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करोना वायरस के कहर की वजह से कितनी नौकरियां दांव पर
- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर में दो लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. भारत में संक्रमण के मामले बढ़कर 223 हो गए हैं और चार की मौत हो चुकी है.
इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन (आईएलओ) का कहना है, "ये सिर्फ़ एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट नहीं रहा, बल्कि ये एक बड़ा लेबर मार्केट और आर्थिक संकट भी बन गया है जो लोगों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा."
(आईएलओ) की मानें तो कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में ढाई करोड़ नौकरियां ख़तरे में हैं.
संस्था के मुताबिक़ अंडर एम्प्लॉयमेंट भी बड़े स्तर पर बढ़ सकता है, क्योंकि कोरोना की वजह से काम के घंटे कम किए जाएंगे और वेतन में कटौती होगी.
विकासशील देशों में स्वरोज़गार अक्सर इन बदलावों को कम करने का काम करते हैं, लेकिन लोगों (सर्विस प्रोवाइडर) और सामान की आवाजाही पर भी पाबंदी की वजह से इस बार वो भी मदद नहीं कर पाएगा.
भारत की बात करें तो यहां भी एविएशन, ट्रैवल, होटल, रिटेल जैसे तमाम सेक्टरों पर कोरोना की वजह से असर पड़ा है.
ट्रैवेल सेक्टर पर सबसे ज़्यादा असर
दुनिया भर की सरकारें कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए यात्रा प्रतिबंध लगा रही हैं. 100 से ज़्यादा देशों में कोरोना के चलते यात्रा प्रतिबंध लगाए गए हैं.
जिससे ट्रैवल इंडस्ट्री को बहुत नुक़सान हो रहा है. क्योंकि एयरलाइंस को उड़ाने रद्द करनी पड़ रही हैं और लोग अपने बिज़नेस ट्रिप और हॉलीडे कैंसल कर रहे हैं.
भारत में फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, ग्रीस, इटली, स्पेन, आइसलैंड, हंगरी, पोलैंड, आयरलैंड, फिनलैंड ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गेरिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, नॉर्वे, नीदरलैंड्स, पुर्तगाल, रोमानिया समेत 36 देशों से किसी भी यात्री के आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. वहीं भारतीयों को भी कोरोना वायरस प्रभावित देशों में ना जाने की सख्त हिदायत दी गई है.
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हॉस्पिटैलिटी सेक्टर
वायरस के डर से और सरकार की एडवाइज़री को देखते हुए लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं. जिससे होटल और रेस्तरां का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है. राजधानी दिल्ली के साथ-साथ कई राज्यों में रेस्तरां बंद कर दिया गए हैं.
इन वजहों से जो भी नुक़सान हो रहा है, उसका सबसे ज़्यादा असर वहां काम करने वाले लोगों पर पड़ रहा है.
फ़ेडरेशन फ़ॉर एसोसिएशन इन इंडियन टूरिज़म एंड हॉस्पिटैलिटी के कंसल्टिंग सीईओ आशीष गुप्ता कहते हैं, "कोरोना से बचने के लिए लोगों को ट्रैवल नहीं करने के लिए कहा गया है. जिससे क़रीब पांच लाख करोड़ रुपये की वैल्यू वाली इस इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ सकता है."
"टूरिज़्म इंडस्ट्री से किसी ना किसी तरीक़े से क़रीब साढ़े पांच करोड़ लोग जुड़े हुए हैं, इनमें ट्रैवल एजेंट, टूर ऑपरेटर, होटल, टूरिस्ट टैक्सी, टूरिस्ट गाइड, हैंडलूम शॉप, रेस्तरां में काम करने वाले लोग शामिल हैं. ऐसा ही चलता रहा तो 60 से 70 प्रतिशत लोगों की नौकरी जा सकती है."
आशीष गुप्ता इंडस्ट्री को इस संकट से निकालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हैं, "सरकार से हमारी अपील है कि जिन लोगों को हर महीने ईएमआई देनी होती है, उसे 12 महीने के लिए आगे बढ़ा दें. जिससे संभलने के लिए 12 महीने का समय मिल जाए. लोगों को बैंक से बिना इंटरेस्ट के वर्किंग कैपिटल लेने दें."
"इनकम टैक्स, जीएसटी, बार की एक्साइज़ परमिशन की फीस, लाइसेंस रिन्यू की फीस आदि को भी 12 महीने के लिए बढ़ा दें. सरकार एक फंड बनाए. ताकि जिन लोगों की नौकरी जाएगी. उन्हें हालात ठीक होने तक डायरेक्ट पैसा मिले. जीएसटी हॉलीडे घोषित कर दिया जाए. इससे जब भी हालात ठीक होने लगेंगे तो जीएसटी फ्री होने की वजह से लोग ज़्यादा घूमने निकलेंगे."
