अंफन: प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को बंगाल और ओडिशा का दौरा करेंगे

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- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
कोरोना महामारी के बीच बुधवार शाम को आए तूफ़ान अंफन से पश्चिम बंगाल और ओडिशा में हुए नक़सान का जायज़ा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को इन दोनों राज्यों का दौरा करेंगे.
प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से इसकी जानकारी दी गई.
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प्रधानमंत्री प्रभावित इलाक़ों का हवाई निरीक्षण करेंगे और फिर वो बैठक में हिस्सा लेंगे जहां राहत और बचाव के बारे में बातचीत होगी.
अंफन तूफ़ान से पश्चिम बंगाल में अब तक 72 लोगों की मौत हो गई है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तूफ़ान के कारण होना वाले जान-माल के नुक़सान को देखते हुए ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बंगाल का दौरा करने की अपील की थी.
मुख्यमंत्री ने मरने वालों के परिवार वालों को दो-दो लाख रुपये का मुआवज़ा देने की भी घोषणा की थी.
बुधवार को आए तूफ़ान के कारण सिटी ऑफ़ जॉय के नाम से मशहूर कोलकाता का चेहरा भी पूरी तरह बदल दिया है. कोलकाता में 15 लोगों की मौत हुई है.
सड़कों पर जहाँ-तहाँ गिरे हज़ारों पेड़, बिजली और केबल के टूटे तार और खंभे, हवा के ज़ोर से एक-दूसरे से टकरा कर क्षतिग्रस्त हुई गाड़ियां, क्षतिग्रस्त मकान, सड़कों पर बिखरे शीशे, ज़्यादातर इलाक़ों में गुल बिजली औऱ कोलकाता एयरपोर्ट पर बाढ़ जैसा नज़ारा....लगभग तीन घंटे तक 120 से 133 किमी की रफ़्तार से चली तेज़ हवाओं औऱ बारिश की वजह से जो भारी नुक़सान हुआ है, उसका शब्दों में वर्णन करना बेहद मुश्किल है.
इस तूफ़ान के दौरान कोलकाता में फँसा भुक्तभोगी ही अंफन की भयावहता समझ सकता है. लेकिन इस भयावहता को बताने के लिए तूफ़ान की रिपोर्टिंग के लिए अब तक इस्तेमाल होने वाले तमाम शब्द हल्के महसूस हो रहे हैं.
इससे पहले राज्य में आए आइला, फनी और बुलबुल तो अंफन के सामने कुछ भी नहीं थे. महानगर के उत्तरी इलाक़े में तो तूफ़ान की रफ़्तार ने 24 साल पहले आई हॉलीवुड की फ़िल्म ट्विस्टर का दृश्य साकार कर दिया था.
भयावह नज़ारा

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हवाओं की ताक़त से उड़ते कच्चे मकान की छत, साइकिलें और दूसरी छोटी-मोटी चीज़ें भयावह नज़ारा पैदा कर रही थीं.
78 साल के कुशल सरकार कहते हैं, "मैंने अपने जीवन में कभी ऐसा भयावह तूफ़ान नहीं देखा था. लगता था कि आज जीवित बचना मुश्किल है. मेरी आंखों के सामने कई पेड़ गिरे. हवाओं का गर्जन दिल में कंपकपी पैदा कर रहा था."

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तूफ़ान गुज़रने के 12 घंटे बीतने के बाद भी उनके चेहरे पर आतंक की लकीरें साफ़ नज़र आती हैं.
मौसम विभाग के निदेशक जीसी दास बताते हैं, "बुधवार रात आठ से दस बजे के बीच दो घंटे में 222 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है."
कल्पना से परे

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कोलकाता नगर निगम के प्रशासक और शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम कहते हैं, "अंफन भयानक होगा इसका अंदाज़ा तो था. लेकिन यह इतना भयानक होगा, इसकी कल्पना नहीं की गई थी. पूरा महानगर कचरे के ढेर में तब्दील हो गया है."
राज्य सचिवालय नवान्न की बहुमंज़िली इमारत में भी कई खिड़कियों और दरवाज़ों के शीशे टूट गए हैं. इनसे दो कर्मचारियों को चोटें आई हैं.

