कोरोना लॉकडाउन: हवाई सेवा शुरू हुई, तो बदल जाएँगे सफ़र के नियम

    • Author, गुरप्रीत सैनी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में रेल सेवा के आंशिक रूप से शुरू होने के बाद अब घरेलू यात्री उड़ानें भी जल्द ही शुरू हो सकती हैं.

हालांकि, सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया ने गुरुवार को ट्वीट कर बताया कि वो 14 मई शाम 5 बजे से अमरीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ़्रांस, सिंगापुर और जर्मनी की फ़्लाइट्स की बुकिंग शुरू करेगी.

इससे पहले हवाई सेवा शुरू करने के लिए भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन और एयरपोर्ट से सुझाव भी मांगे हैं. कोविड-19 की वजह से घरेलू उड़ानें बीते 25 मार्च से ही बंद हैं.

नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने एक ट्वीट कर जानकारी भी दी कि ऑपरेशन फिर से शुरू करने की तैयारी चल रही है और इस बारे में फ़ैसला होते ही ऑपरेशन शुरू किया जाएगा.

एक प्राइवेट टीवी चैनल से बात करते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि अब लोगों के यात्रा करने के तरीक़ों में बदलाव आएगा और सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन करना होगा.

उन्होंने कहा कि फ़्लाइट ऑपरेशन से जुड़े एसओपी यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में भी बदलाव किए जाएंगे.

समाचार एजेंसी पीटीआई को मिली जानकारी के मुताबिक़, एसओपी तैयार करने के लिए मिले सुझावों में शामिल बिंदु हैं - यात्रियों को कोविड-19 से जुड़ी प्रश्नावली भरनी होगी, केबिन बैगेज ले जाने की इजाज़त नहीं होगी, आरोग्य सेतु ऐप चाहिए होगा और उड़ान के कम से कम दो घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना होगा.

हालाँकि, मंत्रालय के एडिशनल डायरेक्टर जनरल राजीव जैन ने कहा कि ये सुझाव हैं, जिन्हें रिकॉर्ड कर लिया गया है. फ़ाइनल एसओपी अभी जारी होना बाक़ी है.

ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट श्री प्रकाश कहते हैं कि घरेलू उड़ानें शुरू होती हैं तो ये एक राहतभरा क़दम होगा.

उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, "घरेलू उड़ानें तो शुरू होनी ही चाहिए. रेल सेवा शुरू हो चुकी है, लेकिन ट्रेन में कहीं जाने में वक्त लगता है. आप ज़्यादा देर तक सफ़र करेंगे तो एक्सपोज़र के चांस भी ज़्यादा हो जाते हैं. सावधानी बरतकर हवाई सेवा शुरू की जा सकती है."

वहीं एयर इंडिया के बोर्ड ऑफ इंडिपेंडेंट डायरेक्टर में शामिल डॉ. रविंद्र कुमार त्यागी बीबीसी हिंदी से कहते हैं कि हवाई सेवा ज़रूरी सावधानियों के साथ शुरू की जाएगी, जैसे यात्रियों की पहले जाँच होगी कि कहीं उनमें कोविड-19 के कोई लक्षण तो नहीं हैं.

उन्होंने बताया कि यात्रियों को मास्क पहनना होगा. 100 फ़ीसदी सीटें नहीं भरी जाएंगी, कुछ सीटें ख़ाली रखी जाएँगी. कई लोग उड़ानें शुरू होने का इंतज़ार कर रहे हैं. शुरू में सीमित उड़ानें चालू होंगी.

कौन लोग उड़ानशुरू होने का कर रहे हैं इंतज़ार

कुछ लोग जो लॉकडाउन की वजह से घर से दूर फँसे हैं और हवाई जहाज़ का किराया देने में सक्षम हैं, वो विमान सेवा का इस्तेमाल करना चाहेंगे.

इसके बाद लोग बिज़ेनस ट्रैवेल करना चाहेंगे. हालांकि डॉ रविंद्र कुमार त्यागी कहते हैं कि टेली कॉन्फ्रेंसिंग और वेबिनार से लोगों का काम चल रहा है, लेकिन जिन बिज़नेस कारणों से यात्रा करना बेहद ज़रूरी होगा, उसके लिए लोग करेंगे.

हालांकि उनका मानना है कि टूरिज़्म के लिए लोग फ़िलहाल कम से कम छह महीना ट्रैवेल करने से बचेंगे.

डॉ त्यागी मानते हैं कि उड़ान सेवा शुरू होते ही यात्रियों की संख्या ज़्यादा होगी. उसके बाद कम हो जाएगी. फिर वो स्थिर रहेगी और कम से कम छह महीने बाद बढ़ना शुरू होगी.

वरिष्ठ पत्रकार और एविएशन मामलों के जानकार अश्विनी फणनीस भी मानते हैं कि शुरू में लोग हवाई सफ़र कम ही करेंगे.

वे कहते हैं, "क्योंकि लोग इस संकट की घड़ी में पैसा बचाना चाहेंगे. कोई भी फ़िलहाल छुट्टियां मनाने के बारे में नहीं सोचेगा. लोग ख़र्चे कम करना चाहेंगे."

पहले से ही आर्थिक संकट झेल रहे एविएशन सेक्टर की हालत कोरोना ने और बुरी कर दी है. इस सेक्टर को संभालने के लिए सरकार के लिए ज़रूरी भी है कि वो जल्द से जल्द ऑपरेशन शुरू करे.

