कोरोना लॉकडाउन: DA कटने से कर्मचारियों और सैनिकों को नुक़सान लेकिन फ़ायदा किसे होगा?

भारतीय सेना

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    • Author, प्रशांत चाहल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत सरकार ने कोविड-19 महामारी की वजह से क़रीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 61 लाख पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते अगले डेढ़ वर्ष तक पुरानी दरों पर ही रोके रखने का निर्णय किया है.

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आदेशानुसार केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों की महंगाई राहत की मौजूदा दरों को जुलाई 2021 तक रोक दिया गया है.

व्यय विभाग की अपर सचिव ऐनी जॉर्ज मैथ्यू ने सरकारी आदेश में लिखा है कि 'केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2021 की महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की अतिरिक्त किस्तों का भुगतान नहीं किया जाएगा. पर बाद में यह व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी.'

भारत सरकार के अनुसार कोविड-19 की वजह से उत्पन्न हुए संकट को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है.

सोशल मीडिया पर कुछ लोग लिख रहे हैं कि 'सरकार कर्मचारियों को बाद में एरियर यानी बकाये की शक़्ल में महंगाई भत्ते का भुगतान करेगी.' पर व्यय विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि '1 जनवरी 2020 से 30 जून 2021 तक की अवधि का कोई बकाया नहीं दिया जाएगा.'

नरेंद्र मोदी

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इस आदेश का किसपर, कितना असर?

सरकार के इस फ़ैसले का केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर व्यावहारिक रूप से क्या असर होगा? और महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? इसे समझने के लिए हमने पूर्व लेफ़्टिनेंट जनरल शंकर प्रसाद से बात की.

उन्होंने बताया कि "महंगाई भत्ता क़ीमत सूचकांक से जुड़ा होता है. देश में महंगाई बढ़ती है तो सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भत्ता देती है ताकि वो अपने जीवन स्तर को बनाए रख सकें. सरकार साल में दो बार इसका आकलन करती है जिसके बाद इसमें 3 से 6 प्रतिशत की वृद्धि की जाती रही है. पिछले महीने ही सरकार ने महंगाई भत्ते में 4 प्रतिशत की वृद्धि मंज़ूर की थी जिसपर अब रोक लगा दी गई है."

एक मिसाल देते हुए शंकर प्रसाद ने कहा कि 'अगर किसी पेंशनभोगी को 50 हज़ार रुपए प्रति माह पेंशन मिलती है तो 4 प्रतिशत के हिसाब से जो दो हज़ार रुपए बढ़ने थे, वो अब नहीं बढ़ेंगे और मोटे तौर पर इस वित्त वर्ष में उसे क़रीब 25 हज़ार रुपए का नुक़सान होगा.'

शंकर प्रसाद कहते हैं कि 'कर्मचारी हों या पेंशनभोगी, सभी लोग अपने ख़र्चों को देखते हुए डीए बढ़ने का इंतज़ार करते हैं. फ़ौजी अफ़सरों का वेतन सिविल सर्विस वाले अधिकारियों की तुलना में वैसे भी क़रीब 10 फ़ीसदी कम होता है. ऐसे में डीए ना बढ़ना उन्हें निराश तो करेगा क्योंकि एक मिड रैंक के अफ़सर को इस वित्त वर्ष में जो डेढ़ से दो लाख रुपए अतिरिक्त मिलते, वो अब नहीं मिलेंगे. साथ ही कम पेंशन वालों को सरकार के इस निर्णय से ज़्यादा परेशानी होगी. उदाहरण के लिए, जिन रिटायर्ड सिपाहियों की पेंशन 20 हज़ार से कम है, उन्हें यह नुक़सान काफ़ी बड़ा दिखाई देगा और उनके ख़र्च करने की क्षमता पर भी इसका असर दिखेगा.'

भारतीय सेना

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भारतीय फ़ौज के एक सर्विंग अफ़सर ने नाम ना ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि 'डीए ना बढ़ने के अलावा, उन्हें एक वर्ष तक हर महीने एक दिन की सेलरी 'स्वेच्छापूर्वक' डोनेट करने के आदेश मिले हैं.'

इस अफ़सर ने कहा, "फ़ौज में अगर सीनियर कह दें तो स्वेच्छा जैसा कुछ बचता नहीं है. यानी लेफ़्टिनेंट कर्नल रैंक के एक अधिकारी का, जिसका एक दिन का वेतन क़रीब 5000 रुपए बनता है, सरकार 12 महीने में उसके हिस्से के 60 हज़ार रुपए रोक लेगी. हालांकि कुछ अफ़सरों ने सेलरी डोनेट करने से इनकार कर दिया है."

भारतीय डिफ़ेंस जिसमें तीनों सेनाएं शामिल हैं, उनके कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर सरकार के इस फ़ैसले का असर होगा.

