राजस्थान: जनरल और ओबीसी के पदों की कटौती पर घमासान

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिन्दी के लिए
राजस्थान में एलसीडी की परीक्षा में नियमों से उलट जनरल और ओबीसी सीटों को कम किए जाने पर विवाद हो गया है.
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की 2018 लिपिक ग्रेड-2 और जूनियर असिस्टेंट भर्तियों में जनरल और ओबीसी कैटिगरी को नियमों के मुताबिक़ कम सीटें दिए जाने पर विवाद है.
इस भर्ती परीक्षा में जब फ़ाइनल रिज़ल्ट आया तो लिस्ट में इन दोनों कैटिगरी में कुल मिलाकर 587 सीटें कम थीं. लिहाज़ा इस पूरी भर्ती प्रक्रिया पर धांधली के आरोप लग रहे हैं.
इस मामले पर राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है, "लॉकडाउन खुलने के बाद हम इस संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे. हमें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री न्यायप्रिय फ़ैसला करेंगे."
जानिए क्या है पूरा मामला?
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने अप्रैल 2018 में एलडीसी भर्ती नोटिफिकेशन जारी कर राज्य के विभिन्न विभागों में 11,255 पद पर वैकेंसी निकाली.
भर्ती प्रक्रिया के दौरान सरकार ने दो बार पदों में बढ़ोतरी कर के 12,906 पद कर दिए और दो एग्जाम के बाद 12906 पदों पर नियमानुसार डेढ़ गुना परीक्षार्थियों को डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया.
डॉक्युमेंट वेरिफिकशन के बाद फ़ाइनल रिज़ल्ट फ़रवरी 2020 में जारी किया गया, जिसमें जनरल और ओबीसी के 587 पद कम कर दिए गए.

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परीक्षार्थी सचिन चौधरी कहना है कि, ओबीसी वर्ग को प्राप्त 21 प्रतिशत आरक्षण के बजाए 17 प्रतिशित आरक्षण ही दिया गया. इसी तरह सामान्य वर्ग के परीक्षार्थियों को 50 प्रतिशत की बजाए 46 प्रतिशत पद ही दिए गए हैं.
एक अन्य परीक्षार्थी मुकेश बताते हैं कि, डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय अधीनस्थ विभाग में ओबीसी के 2093 और सामान्य वर्ग के 5303 पद थे. जबकि फ़ाइनल रिजल्ट में 587 पदों की कटौती कर ओबीसी वर्ग के 1866 और सामान्य वर्ग के 4943 पद कर दिए गए.
ओबीसी के 227 और सामान्य वर्ग के 360 पदों में कटौती की गई है.
सरकार और विपक्ष क्या कह रही हैं?
वहीं पर्यटन एवं देवस्थान मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने इस मामले पर सरकार के पक्ष और आगे की कार्रवाई के सवाल पर बीबीसी को बताया कि, "इस बारे में 2 बार मुख्यमंत्री से मैंने बात की है और पत्र भी लिखा है. इस मुद्दे को उठाएंगे."
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया का इस मामले पर कहना है कि, एलडीसी भर्ती में पद कम करने को लेकर परीक्षार्थियों की शिकायतें मिल रही हैं. सरकार को इस मामले पर संज्ञान लेकर रिज़ल्ट को सही जारी करना चाहिए, जिससे परीक्षार्थियों में आक्रोश नहीं हो.
उनका कहना है कि, इस मामले पर कई विधायकों ने सरकार को पत्र लिखा है और ट्विटर पर भी परीक्षार्थियों की मांग उठाई है. सरकार को परीक्षार्थियों की सुनवाई करनी चाहिए.

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आरटीआई से पता चला
परीक्षार्थियों ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड पर रिजल्ट में भर्तियों की जानकारी छिपाने और आरक्षण से छेड़छाड़ करने के आरोप लगाए हैं.
वह कहते हैं कि, जब इस मामले में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, प्रशासनिक सुधार विभाग से जानकारी ले चाही तो सभी ने इस बारे में टालमटोल की. जिसके बाद आरटीआई से जानकारी मांगी गई.
17 मार्च 2020 को आरटीआई के जवाब में राजस्थान कर्मचारी बोर्ड ने बताए आंकड़ों को देख कर परीक्षार्थियों को मालूम हुआ कि जनरल और ओबीसी के 4-4 प्रतिशत पदों में कटौती की गई है.
भर्ती में धांधली के आरोप लगाते हुए परीक्षार्थियों ने धरने प्रदर्शन किए और ज्ञापन सौंपे, लेकिन लॉकडाउन होने के कारण अब सोशल मीडिया पर काटे हुए पदों को जोड़ने के लिए कैंपेन चला रहे हैं.
आरटीआई से जानकारी मिलने के बाद परीक्षार्थियों ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री कार्यालय, राजस्थान संपर्क पोर्टल समेत कई विभागों को पत्र लिखे हैं, लेकिन फिलहाल कोई सुनवाई नहीं हुई है.

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परीक्षार्थियों की मांग क्या हैं?
राजस्थान बेरोज़गार एकीकृत महासंघ के प्रवक्ता उपेन यादव का कहना है कि, "इस भर्ती में अधिकारियों की लापरवाही से जनरल और ओबीसी के पद काटे गए हैं. इन आधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए."
यादव कहते हैं, "इस सम्बंध में मैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिल चुका हूं. हमें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इन पदों को जोड़कर अभ्यथियों को न्याय प्रदान करेंगे और ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे."
राजस्थान में अन्य भर्तियों की तर्ज़ पर ही संविधान के अनुसार प्रदत्त ओबीसी को 21 प्रतिशत और सामान्य वर्ग को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिए जाने की मांग है.
परीक्षार्थी मांग कर रहे हैं कि बोर्ड ने जिन 12,906 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित कर के टाइपिंग टेस्ट लिया और इन्हीं पदों के अनुसार 11 फ़रवरी 2020 तक डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराया है, तो 12,906 पदों के अनुसार ही रिज़ल्ट जारी करें.
अंतिम परिणाम में विभाग आवंटन और जॉइनिंग में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं. अच्छे मेरिट वाले अभ्यर्थी को दूरदराज में जॉइनिंग दी जा रही है, जबकि मेरिट में बहुत नीचे रहने वालों को अच्छी जगह और गृह ज़िले के नज़दीक पोस्टिंग मिल रही है.
इस भर्ती की जांच और ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग अभ्यर्थी कर रहे हैं.

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मंत्री, सांसद व विधायकों ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र
एलडीसी भर्ती 2018 मामले में राजस्थान सरकार के मंत्री समेत विपक्ष के भी कई सांसदों, विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर जनरल और ओबीसी कैटेगरी के साथ इसे अन्याय बताया है.
पत्र के जरिए सभी नेताओं ने जनरल और ओबीसी के काटे गए पदों को जोड़ कर फिर से परिणाम जारी करने की मांग की है.
राजस्थान के केबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर जनरल और ओबीसी कैटेगरी के हितों के ख़िलाफ़ बताया और पुनः परिणाम जारी करने की मांग की है.
राज्यमंत्री सुखराम विश्नोई ने सरकार को पत्र लिखा कि, एलडीसी भर्ती में पदों की कटौती से सीधा जनरल और ओबीसी कैटेगरी को नुकसान है.
सांसद हनुमान बेनिवाल ने मुख्य सचिव को पत्र लिख कि, ज़िम्मेदारों की मनमानी से ओबीसी और जनरल कैटेगरी के पदों में कटौती कर परिणाम जारी करना नाइंसाफी है. ज़िम्मेदारों को तलब कर कार्रवाई करने की मांग की है.
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