कोरोना वायरस: यूपी में बीजेपी विधायक के निशाने पर क्यों है पार्टी, सरकार और प्रधानमंत्री

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार जहां इस समय कोरोना संकट से जूझ रही है वहीं सरकार को अपने ही विधायकों की नाराज़गी भी मोल लेनी पड़ रही है.
हाल ही में बीजेपी के एक विधायक ने न सिर्फ़ राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं बल्कि पार्टी पर भी जातिगत भेदभाव करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए हैं.
बीजेपी के सीतापुर सदर से विधायक राकेश राठौर के कुछ कथित ऑडियो टेप वायरल हुए हैं जिनमें वो कोरोना संकट से लड़ने के क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील का मख़ौल उड़ा रहे हैं जिसमें उन्होंने कोरोना वॉरियर्स के लिए ताली, थाली और घंटी बजाने की अपील की थी. राकेश राठौर यह बात किसी के साथ फ़ोन पर बातचीत के दौरान कहते हैं.
एक अन्य ऑडियो टेप में वो दिल्ली में हार का ठीकरा भी पार्टी की नीतियों पर फोड़ते हैं.
दिल्ली के किसी बीजेपी नेता से बातचीत के दौरान वो कहते हैं, "दिल्ली साफ़ हो गए, झारखंड साफ़ हो गए. इसी झूठ के चलते आगे भी यही होने वाला है. वोट दलित-पिछड़े सबने दिया लेकिन राज ब्राह्मणों का चल रहा है. भाजपा ब्राह्मणों का राज स्थापित करना चाहती है."
इन ऑडियो टेप्स में राकेश राठौर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर सवाल उठाते हैं और कहते हैं कि उनकी और दूसरे विधायकों की बात अधिकारी नहीं सुनते हैं.
'चारों ओर राम राज्य है'
एक ऑडियो टेप में उनके पास मुख्यमंत्री कार्यालय से किसी अधिकारी का यह जानने के लिए फ़ोन आता है कि आपके क्षेत्र में राशन वितरण और अन्य योजनाओं का क्रियान्वयन कैसा हो रहा है. उस पर विधायक राकेश राठौर का व्यंग्यात्मक जवाब होता है, "चारों ओर राम राज्य है."
भारतीय जनता पार्टी ने राकेश राठौर के इन ऑडियो टेप्स का संज्ञान लेते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
पार्टी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के निर्देश पर यह नोटिस बीजेपी के प्रदेश महामंत्री विद्यासागर सोनकर की ओर से जारी किया गया है जिसमें लिखा है, "राठौर के ख़िलाफ़ पार्टी विरोधी कृत्य करने की शिकायतें मिल रही थीं, जिस पर संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की गई है. राठौर को एक सप्ताह के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा."
राकेश राठौर से इस बारे में बात करने की कोशिश की गई लेकिन वो फ़िलहाल फ़ोन पर उपलब्ध नहीं हैं. वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि इन ऑडियो टेप्स की जाँच की जा रही है और यदि ये सच में राठौर के ही हैं तो उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
राकेश राठौर के आरोपों के बारे में पार्टी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं, "बीजेपी हर कार्यकर्ता को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है. किसी के साथ जाति, धर्म और संप्रदाय पर यहां भेदभाव नहीं किया जाता है. इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है. ऑडियो टेप्स की जाँच हो रही है और यह भी पता किया जा रहा है कि ऐसे आरोप यदि लगाए गए हैं तो किन परिस्थितियों में लगाए गए हैं."

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कई और विधायक भी जता चुके नाराज़गी
लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है जबकि पार्टी के किसी विधायक या नेता ने पार्टी नेतृत्व के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई हो. पिछले साल 17 दिसंबर को पार्टी के क़रीब सौ विधायक विपक्षी दलों के विधायकों के ख़िलाफ़ यह आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गए थे कि उनके क्षेत्रों में ही अधिकारी उनकी उपेक्षा करते हैं और विधायकों की कोई बात नहीं सुनी जाती.
हरदोई ज़िले से बीजेपी विधायक श्याम प्रकाश ने तो फ़ेसबुक पर पोस्ट डालकर विधायकों से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए यूनियन बनाने तक ज़रूरत बता डाली थी.
इससे पहले भी बीजेपी के कई विधायक, सांसद और पदाधिकारी इस तरह की शिकायतें कर चुके थे. यही नहीं, अभी कुछ दिन पहले ही कोरोना संकट से निपटने के लिए मंत्रियों के साथ हुई मुख्यमंत्री की वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के दौरान भी कुछ मंत्रियों की नाराज़गी की चर्चाएं सार्वजनिक हुई थीं.

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क्यों नाराज़गी है विधायकों में?
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र कहते हैं, "दिसंबर में विधान सभा के भीतर विधायकों के धरने पर बैठने का मामला ठंडा नहीं पड़ा है बल्कि परिस्थितियों की वजह से दबा हुआ है. बीजेपी के दर्जनों विधायक ही नहीं बल्कि कई मंत्री तक इस बात से परेशान हैं कि उनकी अपनी ही पार्टी की सरकार में कोई सुनने वाला नहीं है. राठौर का मामला विधानसभा में धरने वाली घटना का ही विस्तार है जिसमें अभी कुछ और विधायक भी मुखर होंगे."
जानकारों का कहना है कि कोरोना संकट में जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरह से अकेले ही मोर्चा सँभाले हुए हैं, उसे लेकर भी कई मंत्रियों में नाराज़गी है.
कोरोना संकट के दौरान मुख्यमंत्री ने चुनिंदा मंत्रियों के साथ 17 अप्रैल को पहली बार बैठक की थी और 11 अधिकारियों की तरह 11 मंत्रियों का भी एक समूह बनाया था लेकिन इस संकट से निपटने के लिए जो कुछ भी फ़ैसले लिए जा रहे हैं और जो कुछ भी कार्रवाई हो रही है, वो सीधे मुख्यमंत्री दफ़्तर से ही हो रही है.
सुभाष मिश्र कहते हैं कि विधायकों को लग रहा है कि अब उनके पास कोई काम ही नहीं है और अगला चुनाव सामने है.
वो कहते हैं, "विधायक निधि को भी एक साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया है, जिससे विधायक लोग अपने क्षेत्रों में काम कराते थे. उनके दूसरे कोई काम सुने नहीं जा रहे हैं जिसकी वो अक़्सर शिकायत करते हैं. ब्यूरोक्रेसी इस समय काफ़ी हद तक हावी है."
बीजेपी में ऐसे कई विधायक हैं जो साल 2017 में दूसरी पार्टियों को छोड़कर बीजेपी में आए थे. उन्हें बीजेपी में आते ही टिकट मिला और ज़्यादातर चुनाव भी जीत गए.
पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं में इस बात को लेकर काफ़ी नाराज़गी रही लेकिन पार्टी की बड़ी जीत के आगे उनका विरोध अनसुना रह गया. लेकिन अब दूसरी पार्टियों से आए ये विधायक बीजेपी में अपनी अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं.
राकेश राठौर भी बहुजन समाज पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए थे. पार्टी के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उनकी समाजवादी पार्टी के नेताओं से इस समय नज़दीकियां बढ़ रही हैं और वो इस तरह के टेप ख़ुद वायरल कराकर पार्टी पर दबाव बनाना चाहते हैं. लेकिन यह भी सही है कि ऐसे आरोप लगाने वाले राठौर अकेले विधायक नहीं हैं.

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