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आयुष्मान भारत स्कीम पर पीएम मोदी के दावे का पूरा सच
- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
आयुष्मान भारत के अब एक करोड़ लाभार्थी हो गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह बड़े ज़ोर-शोर से इसे अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया.
उसके बाद से ही बधाइयों का तांता लग गया.
क्या अमिताभ बच्चन, क्या अजय देवगन और क्या सरकार के मंत्री. सबने लपक कर इस ख़बर को री-ट्वीट और शेयर किया.
आयुष्मान भारत देश की ही नहीं विश्व की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है- ऐसा केंद्र सरकार का हमेशा से दावा रहा है.
2018 में सितंबर में इस योजना को रांची से लॉन्च किया गया था. लेकिन उससे पहले अगस्त में ही ट्रायल के दौरान हरियाणा के करनाल में इस योजना के तहत पैदा हुई बच्ची 'करिश्मा' को इसकी पहली लाभार्थी माना जाता है.
इस योजना के तहत ग़रीब परिवार वालों के हर सदस्य का आयुष्मान कार्ड बनता है, जिसमें अस्पताल में भर्ती होने पर 5 लाख तक का इलाज मुफ़्त होता है.
आयुष्मान भारत के 1 करोड़ लाभार्थी नहीं
लेकिन जो लोग आयुष्मान भारत के लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ कह रहे थे, दरअसल वो एक करोड़ इलाज की संख्या है.
दोनों में एक बड़ा अतंर है.
ये अंतर बीबीसी को आयुष्मान भारत के सीईओ इंदु भूषण ने ही समझाया. उनके मुताबिक़, 1 करोड़ बार इस योजना का लाभ लोगों ने उठाया हैं ना कि एक करोड़ लोगों ने. उनके मुताबिक़ लोगों की संख्या कम है. 1 करोड़ संख्या इस स्कीम के तहत जितनी बार इलाज हुआ है उसकी है."
जिन राज्यों में इस योजना के तहत लोगों के सबसे ज़्यादा ट्रीटमेंट हुए हैं, वो राज्य हैं आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और झारखंड.
आयुष्मान योजना पर अब तक सरकार ने 13 हज़ार करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं. आँकड़ों के अनुसार, इसमें से 7 हज़ार करोड़ गंभीर बीमारियों पर लगा है.
कैंसर, हृदय रोग, हड्डी की और पथरी की बीमारियों का ज्यादातर लोग ने इस योजना में इलाज कराया है.
आयुष्मान में कोरोना का इलाज
लेकिन देश में इस वक़्त कोरोना महामारी पर बात चल रही है, तो क्या आयुष्मान योजना में उसका इलाज नहीं हो रहा?
ऐसा नहीं हैं. आयुष्मान योजना में कोरोना का इलाज भी कवर होता है.
इसके तहत तक़रीबन 2100 लोगों का कोरोना का ही इलाज हुआ है. कोविड19 का टेस्ट तकरीबन 3000 लोगों के हुए हैं.
देश में कोरोना के कुल मरीज़ों की संख्या 1 लाख 12 हज़ार पार है.
ऐसे में 2100 लोगों के आँकड़े से क्या हम खुश हो सकते हैं.
इस सवाल के जवाब में इंदु भूषण कहते हैं, "1 लाख 12 हज़ार की कुल संख्या में केवल 6 प्रतिशत ही ऐसे मरीज़ होते हैं जिनको आईसीयू की ज़रूरत पड़ती है. आप मान सकते हैं 10 से 20 प्रतिशत लोगों को ही अस्पताल में इलाज की ज़रूरत होती है. 20 हज़ार लोगों में हमने 2100 लोगों का इस स्कीम के तहत इलाज किया तो ये कम नहीं है. इस वक़्त कोविड19 का इलाज ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में चल रहा है. हम जो आँकड़े आपको दे रहे हैं वो ज़्यादातर प्राइवेट अस्पतालों के हैं"
आयुष्मान भारत स्कीम के तहत जिन राज्यों में कोविड19 के मरीज़ों का ज़्यादा इलाज हुआ है, उसमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु आगे हैं.
आयुष्मान को कुछ राज्यों ने नहीं स्वीकारा
लेकिन देश में अब भी चार राज्य ऐसे हैं, जहां आयुष्मान योजना लागू ही नहीं हुई है.