इनके अलावा भारतीय रेलवे, भारतीय डाक विभाग, भारत संचार निगम लिमिटेड, अर्धसैनिक बलों समेत मंत्रालयों में काम करने वाले अन्य केंद्रीय सेवाओं से संबंधित लोगों के वेतन और पेंशन पर भी इतना ही असर पड़ने वाला है.

सरकार के फ़ैसले की आलोचना

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सरकार के फ़ैसले की आलोचना और मुख़ालफ़त

केंद्र सरकार के आदेश के बाद तमिलनाडु सरकार ने भी महंगाई भत्ते में वृद्धि पर रोक लगा दी है जिसका असर प्रदेश के 12 लाख कर्मचारियों और 7.4 लाख पेंशनभोगियों पर होगा.

महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने भी महंगाई भत्ते की वृद्धि रोक दी है.

जानकारों की राय है कि अन्य राज्य सरकारें भी अगले कुछ दिनों में एक-एक करके डीए फ़्रीज़ करने का आदेश दे सकती हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने वित्त मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 'केंद्र और राज्य सरकारें अगर महंगाई भत्ते की अतिरिक्त किस्तें रोक दें तो मिलकर क़रीब 1.20 लाख करोड़ रुपए बचा सकते हैं जिसका इस्तेमाल कोविड-19 महामारी की वजह से हुए घाटे को पूरा करने में किया जा सकता है.'

लेकिन सरकारी कर्मचारियों और पेशनभोगियों के संगठन सरकार के इस तरीक़े की आलोचना कर रहे हैं.

भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) कर्मचारी यूनियन ने सरकार पर आरोप लगाया है कि 'सरकार कर्मचारियों पर हमला कर रही है और हमारे पैसे से कॉरपोरेट कंपनियों के लोन माफ़ करने की तैयारी की जा रही है.'

बीएसएनएल के एक लाख से भी अधिक पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन, ऑल इंडिया बीएसएनएल-डॉट पेंशनर्स एसोसिएशन ने कहा है कि 'दो साल से हमें मेडिकल भत्ता नहीं मिला, हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही, इसके बावजूद हमारे हज़ारों सदस्यों ने पीएम केयर फंड में चंदा दिया और बाद में हमारे साथ ये धोखा किया गया.'

सरकार के फ़ैसले की आलोचना

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भारतीय रेलवे और भारतीय डाक विभाग समेत अन्य केंद्रीय सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के संगठन 'जॉइंट कॉन्सुलेटिव मशीनरी फ़ॉर सेंट्रल गवर्नमेंट एम्पलॉइज़' ने भी सरकार के इस आदेश की आलोचना की है.

संगठन के महासचिव शिव गोपाल मिश्र ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "1960 में हड़तालों के एक दौर के बाद सरकारी कर्मचारियों को डीए मिलना शुरू हुआ था. पर जब तक 1996-97 में पाँचवें वेतन आयोग की सिफ़ारिशें लागू नहीं हुई थीं, तब तक कर्मचारियों को हर छह महीने में रिव्यू करके डीए देने की व्यवस्था नहीं बन पाई थी. हम मानते हैं कि महंगाई भत्ता हर सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी का अधिकार है. इसे यूं ही रोका नहीं जा सकता. इसलिए हमने पीएम मोदी और वित्त मंत्री से पुनर्विचार करने की माँग की है. वे नहीं मानते तो लॉकडाउन के बाद संघर्ष ही विकल्प बचेगा."

कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ एक्स पैरामिलिट्री फ़ोर्स वेलफ़ेयर एसोसिएशन ने भी अर्धसैनिक बलों के महंगाई भत्ते में कटौती करने के सरकार के निर्णय की आलोचना की है.

संगठन के महासचिव रणवीर सिंह ने कहा कि, "सीआरपीएफ़ के जवान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जूझ रहे हैं, आईटीबीपी वाले सबसे मुश्किल इलाक़ों में तैनात हैं, बीएसएफ़ वाले बॉर्डर की चौकीदारी कर रहे हैं, दिल्ली में दंगे हों या कश्मीर में लॉकडाउन, सब जगह आधी-अधूरी सुविधाएं प्राप्त करने वाले अर्धसैनिक बलों को भेजा जाता है, तो हमारे लिए तो हर रोज़ कोरोना है. पर डीए रोकते समय इस बारे में बिल्कुल नहीं सोचा गया."

उन्होंने बताया कि सरकार के इस फ़ैसले का असर 20 लाख अर्धसैनिक परिवारों पर पड़ेगा.

रणवीर सिंह कहते हैं कि उनके संगठन ने पीएम मोदी को इस संबंध में चिट्ठी लिखी है. अगर कोई सुनवाई नहीं होती है, तो 20 जुलाई 2020 को वो दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे.