एविएशन सेक्टर
पहले से मुश्किल में चल रहे एविएशन सेक्टर पर कोरोना ने दोहरी मार की है. सेंटर फॉर एविएशन यानी सीएपीए ने हाल में जारी अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि एयर इंडिया समेत भारत की तमाम एयरलाइन को जनवरी-मार्च के क्वार्टर में 600 मिलियन डॉलर तक का नुक़सान हो सकता है.
इंडिगो एयरलाइन ने गुरुवार को घोषणा की कि वो अपने वरिष्ठ कर्मचारियों के वेतन में कटौती करेगा. इंडिगो के सीईओ रोनोजॉय दत्ता ने कहा है कि वो ख़ुद अपना वेतन 25 प्रतिशत कम लेंगे और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट 20 प्रतिशत अपना वेतन कम लेंगें. वहीं वाइस प्रेसिडेंट और कॉकपिट क्रू अपना वेतन 15 प्रतिशत कम लेगें.
कटौती की घोषणा करते हुए दत्ता ने कहा कि हमें ध्यान रखना होगा कि हमारा पैसा ख़त्म ना हो जाए. दअसल सीएपीए के मुताबिक़ अगर सरकार एविएशन सेक्टर को बचाने के लिए ज़रूरी क़दम नहीं उठाती तो कई भारतीय एयरलाइन को कैश की कमी की वजह से मई या जून तक ऑपरेशन बंद करना पड़ेगा.
गो एयर ने अपने विदेशी पायलटों के कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया हैं. गो एयर ने घोषणा की कि वो अपने इंटरनेशनल ऑपरेशन को रोक रहा है और रोटोशन के आधार पर अपने स्टाफ को लीव विदाउट पे प्रोग्राम ऑफर कर रहा है.
असमानता की खाई बढ़ेगी
आईएलओ के मुताबिक़ कुछ समूहों पर नौकरियां जाने का बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा, जिससे असमानता की खाई और बढ़ेगी. इनमें वो लोग शामिल होंगे जो पहले से कम सुरक्षित और कम वेतन पर काम करते हैं. इससे वर्किंग पॉवर्टी बढ़ने की संभावना है.
इसी आशंका को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देश के नाम संबोधन में लोगों से अपील की.
उन्होंने कहा, "संकट के इस समय में मेरे देश के व्यापारी जगत, उच्च आय वर्ग से भी आग्रह है कि अगर संभव है तो आप जिन-जिन लोगों से सेवाएं लेते हैं, उनके आर्थिक हितों का ध्यान रखें. हो सकता है आने वाले कुछ दिनों में, ये लोग दफ्तर न आ पाएं, आपके घर न आ पाएं. ऐसे में उनका वेतन न काटें, पूरी मानवीयता के साथ, संवेदनशीलता के साथ फ़ैसला लें. हमेशा याद रखिएगा, उन्हें भी अपना परिवार चलाना है, अपने परिवार को बीमारी से बचाना है."
रोज़गार कम होगा तो लोगों के पास पैसा नहीं होगा. इससे लोग ज़रूरत का सामना नहीं ख़रीद पाएंगे. जिससे सामान और सर्विसेस की खपत कम हो जाएगी. इससे सीधे तौर पर कारोबार पर तो असर पड़ेगा ही, साथ ही अर्थव्यवस्था को भी भारी नुक़सान होने की संभावना है.
अमरीकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी 'फिच रेटिंग' के मुताबिक़ कोरोना वायरस का संकट वैश्विक जीडीपी को नुक़सान पहुंचा रहा है. फिच रेटिंग्स ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान को भी 5.6 प्रतिशत से घटाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया.
निवेश और निर्यात
रेटिंग एजेंसी का कहना है कि कोरोना वायरस के प्रकोप से निवेश और निर्यात प्रभावित होगा.
हालांकि इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइज़ेशन का कहना है कि अगर 2008-09 के वैश्विक आर्थिक संकट की तरह ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पॉलिसी बनाई जाए तो वैश्विक बेरोज़गारी के असर को कम किया जा सकता है.
संस्था के मुताबिक़ कई तरह के क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है - जिसमें सामाजिक सुरक्षा बढ़ाना, शॉर्ट-टाइम वर्क, पेड लीव और दूसरी सबसिडी देना, साथी ही सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों को आर्थिक सहयोग और टैक्स में राहत देना शामिल है.
इसके अलावा संस्था ने कुछ ख़ास सेक्टरों को आर्थिक समर्थन देने की सलाह भी दी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि कोरोना महामारी से उपज रही आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, वित्त मंत्री के नेतृत्व में सरकार ने एक कोविड-19 इकोनॉमिक रेस्पॉन्स टास्क फ़ोर्स के गठन का फैसला किया है.
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