मध्य प्रदेश संकट: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- विधायकों को बंधक बनाकर नहीं रखा जा सकता

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के बहुमत परीक्षण की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है.

सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई. बीजेपी ने याचिका दायर की है कि कोर्ट कमलनाथ सरकार को तत्काल बहुमत साबित करने का निर्देश दे.

इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधायकों को बंधक बनाकर नहीं रखा जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट के सामने विधायकों से मिलने का प्रस्ताव रखा गया था जिसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया. इसके साथ ही अदालत ने विधायकों से मिलने के लिए रजिस्टार जनरल को भी भेजने से मना कर दिया. इस मामले की सुनवाई कल यानी गुरुवार को भी जारी रहेगी.

बीजेपी का कहना है कि कमलनाथ सरकार के साथ पर्याप्त विधायक नहीं हैं. दूसरी तरफ़ कांग्रेस ने कोर्ट में दावा कि बीजेपी मध्य प्रदेश की सत्ता हथियाने के लिए लोकतंत्र को बर्बाद कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की तरफ़ से सीनियर वकील दुष्यंत दवे ने दलील दी. दुष्यंत दवे ने कोर्ट में आरोप लगाया कि बीजेपी ने कांग्रेस के विधायकों का अपहरण कर लिया है और 15 महीने पुरानी सरकार को अस्थिर करने की साज़िश कर रही है.

कांग्रेस चाहती है कि जिन छह विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार कर लिए गए हैं वहां पहले उप-चुनाव हो जाए और उप-चुनाव संपन्न होने तक बहुमत परीक्षण को टाल दिया जाए.

दुष्यंत दवे ने कोर्ट में प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के निर्देश को असंवैधानिक बताया. दुष्यंत दवे ने कहा कि राज्यपाल का पूरे मामले में जो रवैया रहा है वो लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है.

दुष्यंत दवे ने पूछा कि विधायकों को अगवा कर कहां रखा गया है? बीजेपी की तरफ़ से मोदी सरकार में अटॉर्नी जनरल रहे मुकुल रोहतगी ने दलील दी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास पर्याप्त विधायक नहीं हैं इसलिए बहुमत परीक्षण से बच रही है. रोहतगी ने कहा कि कांग्रेस के पास सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है.

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के बहुमत परीक्षण पर कहा है कि 16 बाग़ी विधायक विधानसभा में बहुमत साबित करने की प्रक्रिया में शामिल हों या नहीं हों लेकिन उन्हें क़ैद करके नहीं रखा जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बहुमत साबित करने की प्रक्रिया बिल्कुल स्वतंत्र रूप से होनी चाहिए ताकि विधायक अपने नेता का चुनाव बिना कोई दबाव के कर सकें. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बहुमत किसके पास है इसका फ़ैसला विधानसभा में ही हो सकता है.

मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है. उन्होंने कहा कि राज्यपाल संविधान के हिसाब से सरकार को निर्देश देते हैं. बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस सत्ता के लिए अल्पमत सरकार चला रही है.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली दो जजों की बेंच पूरे मामले की सुनवाई कर रही है. दुष्यंत दवे ने सुनवाई के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के कांग्रेस मुक्त नारे का भी ज़िक्र किया. दवे ने कहा कि विपक्षी पार्टियों की सरकारें गिराने का काम इसी नारे के तहत किया जा रहा है.

मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर की तरफ़ से कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी. उन्होंने कहा कि विधायकों के इस्तीफ़े के पत्र में संदिग्ध रूप से समानता है. सिंघवी ने कहा कि इससे शक पैदा होता है. सिंघवी ने कहा, ''19 इस्तीफ़े दिए गए हैं. इनमें से सात के त्याग पत्र एक ही व्यक्ति ने लिखे हैं और हस्ताक्षर अलग-अलग विधायकों के हैं. ये पत्र दो लाइन के हैं.''

छह विधायकों के इस्तीफ़े के बाद बहुमत के लिए सदन में 112 विधायकों का समर्थन चाहिए. बीजेपी के पास 107 विधायक हैं और कांग्रेस के पास 108. अभी 16 विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार नहीं किए गए हैं.

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