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यूपी: एटा में एक ही परिवार के पाँच लोगों की मौत की गुत्थी सुलझी
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
एटा जनपद में शुक्रवार रात हुई एक ही परिवार के पांच लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पोस्टमार्टम की रिपोर्ट सामने आयी है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि चला है कि मृतकों को खाने में विषाक्त मिलाकर दिया गया था.
एटा के एसएसपी सुनील कुमार सिंह ने बीबीसी को बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ये बात साफ़ हुई है. उन्होंने बताया है कि परिवार की बहू दिव्या ने ही इस घटना को अंजाम दिया है.
सुनील कुमार सिंह ने बताया कि तीन डॉक्टरों के पैनल से वीडियो ग्राफी में पोस्ट मार्टम कराया गया है. पोस्ट मार्टम करने वाले डॉक्टरों के अनुसार दिव्या ने चार परिवारीजनों को पहले भोजन में विषाक्त पदार्थ दिया और सबसे बाद में इस महिला ने खुद विषाक्त पदार्थ खाकर और हाथ की नस काट ली.
बिसरा परीक्षण के लिए सुरक्षित रखकर एफएसएल लैब आगरा भेजा जा रहा है.
एसएसपी ने बताया कि बहू दिव्या के अलावा चार लोगों खाना खाया है, खाने में विषाक्त पदार्थ मिलाया गया है जो मेडिकल परीक्षण में प्रमाणित हुआ है. बहू दिव्या ने खाना नहीं खाया है. उसके पेट में हार्पिक और विषाक्त पदार्थ मिले हैं. उसने अपने हाथ की नस भी काटी है.
इस मामले में छह पुलिस टीमें बनाई गई हैं जो सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल के डिटेल,रंजिश आदि का पता लगाने में जुटी हैं. एसपी के मुताबिक, मौत के कारणों की पड़ताल की जा रही है.
एटा ज़िले के श्रृंगार नगर मोहल्ले में स्वास्थ्य विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी राजेश्वर पचौरी के परिवार के पांच सदस्य शनिवार सुबह उस वक़्त मृत पाए गए जब किसी अनहोनी की आशंका के बाद गैस कटर की मदद से घर का मुख्य दरवाज़ा तोड़ा गया.
मृतकों में राजेश्वर पचौरी के अलावा उनके बेटे की पत्नी दिव्या, दो छोटे बच्चे और दिव्या की एक बहन शामिल थीं. राजेश्वर पचौरी के बेटे दिवाकर रुड़की में नौकरी करते हैं और घटना के वक़्त वो रुड़की में ही थे.
बेटे दिवाकर ने किसी भी प्रकार की रंजिश होने की बात नहीं कही है.
एसएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि घर के भीतर किसी के घुसने के निशान नहीं मिले हैं और मुख्य द्वार के अलावा पूरे घर में ऐसा कोई रास्ता नहीं है जिससे आसानी से प्रवेश किया जा सके.
एसपी ने बताया कि घर में सल्फ़ास की गोलियां और हार्पिक मिले हैं जिनका घर के सभी लोगों को मारने में ज़हर के तौर पर इस्तेमाल किया गया है. हालांकि सभी मृतकों के शरीर और गले पर भी घाव के निशाने पाए गए हैं लेकिन पुलिस का कहना है कि किसी को भी चोट पहुंचाकर नहीं मारा गया है.
पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह कहते हैं, "सभी के शरीर पर महिला के हाथ और नाखून के निशान हैं लेकिन इतने गंभीर नहीं हैं कि इससे किसी की मौत हो सके. दरअसल, वो आश्वस्त करना चाहती थी कि सभी लोग मर गए हैं या नहीं."
हालांकि आस-पड़ोस के लोग और परिजन भी इस बात पर यकीन नहीं कर रहे हैं कि दिव्या ने घर के सभी लोगों को ज़हर दिया होगा.
राजेश्वर पचौरी के एक पड़ोसी बताते हैं कि घर में किसी तरह का कोई पारिवारिक कलह था, इसकी किसी को जानकारी नहीं है. पड़ोसियों के मुताबिक, घर में सभी लोगों के मरने से पहले घर की जो स्थिति थी, उसे देखकर यह अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता कि कुछ ही देर में यहां इतनी बड़ी घटना होने वाली है. बच्चों के पास खिलौने रखे हैं तो किताबें भी इस हाल में मिली हैं जैसे कुछ ही देर पहले किसी ने पढ़कर रखा होगा.
घटना की सूचना के बाद देर शाम रुड़की से एटा पहुंचे दिवाकर पचौरी घटना से स्तब्ध थे. मीडिया कर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा, "दिन में पिताजी से बात हुई थी और शाम को वीडियो कॉलिंग के ज़रिए पत्नी और बच्चों से भी बात की थी."
दिवाकर पचौरी पिछले क़रीब दस साल से रुड़की की एक दवा कंपनी में काम करते हैं और लॉकडाउन से पहले घर आए थे. उन्होंने बताया कि घर वालों से रोज़ सुबह-शाम बात होती थी. पड़ोस में रहने वाले राजेश्वर पचौरी के भाई रामेश्वर पचौरी बताते हैं कि शुक्रवार की शाम को वो भी यहां आए थे और सब कुछ सामान्य था.
लॉकडाउन के दौरान एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया. क़ानून-व्यवस्था के मामले में विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया.
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू का कहना था, "एटा में एक ब्राह्मण परिवार के पांच लोगों की हत्या से पूरा प्रदेश स्तब्ध है. प्रदेश में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं. मुखिया बस अपनी पीठ थपथपा रहे हैं. इस लॉकडाउन में हर चीज़ें लॉक हैं, लेकिन हत्याएं लॉक नहीं हुई हैं. प्रदेश की क़ानून व्यवस्था को लेकर सरकार श्वेत पत्र जारी करे."
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