कोरोना वायरस के दौर में क्या है स्मार्ट मनी का फ़ंडा?

    • Author, क्रिस्टीना जे. ऑरगज़
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ वर्ल्ड

गिरते बाज़ार में ख़रीदो और चढ़ती क़ीमतों पर बेच लो.

वित्तीय बाज़ारों में चाहे वो बड़ा निवेशक हो या फिर छोटा खिलाड़ी, हरेक शख़्स इसी सिद्धांत पर चलना चाहता है. आख़िर मुनाफ़े का ये सीधा सा ही तो गणित है.

लेकिन अगर कोई जीतता है तो इसका मतलब ये भी है किसी ने कुछ गंवाया भी है.

और कोरोना संकट के इस दौर में वित्तीय बाज़ारों में ज़्यादातर लोग घाटा उठा रहे हैं, ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने मुनाफ़ा कमाया है.

विशेषज्ञ कहते हैं कि ये वो लोग हैं जो धारा के विपरीत तैरने का हुनर जानते हैं, डर से क़दम पीछे नहीं खींच लेते और जिन्होंने कोरोना संकट से उपजे हालात पर बड़ी बारीक नज़र रखी थी.

ऐसे निवेशकों को इस बात की समझ रहती है कि संकट के समय कौन सी कंपनी अच्छा कारोबार करेगी.

एक निवेशक की कहानी

कोरोना वायरस संकट का आर्थिक फ़ायदा उठाने वाले एक निवेशक ने एक ऐसी कंपनी के शेयर ख़रीदे जो N95 मास्क का उत्पादन करती है.

इस निवेशक ने 'न्यू यॉर्कर' मैगज़ीन से कहा, "आप किसी ऐसे शख़्स को नहीं जानते होंगे जिसने मेरे जितना पैसा कमाया होगा."

उसने अंदाज़ा लगाया था कि कोरोना वायरस के अमरीका पहुंचने पर इस कंपनी को सरकारी ठेके मिलेंगे और इससे कंपनी का उत्पादन और मुनाफ़ा दोनों ही बढ़ जाएगा.

अतीत में सार्स, N1H1 और इबोला जैसी महामारियों का अर्थव्यवस्था पर कैसा असर पड़ा था, इस मामले में तो इस आदमी ने गहराई से स्टडी की थी.

इसलिए इस निवेशक के पास दूसरे निवेशकों की तुलना में ज़्यादा जानकारी थी और उसने आने वाली परिस्थिति का बेहतर अंदाज़ा लगा लिया था.

'न्यू यॉर्कर' को इस शख़्स ने बताया, "दिसंबर में जब चीन में कोरोना वायरस का पता चला तभी मैंने निवेश शुरू कर दिया था. मुझे 2000 फ़ीसदी का मुनाफ़ा हुआ."

'स्मार्ट मनी' क्या है

कोरोना संकट की वजह से हाल के हफ़्तों में दुनिया के वित्तीय बाज़ार बहुत तेज़ी से गिरे हैं और थोड़े ही समय के भीतर उतनी ही ताक़त के साथ फिर खड़े हो गए हैं.

इस निवेशक का अनुभव ये सबक़ देता है कि बाज़ार में हमेशा ही कुछ ऐसी ताक़तें होती हैं जो दूसरे से ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं. 'स्मार्ट मनी' इसी ताक़त का नाम है.

दरअसल, वो पैसा जो ये बता सकता है कि कल का बाज़ार कैसा होगा और वो मार्केट में दूसरों से आगे रहकर भी दिखा दे,'स्मार्ट मनी' है.

ख़ासकर जब कोई निवेशक लंबे समय तक लगातार करके दिखाए.

ये वो निवेशक होते हैं जो टिके रहते हैं तब जब कि दूसरे लोग भाग जाते हैं. वे पेशेवर पृष्ठभूमि के लोग होते हैं और बाज़ार का उन्हें सालों का तजुर्बा होता है.