यात्रियों की संख्या में गिरावट

सरकार की ओर से जारी किए गए देश की तमाम घरेलू एयरलाइन के ट्रेफिक डेटा के मुताबिक़, जनवरी से मार्च 2020 के बीच घरेलू उड़ानों में क़रीब 330 लाख यात्री बैठे.

पिछले साल की इस अवधि के मुक़ाबले महीने के तौर पर ये 33.06 प्रतिशत की कमी थी. सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़, मार्च महीने में कोविड-19 की वजह से ऑपरेशन रुकने के चलते यात्रियों की संख्या अचानक तेज़ी से गिरी.

दुनियाभर में एविएशन इंडस्ट्री पर विश्लेषण और रिसर्च करने वाली संस्था कापा यानी सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन की भारत इकाई ने 25 मार्च को एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें संस्था का अनुमान है कि कोविड-19 की वजह से भारत के एविएशन सेक्टर को क़रीब साढ़े तीन बिलियन अमरीकी डॉलर का नुक़सान हो सकता है.

अप्रैल-जून तिमाही आमतौर पर भारतीय एयरलाइन के लिए सबसे अच्छी तिमाही होती है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक़, इस बार ये बहुत बुरी तिमाही रहने वाली है.

एयर इंडिया के बोर्ड ऑफ इंडिपेंडेंट डायरेक्टर में शामिल डॉ रविंद्र कुमार त्यागी कहते हैं कि भारत सरकार फ़िलहाल जो पैकेज फ़ेज़ में अनाउंस कर रही है, उसमें एयरलाइन और हवाई अड्डों के लिए कुछ राहत होनी चाहिए.

हालांकि फिलहाल ये फ़ैसला किया गया है कि ज्वाइंट वेंचर एयरपोर्ट को तीन महीने के लिए रेवेन्यू शेयरिंग नहीं करनी है.

हालांकि डॉ त्यागी का मानना है, "उड़ानें शुरू की जाएंगी तो शुरू में एयरपोर्ट के ख़र्चे बढ़ेंगे, क्योंकि ज़्यादा सुरक्षा बरतनी होगी, जाँच करनी होगी और एयरपोर्ट तो पूरी तरह ही चालू रखना होगा, आप इसे आंशिक तौर पर नहीं खोल सकते. एयरलाइन पर भी प्रेशर हैं, क्योंकि एयरपोर्ट के किराए देने हैं. इसके अलावा ज़्यादातर एयरक्राफ्ट लीज़ पर हैं. उनकी लीज़ को आगे बढ़ाया जाए, या सरकार को उनको सब्सिडी देनी होगी. इसलिए सेक्टर को बचाने के लिए सरकार का सहयोग तो चाहिए होगा. ख़ुद वो अपने आपको नहीं संभाल पाएगा."

एयरलाइन की तैयारियां

फ़िलहाल एयरलाइन भी फिर से ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयारी कर रही हैं. बीबीसी हिंदी ने इंडिगो से संपर्क किया तो जानकारी दी गई कि अपने क्रू और यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए वो हर क़दम उठाएंगे.

इंडिगो एयरलाइन ने कहा कि फ़िलहाल वो सरकार के दिशा-निर्देशों का इंतज़ार कर रहे हैं. लेकिन अपनी तैयारियों के बारे में उन्होंने बताया कि चेक-इन काउंटर और बोर्डिंग गेट पर स्टाफ़ और क्रू पीपीई यानी मास्क, ग्लव्स और शू कवर पहकर खड़े होंगे.

विमान के अंदर खाना देने की सेवा फ़िलहाल बंद कर दी जाएगी. बार-बार छुई जाने वाली जगहों जैसे - ट्रे टेबल, आर्म रेस्ट, ओवरहेड नोज़ल आदि को डब्ल्यूएचओ द्वारा अप्रूव डिसइंफेक्टेंट से वक्त-वक्त पर साफ किया जाता रहेगा.

एयरलाइन के मुताबिक़, "इसके अलावा हम एयरक्राफ्ट की लगातार डीप क्लीनिंग कर रहे हैं और इंजन के ज़रिए ताज़ा हवा आने का इंतज़ाम कर रहे हैं, जो हमारे हेपा यानी हाई एफिशिएंसी पार्टिकुलेट एयर फिल्टर से गुज़रेगी और फिर केबिन में हवा आएगी. उनके मुताबिक़, हेपा के ज़रिए एयरक्राफ्ट में हॉस्पिटल स्तर का फिल्ट्रेशन सुनिश्चित हो सकेगा."

ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट और टेरी के प्रतिष्ठित फेलो श्री प्रकाश कुछ और सुझाव देते हैं.

वो कहते हैं, "बीच की सीट ख़ाली रखकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना आसान होगा. बुज़ुर्गों के लिए आगे की या पीछे की सींटे तय कर दें, क्योंकि उन्हें बीच-बीच में कई बार उठना पड़ता है. शौचालय के इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी बरती जानी चाहिए. केबिन क्रू भी कम से कम हो तो अच्छा है. यात्रियों की मदद के लिए एक या दो क्रू से काम चलाना चाहिए. वेब चेक-इन पर ज़ोर दिया जाना चाहिए. जाते वक्त सामान लेने के लिए बेल्ट की संख्या बढ़ा देनी चाहिए, जिससे एक जगह कम लोग इकट्ठा हों और आपस में दूरी बना सकें."

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