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कोरोना: लॉकडाउन में मनरेगा योजना बन गई है मज़दूरों की लाइफ़लाइन
- Author, आलोक पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ सरकार ने महात्मा गांधी रोज़गार गारंटी योजना में पूरे देश में सबसे अधिक मज़दूरों को काम देने का दावा किया है. भारत सरकार के शनिवार तक के आंकड़ों के अनुसार ई-मस्टर रोल में दर्ज संभावित कार्यशील मज़दूरों की संख्या छत्तीसगढ़ में 23,26,252 है. मज़दूरों की यह संख्या पूरे देश में सबसे अधिक है.
इसके अलावा पिछले 9 दिनों में ही छत्तीसगढ़ ने 1 करोड़ 89 लाख मानव दिवस का रिकार्ड क़ायम किया है. हालांकि विपक्ष का आरोप है कि रोज़गार गारंटी योजना के अधिकांश काम काग़ज़ों में ही हो रहे हैं.
दूसरी ओर सरकार का दावा है कि कोरोना के कारण मार्च के बाद से लागू लॉकडाउन के बीच जबसे रोज़गार गारंटी का काम शुरु हुआ है, तब से गांवों में कामकाज ज़ोरों पर है. कहीं तालाब खुद रहे हैं तो कहीं तालाबों को गहरा करने का काम चल रहा है. कहीं खेतों का सुधार हो रहा है तो कहीं लोग सड़कों के काम में लोग जुटे हुये हैं.
बिलासपुर ज़िले के धमनी पंचायत के सरपंच मनीष शर्मा, पिछले दो-तीन सप्ताह से रोज़गार गारंटी योजना में मज़दूरों की संख्या को लेकर चकित हैं.
मनीष शर्मा कहते हैं, "मैं पुराने आंकड़े देख रहा था. हर साल बमुश्किल 200 से 250 लोग रोज़गार गारंटी योजना में काम करते थे. लेकिन आज की तारीख़ में लगभग 600 लोग हर दिन काम कर रहे हैं. नये जॉब कार्ड के लिये आवेदन आ रहे हैं. ऐसा पहली बार हुआ है."
धमनी में दो बड़े तालाबों की गहरीकरण का काम चल रहा है तो दर्जन भर किसानों के खेतों के समतलीकरण में मज़दूर जुटे हुये हैं. मज़दूरों को तुरत-फुरत भुगतान भी हो रहा है.
देश में सबसे आगे
पिछले महीने जब कुछ हिदायतों के साथ रोज़गार गारंटी योजना का काम शुरु किया गया, तब छत्तीसगढ़ में दूसरे किसी साल की तरह ही मज़दूरों की भागीदारी हुई. 1 अप्रैल को राज्य में रोज़गार गारंटी में कार्यरत मज़दूरों की संख्या केवल 57 हज़ार 536 थी.
लेकिन लॉकडाउन के दिन जैसे-जैसे बढ़ते गये, रोज़गार गारंटी योजना में काम करने वाले मज़दूरों की संख्या भी बढ़ती चली गई.
आम तौर पर छत्तीसगढ़ में 13 से 15 लाख मज़दूर रोज़गार गारंटी योजना में काम करते रहे हैं. अप्रैल के दूसरे पखवाड़े तक राज्य में 13 लाख 55 हज़ार के आसपास मज़दूर रोज़गार गारंटी योजना में काम कर रहे थे. लेकिन महीने के अंतिम दिनों में मज़दूरों का यह आंकड़ा 18 लाख को पार कर गया.
29 अप्रैल के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ की 9883 ग्राम पंचायतों में 18,51,536 मज़दूर रोज़गार गारंटी योजना में कार्यरत थे. यह देश भर में रोज़गार गारंटी में काम कर रहे कुल मज़दूरों का 24 प्रतिशत था.
हालांकि भारत सरकार के आंकड़े में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के आंकड़े शामिल नहीं थे.
