मामलों के बाद उन इलाकों के लोगों को भी क्वारंटीन सेंटर पहुंचाना पड़ रहा है. जिला प्रशासन के अनुसार ग्वालपाड़ा जिले में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमण के कुल 17 मामले सामने आ चुके है. जबकि 32 क्वारंटीन सेंटरों में 1154 लोगों की देखभाल की जा रही है.
पहाड़ जैसी चुनौतियां
जिला उपायुक्त डेका कहती है, "बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से तो निपटना होगा ही लेकिन इस बार पूरा बचाव कार्य सोशल डिसटेंसिंग के तहत करना पड़ रहा है. इसके लिए हमारी एक अलग टीम क्वारंटीन सेंटर के नेटवर्क पर काम कर रही है. जिन लोगों को क्वारंटीन के लिए लाया जा रहा है उसकी पूरी व्यवस्था अलग रखी गई है. इस बार की बाढ़ में हमारा काम करने के तरीक बिलकुल अलग है ताकि कोविड-19 की गाइडलाइन का पूरा पालन कर सके. यह निश्चित तौर पर चुनौतियों से भरा काम है."
कोविड-19 और बाढ़ को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे तमाम इंतजामों के बीच कामरूप ग्रामीण जिले के गोरोइमारी राजस्व सर्कल के अंतर्गत आने वाले सरलपाड़ा चर इलाके के लोग बेहद परेशान है. ब्रह्मपुत्र के बीच रेतीले हिस्से में जिसे यहां चर इलाका कहते है, सालों से लोग बसे हुए है. करीब 15 हजार आबादी वाले सरलपाड़ा चर इलाके में बीते सात दिनों से बाढ़ ने तबाही मचा रखी है लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की तरफ से अबतक उनकी मदद के लिए कोई नहीं आया.
सरलपाड़ा में रहने वाले 35 साल के सलाम अली ने बीबीसी से कहा,"पिछले सात दिनों से हमारे घर बाढ़ के पानी में डूबे हुए है लेकिन सरकार की तरफ से अबतक कोई मदद नहीं मिली है. कोविड-19 बीमारी के कारण हमारी आर्थिक हालत पहले से ही खराब चल रही है और बाढ़ के समय अगर सरकार की तरफ से राहत सामग्री के तौर पर खाने-पीने का समान नहीं मिलेगा तो हमें भूखा रहना होगा. मैंने परिवार के लोगों के लिए बाजार से मास्क खरीदें थे. सरकार से मिल जाते तो मुझे पैसे खर्च करने नहीं पड़ते."
प्रत्येक साल चार इलाकों में ब्रह्मपुत्र से बाढ़ आती है, तो क्या सरकार के लोग आपको अलर्ट नहीं करते? सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए नहीं कहते? आप बाढ़ के समय इतने जोखिम वाले इलाके में क्यों रहते है?
इन सवालों का जवाब देते हुए सलाम कहते है, "हम गरीब लोग है. खेती करके और मछलियां पकड़कर जैसे-तैसे अपना गुजारा करते है. हमारे पिता जी के जमाने से हम लोग यहीं पर बसे है. हमें सरकार की तरफ से कोई अलर्ट करने नहीं आता. फिर हमारे पास खुद की जमींन भी नहीं है. यहां से दूसरी जगह कहां जाएंगे. इसलिए हर साल बाढ़ का जोखिम उठाते है. बाढ़ का पानी जब ज्यादा हो जाता है तो पूरा परिवार नाव में बैठकर उंची जगह का तरफ चले जाते है."
"अभी तो बाढ़ शुरू हुई है.जैसे बारिश और बढ़ेगी, हमारा पूरा चर इलाका बाढ़ में डूब जाएगा. हर साल हमें मकान दोबारा बनवाना पड़ता है. जो थोड़े बहुत पैसे खेती करके जमा करते है वो मकान बनाने में चला जाता है."
अब तक मिली सरकारी मदद के बारे में सलाम कहते है,"सरकार ने हमें तीन साल पहले एक सोलर सेट, कुछ लाइटे और एक पंखा दिया था. मोदी सरकार आने के बाद पहली बार मुझे जब सोलर सेट मिला था तो ऐसी उम्मीद जगी थी कि यह सरकार बाढ़ से हम लोगों को बचाने के लिए आगे और ज्यादा मदद करेगी. जब बहुत ज्यादा बाढ़ आती है तो सरकारी अधिकारी राहत सामग्री बांटने चर इलाके में आते है लेकिन हजार-1500 लोगों को ही यह मदद मिलती है. बाकि के सैकड़ों लोग ऐसे ही रह जाते है."
भारत में कोरोनावायरस के मामले
यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.