राहुल गांधी

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सरकार ने ये फ़ैसला आख़िर क्यों लिया?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि 'लाखों करोड़ की बुलेट ट्रेन परियोजना और सेंट्रल विस्टा को सजाने की परियोजना निलंबित करने की बजाय कोरोना से जूझ कर जनता की सेवा कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और देश के जवानों का महंगाई भत्ता काटना सरकार का असंवेदनशील तथा अमानवीय निर्णय है.'

वहीं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी मोदी सरकार के इस फ़ैसले की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि 'इस स्टेज पर सरकारी कर्मचारियों और सैन्य बलों पर आर्थिक दबाव डालना बिल्कुल ग़ैर-ज़रूरी है.'

पर इस मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए भारतीय वित्त मंत्रालय के प्रमुख आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने लिखा है कि 'यह स्पष्ट होना चाहिए कि डीए की अतिरिक्त किस्तों को रोकने का फ़ैसला, एक अस्थायी फ़ैसला है जो जुलाई 2021 तक के लिए है. ये असाधारण समय है और छोटे व मध्यम उद्यमों, अनौपचारिक क्षेत्र और अन्य कमज़ोर समूहों की मदद के लिए सरकार को पैसे की ज़रूरत है.'

अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सान्याल ने ट्वीट किया, "सरकार ने इस तरह का निर्णय पहली बार नहीं लिया है, बल्कि 1962 और 1971 के युद्ध के बाद इससे भी कड़े फ़ैसले लिए गए थे. सभी करदाताओं, संपत्ति मालिकों और सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए 'द कम्पलसरी डिपॉज़िट एक्ट 1963' लागू किया गया था. 'द कम्पलसरी डिपॉज़िट स्कीम (आईटीपी) एक्ट 1974' के अनुसार करदाताओं को इस स्कीम में अपनी आय का 18% तक (इनकम टैक्स) जमा कराने के आदेश थे, जबकि उस दौर की बढ़ी हुई मुद्रास्फीति की दर को देखते हुए ऐसा एक्ट लाना किसी तरह से जायज़ नहीं था."

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संजीव सान्याल के अनुसार 'उस समय के विपरीत, जब मुद्रास्फीति की दर कम है, अस्थायी रूप से डीए रोकने का फ़ैसला सरकार को पैसा जोड़ने में मदद करेगा ताकि अर्थव्यवस्था में सबसे ज़्यादा प्रभावित लोगों की तत्काल प्रभाव से मदद की जा सके.'

हालांकि सोशल मीडिया पर उनके इस ट्वीट की कुछ लोग आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि 'मौजूदा सरकार अपने समय के विवादित फ़ैसलों के लिए हर बार यह तर्क नहीं दे सकती कि कांग्रेस पार्टी की सरकार ने भी ऐसा किया था.'

निर्मला सीतारमण

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सरकार के पैसा बचाने से जुड़ी संभावना

सरकार के इस निर्णय के आर्थिक पहलू पर बात करते हुए वरिष्ठ बिज़नेस पत्रकार पूजा मेहरा कहती हैं कि 'इससे पैसे का रीडिस्ट्रीब्यूशन यानी पुनर्वितरण हो सकेगा और अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी.'

वे कहती हैं कि "कोविड-19 से अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है, जीडीपी पर इसका असर दिख ही रहा है, लॉकडाउन की वजह से लेन-देन कम हुआ है तो लोगों की आमदनी घटी है और सरकार का टैक्स कलेक्शन भी कम हुआ है. अगले कुछ महीने भी टैक्स कलेक्शन कम होगा, ऐसे अनुमान लगाए जा रहे हैं. ऐसे में जनकल्याण की योजनाएं चलाना और सरकारी कर्मचारियों को वेतन देना, सरकार के लिए एक चुनौती है."

पूजा मेहरा का मानना है कि 'इस समय में महंगाई भत्ते की अतिरिक्त किस्त अगर नौकरीपेशा लोगों को दे भी दी जाती तो वो इस पूरे पैसे को ख़र्च ना करते. जबकि सरकारी योजनाओं के ज़रिए अगर ये पैसा छोटे-मझौले उद्योगों तक पहुँचता है और कमज़ोर वर्ग के लोगों के हाथ पहुँचता है, तो ख़र्च होकर इस पैसे की अर्थव्यवस्था में शामिल होने की ज़्यादा संभावना होगी.'

नरेंद्र मोदी

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'डीए की किस्त रोककर फ़ायदा नहीं, नुक़सान होगा'

वरिष्ठ पत्रकार औनिंदो चक्रवर्ती का नज़रिया है कि 'डीए फ़्रीज़ करने के फ़ैसले का भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर होगा.'

