कोरोना वायरस: बंगाल में बढ़ रहा है सामुदायिक संक्रमण का खतरा?

    • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
    • पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए

क्या पश्चिम बंगाल कोरोना बम पर बैठा है? राजधानी कोलकाता और हावड़ा में कोरोना संक्रमण की स्थिति चिंताजनक होने की वजह से यह सवाल उठने लगा है.

यह दोनों जगहें रेड ज़ोन में शामिल हैं और राज्य में कोरोना संक्रमण के कुल मामलों में से 90 फ़ीसदी इन दोनों इलाक़ों से ही सामने आए हैं. ख़ुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने माना है कि अगर लॉकडाउन लागू करने में सख़्ती नही बरती गई तो इन इलाक़ों में हालात बेक़ाबू होकर सामुदायिक संक्रमण फैलने का अंदेशा है.

ममता बनर्जी के निर्देश पर इन दोनों ज़िलों के संवेदनशील इलाक़ों को सील कर दिया है और लॉकडाउन लागू करने के लिए रैपिड एक्शन फ़ोर्स (रैफ़) के सशस्त्र जवानों को सड़क पर उतार दिया गया है. इसके साथ ही ड्रोन के ज़रिए निगरानी बढ़ा दी गई है. ममता ने इन दोनों इलाक़ों को 14 दिनों के भीतर रेड से आरेंज ज़ोन में लाने का लक्ष्य तय किया है. लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों को तितर-बितर करने के लिए रविवार को पुलिस के जवानों को हावड़ा में लाठीचार्ज भी करना पड़ा.

इस बीच, राज्यपाल जगदीप धनखड़ और भाजपा ने राज्य सरकार पर इस मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. दूसरी ओर, कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी इस बारे में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार को कोरोना के मरीज़ों की जाँच में तेज़ी लाने और इस बारे में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि वह नियमित रूप से इस बात की निगरानी करेगी कि राज्य सरकार कोविड-19 से लड़ाई कैसे लड़ रही है.

कोरोना से उपजी परिस्थिति और लॉकडाउन की समीक्षा के लिए शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में ममता ने कहा, "हावड़ा में हालत बेहद ख़राब है. अगर एक परिवार के ज़्यादातर लोगों में संक्रमण फैलता है तो इसके सामुदायिक संक्रमण में बदलने का ख़तरा है."

उन्होंने हावड़ा के बाज़ारों में भीड-भाड़ पर अंकुश लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराने के लिए सशस्त्र बल के जवानों को सड़कों पर उतारने का निर्देश दिया.

मुख्यमंत्री ने हावड़ा और कोलकाता के लोगों से भी भीड़भाड़ वाले इलाक़ों से दूर रहने और लॉकडाउन का सख़्ती से पालन करने का अनुरोध किया. मुख्यमंत्री ने पुलिस वालों को संवेदनशील इलाक़ों में सख़्ती से लॉकडाउन लागू कराने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसी भी दुकान पर एक साथ पाँच से ज़्यादा लोगों की भीड़ नहीं हो.

ममता बनर्जी ने बैठक में कहा, 'मैं हावड़ा के लोगों से अनुरोध करती हूं कि वे घरों में ही रहें. वरना, हम कोरोना वायरस के संक्रमण को रोक नहीं सकेंगे. इलाक़े की स्थिति चिंताजनक है. फ़िलहाल इस संक्रमण का प्रसार परिवार तक ही सीमित है. लेकिन सामुदायिक स्तर पर फैलने की स्थिति में समस्या बेहद जटिल हो जाएगी."

दरअसल, हावड़ा में संक्रमण बढ़ने के साथ ही अब सरकार के उस फ़ैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं जिनमें फूलों के कारोबार को लॉकडाउन से छूट दी गई थी.

हुगली नदी के दोनों किनारों पर लगने वाले इस बाज़ार में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ते साफ़ देखी जा सकती हैं. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब पुलिसवाले इन बाजारों में सख़्ती बरतने लगे हैं. हावड़ा के रहने वाले सौमेन गुहा बताते हैं, "पहले तो मानवीय पहलू के नाम पर इन इलाक़ों में ढिलाई बरती गई. अब हालात बेक़ाबू होने के बाद सरकार सख़्ती बरत रही है. अगर पहले ही ऐसे उपाय किए गए होते तो आज हालात इतने नहीं बिगड़ते."

वैसे, ममता शुरुआत से ही मानवीय चेहरे के साथ लॉकडाउन लागू करने की वकालत करती रही थीं. उन्होंने पुलिस को भी ज्यादती नहीं करने का निर्देश दिया था. लेकिन इस वजह से धीरे-धीरे संक्रमण बढ़ने के बाद अब उनका रुख़ बदला है वह कहती हैं, "लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी." ममता के रुख़ में इस बदलाव के बाद ही पुलिस ने इस आरोप में चौबीस घंटे के दौरान एक हज़ार से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया है.

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भेजे दो-दो पत्रों में राज्य में लॉकडाउन में ढिलाई पर गहरी चिंता जताते हुए इसे सख़्ती से लागू करने का निर्देश दिया था. पत्र में इस बात पर आपत्ति जताई गई थी कि राज्य में ग़ैर-ज़रूरी वस्तुओं की दुकानें खोलने की इजाज़त दी गई है और पुलिस ने धार्मिक जमावड़े की भी इजाज़त दी है. लेकिन तब ममता ने इसे राजनीति क़रार दिया था.

इसके बाद राज्यपाल धनखड़ ने भी लॉकडाउन का सख़्ती से पालन नहीं होने पर नाराज़गी जताते हुए इसके लिए केंद्रीय बलों को बंगाल में तैनात करने का सुझाव दिया था. लेकिन ममता बनर्जी ने इस पर नाराज़गी जताई थी. उन्होंने राज्यपाल का नाम लिए बिना कहा था कि कुछ लोग बंगाल में लॉकडाउन को लागू करने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मांग कर रहे हैं. लेकिन यहां इसकी क्या ज़रूरत है? धनखड़ ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा था कि कोरोना की महामारी से निपटने के लिए लॉकडाउन के प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करना होगा. पुलिस और प्रपसासन के जो लोग लॉकडाउन को ठीक से लागू नहीं कर सके हैं उसको बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए. लेकिन मुख्यमंत्री ने उनको संकट के इस दौर में राजनीति नहीं करने की सलाह दी थी.

इस बीच, पश्चिम बंगाल में कोविड-19 महामारी को लेकर बने हालात के सिलसिले में दाख़िल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टी. बी. एन. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को इंडियन कौंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के जांच प्रोटोकॉल और विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए नमूने लेने और जांच की दर तेज करने का निर्देश देते हुए इस बारे में हलफ़नामा दायर करने को कहा है. खंडपीठ ने सरकार चिकित्सा कर्मचारियों और डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है.

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से होने वाली मौतों के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने इस मामले में तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भूमिका की तुलना नंदीग्राम आंदोलन के दौरान माकपा कार्यकर्ताओं की भूमिका के साथ की है. उनका कहना है, "आंकड़े छिपाने से परिस्थिति नहीं बदलती. यह मानवता के ख़िलाफ़ गंभीर अपराध है." लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उसके तमाम आरोपों को निराधार बताया है.

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