कोरोना: इंदौर में भीड़ के हमले के शिकार डॉक्टरों के हौसले पस्त नहीं

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- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, भोपाल से
मध्य प्रदेश की व्यवसायिक राजधानी माने जाने वाले इंदौर में की चर्चा पूरे भारत में हो रही है.
यहां कोरोना के मरीज़ तो बड़ी संख्या में मिल ही रहे हैं लेकिन शहर के टाटपट्टी बाखल इलाक़े में कोरोना वायरस संक्रमित लोगों की जांच के लिए पहुंचे डॉक्टरों की टीम पर पथराव किया गया.
डॉक्टरों की टीम में शामिल ज़ाकिया सैयद ने बीबीसी को बताया, "हम तीन-चार दिन से इस इलाक़े में जा रहे थे लेकिन हमने ऐसा महसूस नहीं किया था कि हमारे साथ कुछ ऐसा होगा. उस दिन जो मामला सामने आया वो अचानक था. हमें नहीं पता कि क्या हुआ लेकिन वहां मौजूद भीड़ अचानक हमलावर हो गई."
डॉक्टर ज़ाकिया का कहना है कि दूसरे दिन लोग अपने मुहल्ले कि किए पर शर्मिंदा ज़रूर थे.
उन्होंने बताया, "हम उसी इलाक़े में हैं और लोग अब स्क्रीनिंग में पूरी तरह से मदद कर रहे है. मुझे लगता है कि इस तरह की हरक़त करने वाले मुठ्ठी भर लोग होते है लेकिन पूरा इलाक़ा बदनाम होता है."

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बीते बुधवार ज़किया सैयद और डॉक्टर तृप्ति कटारिया के साथ दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एक आशा वर्कर समेत कुल पांच महिलाओं को निशाना बनाया गया था.
जिस इलाक़े में ये डॉक्टर काम कर रहे है वो काफ़ी बड़ा है. बुधवार को इन्हें ख़बर मिली कि कोरोना पॉज़िटिव व्यक्ति के संपर्क में आया एक अन्य व्यक्ति टाटपट्टी बाखल इलाक़े में है.
यहां पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम को वह शख़्स तो नहीं मिला लेकिन उसकी मां मिलीं. डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी उसकी मां से बात ही कर रहे थे कि वहां मौजूद लोगों ने टीम पर पथराव शुरू कर दिया.
डॉक्टरों का कहना है कि उनके पैरों में पत्थर से चोटें आई हैं. हालांकि वो चोटें इतनी नहीं हैं कि साफ़-साफ़ नज़र आएं.
डाक्टर तृप्ति कटारिया कहती हैं, "हम वहां उन्हें ही कोरोना जैसी बीमारी से बचाने के लिये गए थे लेकिन शायद लोग हमें सुनने के लिये ही तैयार नहीं थे और उन्होंने हमें ही निशाना बना दिया."

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मध्य प्रदेश का इंदौर इस वक़्त कोरोना का हॉटस्पॉट बना हुआ है और यहां पर अब तक कोरोना के 89 मरीज़ मिल चुके हैं. यही वजह है कि राज्य की सारी मशीनरी इस शहर में कोरोना को क़ाबू करने के लिये लगाई जा रही है.
इंदौर में लगातार वायरल हो रहे मैसेज क्या इसकी वजह बने इस पर डॉक्टर ज़किया सैयद ने कहा कि उन्हें इसके बारे में कुछ भी जानकारी नही है.
वही उन्होंने यह बात ज़रूर दोहराई की वो इस घटना से बिल्कुल भी डरी नहीं है और न ही उनके हौसले कम हुए हैं.
डॉक्टर ज़किया ने कहा, "हम लोगों को यही बताना चाहते है कि आप किसी भी धर्म या इलाक़े से ताल्लुक रखते हों लेकिन इस मुश्किल वक़्त में यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप उन डॉक्टरों की मदद करें जो आपके लिए खड़े हो रहे हैं. अगर आप सहयोग नहीं करते है तो डॉक्टरों का इसमें कुछ ज़्यादा नुकसान नहीं होगा बल्कि आप का ही नुकसान होगा."
डॉक्टर तृप्ति का भी कुछ ऐसा ही मानना है. उन्होंने कहा, "हम जो सड़कों पर निकल रहे हैं वो अपनी भलाई के लिये नहीं बल्कि समाज की भलाई के लिए निकल रहे है. इसलिये यह ज़रूरी है कि लोग हमारी मदद करें. तभी वो इस बीमारी से लड़ सकते हैं."

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इंदौर में यह बात भी फैली हुई है कि कुछ ऐसे संदेश शहर में सोशल मीडिया पर वायरल हुए जिसकी वजह से लोगों में यह अफ़वाह फैली कि कुछ इलाक़ों में कोरोना वाले इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं. लेकिन इसके सबूत नहीं मिले हैं.
पुलिस ने इंदौर में एक शख़्स को गिरफ़्तार किया है. शहर के खजराना इलाक़े के रहने वाले आरिफ़ के खिलाफ़ भड़काऊ मैसेज वायरल करने के आरोप में मामला दर्ज किया है. आरिफ़ के साथ तीन अन्य लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है.
इंदौर में कोविड-19 मेडिकल टीम के अधिकारी डॉक्टर आनंद राय का मानना है कि शहर में जो लगातार मरीज़ बढ़ रहे है, उसके पीछे वहां बड़े पैमाने पर होने वाले टेस्ट हैं.
उन्होंने कहा, "भोपाल जैसे शहर में आईएएस को कोरोना हो सकता है जिसका किसी से कोई संपर्क नहीं था. तो फिर दूसरे इलाकों में रह रहे इन लोगों के बारे में आप सोच सकते हैं."
आनंद राय ने बताया, " अगर टेस्ट किये जाते हैं तो दूसरे इलाक़ों में भी इस तरह के मामले मिलेंगे. अभी तक दिक्क़त यही है कि टेस्ट ही कम किए जा रहे हैं."
उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर जैसे शहर में प्रशासन को चाहिए कि वह इस मेडिकल इमरजेंसी के वक़्त मेडिकल क्षेत्र के लोगों को आगे करें तभी हालात को संभाला जा सकेगा.

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