औनिंदो के अनुसार 'सरकारी नौकरी करने वाला एक बड़ा तबका मध्यम वर्ग से आता है जो बुनियादी ज़रूरतों के अलावा भी ख़र्च करने की हैसियत रखता है. मध्यम वर्ग ही छोटे और मझौले उद्योगों का सबसे बड़ा ग्राहक है, इसलिए उनकी जेब में अगर अतिरिक्त पैसा पहुँचता तो फ़ायदा होता.'

वे समझाते हैं कि "भारत में लगभग 1.7 करोड़ परिवार केंद्र और राज्य की सरकारी नौकरियों पर आश्रित हैं. इनमें से क़रीब 85 लाख परिवार मध्यम वर्गीय होंगे जो देश के कुल 5.6 करोड़ मध्यम वर्गीय परिवारों का 15 प्रतिशत है. बाकी के 85 प्रतिशत मध्यम वर्गीय परिवार जिनकी आय या तो प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों से आ रही है या फिर छोटे और मझौले उद्योगों के ज़रिए, वो हमें पता है कि परेशान हैं और लॉकडाउन की वजह से उनपर आर्थिक दबाव बढ़ गया है. ऐसे समय में सरकार डीए की अतिरिक्त किस्त ना देकर क़रीब 1.20 लाख करोड़ रुपये तो बचा लेगी, पर यही पैसा अगर सरकारी मुलाज़िमों के पास पहुँचता तो वो इसका एक बड़ा हिस्सा छोटे और मझौले उद्योंगों की वस्तुओं और सेवाओं पर ख़र्च करते. पर जब यही पैसा ग़रीबों को दिया जाएगा तो वो इसे सिर्फ़ बुनियादी ज़रूरतों पर ख़र्च करेंगे जिसकी वजह से ये पैसा छोटे और मझौले उद्योंगों तक पहुँच ही नहीं पाएगा."

भारतीय अर्थव्यवस्था

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औनिंदो ने बताया कि 'वर्ष 2002 की आरबीआई की एक स्टडी के मुताबिक़ अर्थव्यवस्था में उपभोग पर ख़र्च होने वाले हर दो रुपये, पाँच रुपए की कमाई करते हैं.'

वे कहते हैं, "अगर डीए के ज़रिए मध्यम वर्ग को मिलने वाला क़रीब 80 हज़ार करोड़ रुपया बाज़ार में ख़र्च होता, तो दो लाख करोड़ रुपए की कमाई करता जो हमारी जीडीपी का लगभग एक परसेंट है. ये कमाई लॉकडाउन के बाद हमारे देश के प्राइवेट सेक्टर को रिकवर करने में मदद करती."

औनिंदो के मुताबिक़, "मनमोहन सिंह को ये बात पता थी, इसलिए 2008 की महामंदी के बाद उनकी सरकार ने छठे पे-कमिशन की सिफ़ारिशों को बहुत सक्रिय ढंग से लागू किया था. साथ ही उन्होंने 18 हज़ार करोड़ की बकाया राशि को भी नहीं रोका था जिसका सकारात्मक असर अगले ही वित्त वर्ष में देखने को मिला था. मगर मोदी सरकार जो कर रही है, वो श्याम की जेब का पैसा लेकर, राम की जेब में डालने जैसा है जिससे दोनों को ही कोई मुनाफ़ा होगा, ऐसा लगता नहीं है."

भारत में कोरोनावायरस के मामले

यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कुल मामले जो स्वस्थ हुए मौतें
महाराष्ट्र 1351153 1049947 35751
आंध्र प्रदेश 681161 612300 5745
तमिलनाडु 586397 530708 9383
कर्नाटक 582458 469750 8641
उत्तराखंड 390875 331270 5652
गोवा 273098 240703 5272
पश्चिम बंगाल 250580 219844 4837
ओडिशा 212609 177585 866
तेलंगाना 189283 158690 1116
बिहार 180032 166188 892
केरल 179923 121264 698
असम 173629 142297 667
हरियाणा 134623 114576 3431
राजस्थान 130971 109472 1456
हिमाचल प्रदेश 125412 108411 1331
मध्य प्रदेश 124166 100012 2242
पंजाब 111375 90345 3284
छत्तीसगढ़ 108458 74537 877
झारखंड 81417 68603 688
उत्तर प्रदेश 47502 36646 580
गुजरात 32396 27072 407
पुडुचेरी 26685 21156 515
जम्मू और कश्मीर 14457 10607 175
चंडीगढ़ 11678 9325 153
मणिपुर 10477 7982 64
लद्दाख 4152 3064 58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 3803 3582 53
दिल्ली 3015 2836 2
मिज़ोरम 1958 1459 0

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

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