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार पूरी रात राज्य सचिवालय में बने कंट्रोल रूम में गुज़ारी है. वे बताती हैं, "प्राथमिक सूचनाओं के मुताबिक़ तूफ़ान की वजह से कम से कम 12 लोग मारे जा चुके हैं. संचार व्यवस्था ठप होने की वजह से कई इलाक़ों से अब तक सूचनाएं नहीं मिल सकी हैं. संपत्ति और खेतों में लगी फसलों को जो नुक़सान हुआ है उसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती. नुक़सान का पूरा आकलन करने में अभी तीन से चार दिन लगेंगे."
ममता बताती हैं कि उत्तर और दक्षिण 24-परगना ज़िले पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं. छह हज़ार से ज़्यादा कच्चे मकान ढह गए हैं और कई बांध और जेटियां टूट गई हैं.
व्यापक नुक़सान
मुख्यमंत्री बताती हैं, "अब तक मैंने अपने जीवन में तूफ़ान से किसी महानगर को इतने बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुँचते नहीं देखा है. तीन लाख से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानो पर पहुंचाने की वजह से जान का नुक़सान तो कम हुआ है लेकिन संपत्ति का नुक़सान कल्पना से परे है."
ममता की बात काफ़ी हद तक सही है. गुरुवार सुबह महानगर का नज़ारा तूफ़ान की विनाशलीला बताने के लिए काफ़ी है. पेड़ों और बिजली के खंभों के उखड़ने की वजह से ज़्यादातर सड़कों की हालत ऐसी है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है.

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सड़कों पर पेड़, खंभे, उनके नीचे दबी गाड़ियां और तमाम खिड़कियों के बिखरे शीशे बीती रात के तूफ़ान की विनाशलीला की कहानी कह रहे हैं.
मौसम विभाग के क्षेत्रीय निदेशक जीसी दास बताते हैं, "अंफन की गति आख़िर में बढ़ जाने की वजह से वह समय से पहले ही बांग्लादेश की ओर मुड़ गया. अगर ऐसा नहीं होता तो बंगाल में इसकी विनाशलीला की कल्पना करना भी मुश्किल था."
तूफ़ान के असर से लगभग 12 सौ मोबाइल टावर बेकार हो गए हैं. नतीजतन मोबाइल नेटवर्क भी ठप हो गया है. जो टावर काम कर रहे हैं उनके ज़रिए भी कहीं बात करना मुश्किल है. इंटरनेट औऱ केबल सेवाएं तो कल रात से ही ठप हैं.
'कोरोना से बड़ा संकट'

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ममता कहती हैं, "इस प्राकृतिक आपदा के मुक़ाबले कोरोना का संकट कुछ भी नहीं है. तूफ़ान की वजह से दक्षिण बंगाल में बिजली व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है. कई इलाक़े कल रात से ही अंधेरे में डूबे हैं."
बिजली मंत्री शोभन चटर्जी बताते हैं, "गुरुवार सुबह से तारों पर गिरे पेड़ों को हटाने का काम शुरू हुआ है. लेकिन इतने बड़े नुक़सान को देखते हुए सप्लाई बहाल करने में समय लगेगा."
सरकार ने तूफ़ान से बचाव के लिए तमाम ऐहतियाती उपाय किए थे. एक सरकारी अधिकारी बताते हैं, "तूफ़ान की रफ़्तार इतनी तेज़ थी कि सारी व्यवस्था धरी की धरी रह गई."
अंफन से सबसे अधिक प्रभावित दक्षिण 24-परगना ज़िले के जिलाशासक पी उलंगनाथन बताते हैं, "तूफ़ान ने पूरे ज़िले को बर्बाद कर दिया है. दूरदराज़ के इलाक़ों से अब तक नुक़सान की सूचना नहीं मिली है. पेड़ों के गिरने से संचार व्यवस्था के साथ ही सड़क संपर्क भी कट गया है. बेहद भयावह तस्वीर है. फ़िलहाल ज़्यादा सूचना नहीं मिली है."
एयरपोर्ट की दुर्दशा

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महानगर के उत्तर में स्थित नेताजी सुभाष चंद्र अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर तो तूफ़ान की रफ़्तार से 40-40 टन वज़न के विमान किसी खिलौने की तरह हिल रहे थे. वहां छोटे विमानों को तो पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था.
लेकिन 42 बड़े विमान दो से तीन फीट तक पानी में डूब गए. गुरुवार सुबह को भी एयरपोर्ट पर बाढ़ जैसा नज़ारा था. एयरपोर्ट पर तैनात एक सुरक्षा कर्मी ने बताया, "रात को लग रहा था कि कहीं एयरपोर्ट की छत ही न उड़ जाए. विमानों को खिलौनों की तरह हिलते देखना काफ़ी डरावना था."
राज्य सरकार ने कहा है कि अंफन से सुदंरबन डेल्टा को भारी नुक़सान पहुंचा है. लेकिन अब तक वहां से पूरा ब्यौरा नहीं मिल सका है.
सरकार से लेकर आम लोगों तक सब मान रहे हैं कि बीते पांच दशकों में कोलकाता ने ऐसा कोई तूफ़ान नहीं देखा था जिसने इस महानगर की तस्वीर ही बदल दी है.
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