महबूबा मुफ़्ती की पीएसए के तहत नज़रबंदी तीन महीने के लिए बढ़ाई गई

महबूबा मुफ़्ती

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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती की पब्लिक सेफ़्टी एक्ट (पीएसए) के तहत नज़रबंदी तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई है.

उनकी नज़रबंदी मंगलवार को ख़त्म होने वाली थी लेकिन प्रशासन ने उससे पहले ही उनकी नज़रबंदी को बढ़ाने का फ़ैसला कर लिया.

महबूबा मुफ़्ती के अलावा पीडीपी के नेता सरताज मदनी और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता अली मोहम्मद सागर की नज़रबंदी भी तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई है.

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मुफ़्ती को पिछले साल (2019) पाँच अगस्त को हिरासत में लिया गया था जब भारत की केंद्र सरकार ने भारतीय संविधान की धारा 370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को मिलने वाले विशेष दर्जे को समाप्त करने का फ़ैसला किया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख़ में बांट दिया था.

मोदी, उमर, महबूबा

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छह फ़रवरी 2020 को उन पर एक और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह के साथ पीएसए लगाया गया था.

महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिजा मुफ़्ती ने अपनी मां की नज़रबंदी बढ़ाए जाने पर कहा कि वो इस फ़ैसले से बिल्कुल भी चौंकी नहीं.

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अपनी मां के ट्टिवर हैंडल से जिसे अपनी मां की हिरासत के बाद से वो ख़ुद संभालती हैं, उन्होंने लिखा, "तर्क सम्मत आवाज़ को दबाना मौजूदा सरकार के लिए एक आदत सी बन गई है ख़ासकर धारा 370 को ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से हटाने के बाद. इसलिए मेरी मां की नज़रबंदी बढ़ाने के फ़ैसले ने मुझे ज़रा भी अचंभित नहीं किया. ये समझ लेना कि धारा 370 पर किसी भी बहस का गला घोंट देने से ये मामला ख़त्म हो जाएगा, ये ख़्याली पुलाव पकाने जैसा है."

नेशनल कान्फ़्रेंस के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने महबूबा मुफ़्ती की नज़रबंदी बढ़ाए जाने की कड़ी निंदा की है. उन्होंने इस बारे में दो-तीन ट्वीट किए.

उमर ने कहा कि, "जो सरकार जम्मू-कश्मीर में हालात के सामान्य होने के लंबे दावे कर रही है, उसके लिए पिछले कुछ दिनों की घटना और महबूबा मुफ़्ती की नज़रबंदी का बढ़ाया जाना इसके बात के सबूत काफ़ी हैं कि मोदी जी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) ने अकेले जम्म-कश्मीर को दशकों पीछे धकेल दिया है."

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उमर ने कहा कि ये एक अमानवीय और क्रूर फ़ैसला है जिसपर यक़ीन करना मुश्किल है. उमर ने कहा कि महबूबा मुफ़्ती ने ऐसा कुछ भी नहीं किया या कहा है जो कि भारत सरकार के उनके प्रति रवैये को जायज़ क़रार दिया जा सकता है.

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उन्होंने कहा कि वो इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं कि भारत सरकार के इस फ़ैसले का औचित्य क्या है क्योंकि उनके अनुसार ये बदले की कार्रवाई के अलावा और कुछ नहीं.

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उमर के अनुसार भारत सरकार को इस समय जम्मू-कश्मीर में दोस्त बनाने की ज़रूरत है लेकिन वो इसके ठीक विपरीत काम कर रहे हैं.

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