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कोरोना: लॉकडाउन में क्या खाना नहीं मिलने से यूपी में महिला ने 5 बच्चों को नदी में फेंका? - फ़ैक्ट चेक
- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी
रविवार को एक ख़बर अचानक ट्विटर पर ख़ूब शेयर की जाने लगी. आम लोगों के साथ-साथ कई बड़े पत्रकार, नेता, समाजिक कार्यकर्ताओं ने इस ख़बर को शेयर किया.
ख़बर थी उत्तर प्रदेश के भदोई ज़िले की. समाचार एजेंसी आईएएनएस के हवाले से आउटलुक में छपी रिपोर्ट के मुताबिक- ' दिहाड़ी मज़दूरी करने वाली एक महिला लॉकडाउन के कारण बच्चों को खाना नहीं खिला सकी तो उसने अपने पांच बच्चों को नदी में फेंक दिया. ''
इस रिपोर्ट को कई बड़े पत्रकारों और राजनीतिक पार्टियों ने ट्विटर पर शेयर किया. हालांकि वरिष्ठ पत्रकार राणा अयूब और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आईपी सिंह ने अब अपना ट्वीट डिलीट कर लिया.
100 शब्दों की इस रिपोर्ट में जांच कर रही पुलिस और पीड़िता की ओर से कहीं भी इस दावे का ज़िक्र नहीं है कि लॉकडाउन और भूख के कारण बच्चों को नदी में फेंका गया.
ये खब़र पढ़ने में भी अपनी हेडलाइन से मैच नहीं खाती और जानकारी अधूरी सी लगती है.
इसके बावजूद इसे सोशल मीडिया पर कई बड़े पत्रकारों और नेताओं ने शेयर किया.
जानी-मानी समाजिक कार्यकर्ता और कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्स-लेनिन) की नेता कविता कृष्णन ने इस घटना का ज़िक्र करते हुए ट्विटर पर एक वीडियो भी शेयर किया.
इस ख़बर से जुड़ी पूरी जानकारी के लिए बीबीसी ने भदोई के एसपी राम बदन सिंह से बात की.
उन्होंने बताया, ''शनिवार की रात डेढ़-दो बजे के लगभग ये घटना हुई. रविवार सुबह 9 बजे हमें पता चला की मंजूदेवी ने अपने बच्चे को नदी में फेंक दिए. लेकिन ये भूख या लॉकडाउन के असर का मामला नहीं है. महिला का पति शराब पीता था और भी कई तरह के नशे करता था. जिससे दोनों में लड़ाई होती थी. महिला ने इस लड़ाई से तंग आ कर अपने बच्चों को नदी में फेंका और ख़ुद भी कूद गई. हालांकि उसे तैरना आता था तो वो बच गई.''
इस वक़्त महिला को पुलिस हिरासत में ले लिया गया है. साथ ही भदोई पुलिस ने एक रसोई की दो तस्वीरें शेयर करते हुए ये दावा भी किया है कि मंजू देवी के घर में खाने की कमी नहीं थी.
चूंकि महिला पुलिस हिरासत में थी इसलिए उससे बात करना हमारे लिए संभव नहीं था. ऐसे में हमने उसके परिवार वालों से संपर्क किया.
महिला के देवर 28 साल के पुनीत यादव ने हमें बताया, '' घर में खाने-पीने की समस्या नहीं है. महिला का पति सोनार की दुकान पर काम करता है. बड़े भाई सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं. हमारे घर खाना न मिलने से कोई मर जाए , नहीं हो सकता. पता नहीं आधी रात को क्या हुआ. चार बच्चों के शव मिल गए हैं और एक शव की तलाश अब तक जारी है.''
इन पांचों बच्चों की उम्र तीन साल से लेकर 10 साल तक है.
हालांकि जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने सोमवार को एक ट्वीट करके कहा है कि भदोई पुलिस के मुताबिक ये घटना खाना ना मिलने की वजह से नहीं हुई है. इस घटना की आगे जांच होनी चाहिए.
साथ ही कविता कृष्णन ने भी भदोई पुलिस से इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है.
बीबीसी ने इस घटना में शामिल पीड़ित परिवार और पुलिस अधिकारियों से बात करके ये पाया कि दावा ग़लत है. ये घटना सही है लेकिन ना तो महिला दिहाड़ी मज़दूर है और ना ही लॉकडाउन में खाना न मिलने के कारण उसने बच्चों को नदी में फेंका है. इस घटना को ग़लत संदर्भ के साथ कई जाने-माने लोग शेयर कर रहे हैं.
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