कोरोना संकट का मुश्किल दौर

फ़िनांशियल फर्म 'एलायंज़ ग्लोबल इन्वेस्टर्स' के मार्केट एनालिस्ट हैंज़ जॉर्ग नॉमर कहते हैं, "कोरोना संकट के मुश्किल दौर में मुनाफ़ा कमाने की गुंजाइश बहुत कम रहती है. लेकिन इसके बावजूद स्टॉक मार्केट में इन दिनों ऐसे ही निवेशकों का डंका बज रहा है."

इन्वेस्टमेंट फर्म 'की कैपिटल एट' के फ़ंड मैनेजर अल्फ्रेडो अल्वारेज़ पिकमैन का कहना है, "स्मार्ट मनी वाले निवेशकों ने कम समझदार निवेशकों की तुलना में बेहतर मुनाफ़ा कमाया है, इसे साबित करने के लिए हमारे पास ज़्यादा सबूत नहीं हैं. लेकिन ये भी सच है कि स्मार्ट मनी वाले निवेशकों की गतिविधियों का बाज़ार में चल रही अफ़वाहों का ख़ासा असर पड़ता है."

केवल वही लोग जिनके पास आधुनिक टेक्नॉलॉजी, धीरज, अनुभव और लिक्विडिटी (यानी हाथ में नकदी) होती है, क़ीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव का फ़ायदा उठा पाते हैं.

'स्टुपिड मनी'

'स्मार्ट मनी' को कंट्रोल करने वाले निवेशक बाज़ार में अदृश्य शक्ति की तरह होते हैं. वे बड़ी रक़म का दांव किसी एक ही घोड़े पर लगाते हैं.

अल्फ्रेडो अल्वारेज़ पिकमैन कहते हैं, "वैसे निवेशक जो स्मार्ट मनी के इन्वेस्टमेंट ट्रेंड को समय रहते पकड़ नहीं पाते और बाद में उसको फ़ॉलो करने की कोशिश करते हैं, 'स्टुपिड मनी' कहे जाते हैं. क्योंकि स्मार्ट मनी ने तब तक अपना मुनाफ़ा बना लिया होता है."

सूचना भी एक बहुत बड़ी चाभी है. सच तो ये है कि 'स्मार्ट मनी' शब्द उन पेशेवर खिलाड़ियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें इस खेल की बारीक समझ होती है.

उन्हें पता होता है कि वे किस चीज़ पर दांव लगा रहे हैं, उन्हें वो अंदरूनी जानकारी भी होती है जिस तक आम निवेशकों की पहुंच नहीं होती.

अल्फ्रेडो अल्वारेज़ पिकमैन का कहना है, "निवेश की दुनिया भी ऐसी ही है. आम लोग ये समझते हैं कि उनका पैसा बाज़ार की बेहतर समझ और जानकारी रखने वाले लोगों के हाथों में है.

बाज़ार में गिरावट

स्पेन के आईई बिज़नेस स्कूल में फिनांस के प्रोफ़ेसर जुआन पेड्रो गोमेज़ कहते हैं, "हमने देखा है कि कई निवेशकों ने अपना सबकुछ गंवा दिया है और कुछ ऐसे भी हैं जो मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं."

इसका नतीजा ये होता है कि उन्हें मजबूर होकर अपने शेयर बेचने पड़ते हैं. कल्पना कीजिए कि बाज़ार गिर रहा हो और किसी को अपना पेंशन फ़ंड बेचना पड़े.

पेड्रो गोमेज़ का कहना है, "इससे हालात और बिगड़ जाते हैं. बाज़ार में गिरावट का सिलसिला बना रहता है."

लेकिन मुनाफ़ा कमाने वाले निवेशकों में दो तरह के लोग होते हैं. एक वो जो मुश्किल हालात में भी धीरज रख सकते हैं और दूसरे क़िस्म के वे लोग होते हैं जिन्हें तत्काल के लिए पैसे की ज़्यादा परवाह नहीं होती है, उन्हें लिक्विडिटी यानी फ़ौरन नक़दी की ज़रूरत नहीं होती.

प्रोफ़ेसर गोमेज़ का कहना है, "ऐसे निवेशक दीर्घकालीन लक्ष्यों को ध्यान में रखते हैं. वे इस बात पर यक़ीन रखते हैं कि हालात बदलेंगे और अच्छे दिनों की वापसी होगी."

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