ये राज्य हैं दिल्ली, तेलंगाना, ओडीशा, पश्चिम बंगाल.
आयुष्मान भारत दिल्ली में चुनावी मुद्दा था. चुनाव के बाद दिल्ली सरकार ने स्कीम लागू करने के लिए सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है लेकिन अभी यह लागू नहीं हुआ है.
तेंलगाना, ओडीशा और पश्चिम बंगाल में इस स्कीम के लिए राह अब भी आसान नहीं.
प्रवासियों के लिए सुविधा
आयुष्मान भारत योजना में दिल्ली का शामिल होना योजना के दूसरे लाभार्थियों के लिए अच्छी ख़बर ज़रूर है.
दरअसल इस योजना में एक ख़ास बात है. अगर आयुष्मान भारत में आपका कार्ड उत्तर प्रदेश में बना है और आप मुंबई में काम करते हैं तो मुंबई में आप इसका इलाज करा सकते हैं. और पैसा राज्य सरकार के खाते से जाएगा.
इस लिहाज से प्रवासी मज़दूरों के लिए ये फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.
इतना ही नहीं अगर इलाज के लिए आप दिल्ली आते हैं, और दिल्ली सरकार भी इस योजना को लागू कर देती है, तो बहुत से लोगों की बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा.
आयुष्मान भारत योजना ने कई दूसरी योजनाओं के लाभार्थियों को ख़ुद में शामिल भी कर लिया है. कुछ लोग इसे खूबी भी मानते हैं और कुछ जानकार इसे ख़ामी के तौर पर देखते हैं.
आयुष्मान का 1करोड़वां इलाज
इस योजना के तहत 1करोड़वां इलाज कराने वाली पूजा थापा के साथ भी ऐसा ही हुआ.
पूजा थापा, मेघालय की रहने वाली हैं.
भारत सरकार का दावा है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 1करोड़वां इलाज उनका ही हुआ है.
पूजा को किडनी में स्टोन की शिकायत थी. पेट में तेज़ दर्द की वजह से वो अस्पताल में भर्ती हुईं और फिर उनका सोमवार 18 मई को ऑपरेशन हुआ. पूजा फ़िलहाल अस्पताल में ही हैं और स्वास्थ्य लाभ ले रही है.
पूजा के पति आर्मी में काम करते हैं. लेकिन उन्होंने अर्मी के अस्पताल में इलाज न कराकर, आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराया.
आयुष्मान भारत में इलाज केवल वो लोग करा सकते हैं जो 2011 के SECC यानी सोशल इकोनॉमिक कास्ट सेंसस में वंचित तबके में आते हैं.
लेकिन इस हेल्थ इंश्योरेंश स्कीम का लाभ पूजा को क्यों और कैसे मिला.
ये सवाल जब बीबीसी ने आयुष्मान भारत के सीईओ इंदु भूषण से किया.
उनके मुताबिक, "पूजा जहाँ रहती हैं, वहां आर्मी का अस्पताल नहीं है. वो पहले से राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की लाभार्थी थीं और आयुष्मान योजना आने के बाद दोनों को एक में मिला दिया गया. इसलिए पूजा को आयुष्मान भारत का लाभ मिल गया."
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ योजनाओं के साथ ये आयुष्मान योजना ओवरलैप करती हैं. और इस ख़ामी को दूर करने के लिए वो काम कर रहे हैं.
बीबीसी ने मेघायल में पूजा से भी बात की. उनके मुताबिक, " वो आज तक आर्मी अस्पताल गई ही नहीं. उनके पति फ़िलहाल मणिपुर में तैनात हैं. इसलिए जब पेट में दर्द तेज़ हुआ तो वो अपनी पड़ोसन के साथ अस्पताल गई."
पूजा के मुताबिक, "ये अस्पताल जहाँ उनका इलाज हुआ उनके घर से 30-35 किलोमीटर दूर है."
आयुष्मान भारत में ये एक दूसरी समस्या है.
इंदू भूषण इस समस्या को स्वीकार करते हैं. लेकिन उनका कहना है कि आयुष्मान भारत योजना के लॉन्च होने के बाद से पिछले डेढ़ साल में काफ़ी बदलाव आया है. अब ज़्यादा से ज़्यादा प्राइवेट अस्पताल इसमें जुड़ने लगे हैं.
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