कमलनाथ के बाद क्या शिवराज सिंह चौहान बनेंगे मुख्यमंत्री?

मध्य प्रदेश में सियासी उठापठक के बीच भारतीय जनता पार्टी के नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा तेज़ हो गई है.

मध्य प्रदेश बीजेपी के कुछ नेता केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश में मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा का भी नाम ले रहे हैं. हालांकि शिवराज सिंह चौहान को ही मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है. मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस्तीफ़े के बाद जल्द ही बीजेपी विधायक दल की बैठक हो सकती है.

बीजेपी में निर्णायक पदों पर बैठे लोगों ने अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है कि प्रदेश की कमान किस नेता के हाथ में दी जाने वाली है.

पार्टी के सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है, "चौहान एक लोकप्रिय चेहरा हैं, शांत मिजाज़ शख़्स हैं और संघ से उनके रिश्ते मज़बूत हैं. ये सब देखते हुए शिवराज सबसे मज़बूत दावेदार हैं और पार्टी में उन्हें किसी से चुनौती मिलना मुश्किल है."

अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले 61 वर्षीय शिवराज सिंह चौहान 13 सालों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं. साल 2018 में उनके सत्ता से बाहर होने के बाद, केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया और राज्य में प्रमुख संगठनात्मक ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ नेताओं की एक नई टीम भी दी.

पिछले कुछ वर्षों में भाजपा के कई राज्यों में सत्ता गंवाने के साथ, पार्टी के भीतर एक विचार बना है कि पार्टी राज्यों में अपने लोकप्रिय नेताओं को बढ़ावा देगी ताकि पार्टी को केवल प्रधानमंत्री मोदी के करिश्मे पर निर्भर ना होना पड़े.

क़रीब 15 महीने तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद शुक्रवार को कमलनाथ ने शीर्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

कमलनाथ के इस्तीफ़े की घोषणा

मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए शुक्रवार बेहद अहम दिन साबित हुआ. मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लगभग 15 महीनों की सरकार चलाने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

कमलनाथ ने बीजेपी पर उनके ख़िलाफ़ साजिश करने का आरोप लगाया और कहा, "हमारे 22 विधायकों को प्रलोभन दे कर उन्हें बंधक बनाया गया है. करोड़ों रूपये खर्च कर प्रलोभन का खेल खेला गया है. भाजपा ने ऐसा कर लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की है."

उन्होंने कहा, "मुझे जनता ने पांच साल का मैन्डेट दिया था. इससे पहले बीजेपी को प्रदेश में 15 साल दिए गए थे काम करने के लिए. मैंने तय किया है कि राज्यपाल के पास अपना इस्तीफ़े भेज दूंगा."

कमलनाथ शुक्रवार को राज्यपाल लालजी टंडन को अपना इस्तीफ़ा सौंप देंगे. इससे पहले भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ से शुक्रवार शाम पांच बजे तक फ़्लोर टेस्ट के ज़रिए बहुमत साबित करने का आदेश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये बाग़ी 16 विधायकों पर ही निर्भर करेगा कि कमलनाथ सरकार के पास बहुमत है या नहीं. कमलनाथ से सुबह 11 बजे विधायक दल की बैठक बुलाई थी और दोपहर 12 बजे एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.

पहले से थी इस्तीफ़े की अटकलें

बीते कई दिनों से मध्य प्रदेश लगातार सुर्खियों में रहा है जिसके बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही थी कि कमलनाथ अपने इस्तीफ़े का ऐलान करेंगे. इस बारे में जब राज्य के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ़्रेंस का इंतज़ार करना बेहतर होगा.

कांग्रेस मंत्री मंत्री पीसी शर्मा ने विधायकों की ख़रीद फोख्त को लेकर चल रही चर्चा के बारे में कहा कि वो 'हॉर्स ट्रेडिंग' नहीं बल्कि 'एलिफ़ेंट ट्रेडिंग' कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, "हम बहुमत साबित करें. हमारे पास 'फार्मूला 5' है. 12 बजे की प्रेस कॉफ़्रेंस में सब साफ़ हो जाएगा. यह भी बताया जाएगा कि छह विधायकों को कैसे बंधक बनाया गया."

12 बजे निर्धारित प्रेस कॉन्फ़्रेंस से पहले मध्य प्रदेश के विधानसभा स्पीकर ने कहा कि उन्होंने दुखी मन से विधायकों का इस्तीफ़ा स्वीकार किया और उनके पास ऐसा करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था. स्पीकर ने अब तक 23 विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार किए हैं.

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