किसान-मज़दूर नेता नंद कश्यप कहते हैं, "ई-मस्टर रोल में दर्ज संभावित कार्यशील मज़दूरों में से लगभग 70-80 प्रतिशत लोग काम में संलग्न रहते हैं. लेकिन लॉकडाउन में यह आंकड़ा और बढ़ गया. लॉकडाउन में जब सारे कामकाज ठप्प हो गये तो ग्रामीण इलाक़ों में उन लोगों ने भी रोज़गार गारंटी में काम करना शुरु कर दिया, जो अब तक शहरों में काम करते थे. इसने ग्रामीण इलाक़ों में थोड़ी राहत तो दी."
अप्रैल महीने में रोज़गार गारंटी में कार्यरत लोगों को कुल 548 करोड़ 41 लाख रूपए का मज़दूरी भुगतान भी किया गया.
रिकार्ड और आरोप
शनिवार तक के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि रोज़गार गारंटी योजना में ई-मस्टर रोल में दर्ज संभावित कार्यशील मज़दूरों की संख्या देश भर में 14,09,4,452 थी. इसमें आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के आंकड़े उपलब्ध नहीं थे.
इस आंकड़े के अनुसार देश में सबसे अधिक 23,26,252 मज़दूर छत्तीसगढ़ में थे. दूसरे क्रम में राजस्थान था, जहां मज़दूरों की संख्या 22,75,541 थी. तीसरे नंबर पर उत्तरप्रदेश था, जहां संभावित कार्यशील मज़दूरों की संख्या 21,12,418 थी.
राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव इसे राज्य के लिये एक बड़ी उपलब्धि मान कर चल रहे हैं. उनका कहना है कि कोविड के कारण लॉकडाउन की स्थिति में पूरे देश भर में रोज़गार पर प्रतिकूल असर पड़ा है. ऐसे में छत्तीसगढ़ में रोज़गार गारंटी योजना में सर्वाधिक मज़दूरों को काम मिलने से लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "पिछले महीने छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार ने 1 करोड़ 23 लाख मानव दिवस रोज़गार उपलब्ध कराया था. इस महीने के नौ दिनों में ही यह आंकड़ा 1 करोड़ 89 लाख मानव दिवस पहुंच गया है. हम रविवार तक दो करोड़ मानव दिवस रोज़गार के आंकड़ों को प्राप्त कर लेंगे."
टीएस सिंहदेव का कहना है कि आने वाले दिनों में राज्य में और अधिक लोगों को रोज़गार देने की योजना है. उनका कहना है कि मज़दूरों का आंकड़ा आने वाले दिनों में 25 लाख के आंकड़े को भी पार कर सकता है.
लेकिन विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि रोज़गार गारंटी योजना के अधिकांश काम काग़ज़ों में ही चल रहे हैं.
किसान नेता और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संदीप शर्मा कहते हैं, "सरकार को चाहिये कि वह रोज़गार गारंटी योजना में हुये कामों को सूचीबद्ध कर के प्रकाशित करे और उसका भौतिक सत्यापन भी करे. हम जैसे लोग गांव में ही रहते हैं और मुझे तो गांवों में कहीं काम नहीं दिख रहा है."
छत्तीसगढ़ में रोज़गार गारंटी योजना में कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग भी एक बड़ा मुद्दा है.
रोज़गार गारंटी योजना के क्रियान्यनय में सहयोग कर रही यूएनडीपी की इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर क्लाइमेट रेजिलिएंट ग्रोथ प्रोग्राम की स्टेट मैनेजर नमिता मिश्रा का कहना है कि राज्य में रोज़गार के आंकड़े सुखद हैं लेकिन अभी जबकि पूरी दुनिया में कोरोना के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल हैं, तब रोज़गार गारंटी में सरकार को प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े काम को और प्राथमिकता देने की ज़रुरत है.
नमिता मिश्रा कहती हैं, "रोज़गार गारंटी योजना में सोशल डिस्टेंसिंग भी एक बड़ी चुनौती है. अगर आप छत्तीसगढ़ के आंकड़े देखें तो राज्य में लगभग 40 हज़ार काम चल रहे हैं यानी एक काम में औसतन 53 लोगों की भागीदारी है. कई ज़िलों में तो एक-एक काम में सौ-सौ से अधिक लोग लगे हुये हैं. इस आंकड़े को कम करने के लिये और अधिक काम शुरु करने की ज़रुरत है."
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