कोरोना टेस्ट सबका मुफ़्त में नहीं होगा, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को बदला

    • Author, सुचित्र मोहंती
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

सुप्रीम कोर्ट ने आठ अप्रैल के अपने पूर्व आदेश को संशोधित करते हुए कहा है कि कोविड-19 के मुफ्त टेस्ट की सुविधा उन्हीं लोगों को मिलेगी जो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के दायरे में आते होंगे.

यानी यह सुविधा केवल ईडब्ल्यूएस और बीपीएल वर्ग के लोगों को मिल पाएगी.

इसके लिए इन लोगों को अपना आयुष पहचान पत्र दिखाना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बाक़ी लोगों को टेस्ट के लिए पैसा देना होगा.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आठ अप्रैल को अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि चाहे वो सरकारी लैब में हो या सरकार द्वारा मंजूरी प्राप्त प्राइवेट लैब में हो, हर शख़्स का कोविड-19 संक्रमण टेस्ट मुफ्त होगा.

लेकिन सोमवार को अपने पहले के आदेश को संशोधित किया है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त गरीब तबकों के लिए भी यह मान्य होगा और उनका सरकार मुफ्त में टेस्ट मुहैया कराएगी.

सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि भारत सरकार, परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय को यह तय करना है कि समाज के कुछ दूसरे कमजोर वर्ग यानी असंगठित क्षेत्र के निम्न आय वाले मजदूर, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का लाभ लेने वालों को मुफ्त टेस्टिंग की सुविधा देती है या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अलावा मुफ्त में टेस्ट वाले वर्गों के लिए उपयुक्त गाइडलाइंस एक सप्ताह के अंदर जारी करे.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि कोविड-19 की जांच करने वाले प्राइवेट लैब इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च द्वारा तय रकम का भुगतान उन लोगों से ले सकते हैं जो भुगतान करने में सक्षम हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को इसकी व्यवस्था करनी होगी कि प्राइवेट लैब को मुफ़्त किए टेस्ट का भुगतान हो जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि इसके बारे में केंद्र सरकार को समुचित प्रचार भी करना होगा ताकि इसके दायरे में आने लोगों को इसका लाभ मिल सके.

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