मध्य प्रदेशः कमलनाथ शुक्रवार शाम पांच बजे तक साबित करें बहुमतः सुप्रीम कोर्ट -आज की बड़ी ख़बरें

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सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार को शुक्रवार को बहुमत साबित करने के लिए कहा है.
साथ ही कोर्ट की तरफ़ से इसके लिए पांच बजे शाम तक की डेडलाइन भी तय की गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कांग्रेस के 16 बाग़ी विधायक विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेना चाहें तो इसके लिए कर्नाटक और मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों को उन्हें सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए.
कोर्ट ने वोटिंग की प्रक्रिया को लेकर भी दिशानिर्देश दिए हैं. आदेश के अनुसार हाथ उठाकर वोट डाले जाएंगे और सदन की पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है.
कांग्रेस को ये उम्मीद थी कि 16 बाग़ी विधायकों की किस्मत पर स्पीकर के फैसले के बाद ही उन्हें सदन में बहुमत साबित करने के लिए कहा जाएगा.

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'भारत के 90 फ़ीसदी लोगों के पास है आधार कार्ड'
संसद में गुरुवार को दी गई जानकारी के मुताबिक़ फ़रवरी के आख़िरी महीने तक भारत की 90.1 फ़ीसदी आबादी को आधार कार्ड मुहैया करा दिया गया था.
केंद्रीय राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने ये लिखित जानकारी राज्यसभा में दी.
उन्होंने ये भी कहा कि यूआईडीएआई अपने पास ये जानकारी नहीं रखता कि कितने शहरी और कितने ग्रामीण लोगों के पास आधार कार्ड है इसलिए वो इस बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकते.
उन्होंने कहा, "29 फ़रवरी 2020 तक 90.1 फ़ीसदी लोगों को आधार कार्ड दिए जा चुके थे."
धोत्रे ने कहा कि यूआईडीएआई आधार कार्ड धारकों की आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी भी अपने पास नहीं था.
उन्होंने कहा, "आधार एक्ट, 2016 के प्रावधानों के अनुसार यूनीक आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लोगों की आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी नहीं रखता इसलिए इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है."

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'जामिया हिंसा के लिए अभी किसी को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते'
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि अभी दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुई हिंसा के लिए किसी को ज़िम्मेदार ठहराना अपरिपक्व होगा.
उन्होंने राज्यसभा में प्रश्न काल के दौरान कहा कि सरकार इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दे सकती क्योंकि मामला अभी न्यायाधीन है.
पोखरियाल से पूछा गया था क्या सरकार जामिया हिंसा में दिल्ली पुलिस की भूमिका की जांच के लिए कोई कदम उठाएगी?
इसके जवाब में उन्होंने कहा, "जब ऐसी घटनाएं होती हैं तब कई साक्ष्य और तथ्य मौजूद होते हैं. ऐसे में अभी किसी को हिंसा का ज़िम्मेदार कहना अपरिपक्कव होगा."
क्या केंद्र सरकार हिंसा में हुए नुक़सान की भरपाई यूनिवर्सिटी को करेगी?
इसके जवाब में उन्होंने कहा, "सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की फ़ंडिंग यूजीसी के ज़रिए केंद्र सरकार ही करती है. अगर किसी तरह के फ़ंड की ज़रूरत है तो यूनिवर्सिटी यूजीसी से संपर्क कर सकती है."

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निर्भया गैंगरेप: दोषी मुकेश की याचिका ख़ारिज
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की तारीख़ से ठीक एक दिन पहले गुरुवार को निर्भया गैंगरेप मामले में दोषी मुकेश सिंह की याचिका ख़ारिज कर दी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अदालत ने कहा कि मुकेश ने सभी मौजूद उपाय अपना लिए हैं और इस चरण में अब किसी अन्य सुबूत को नहीं देखा-परखा जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे मुकेश सिंह की याचिका में कोई दम नहीं दिखता, इसलिए वो इस पर सुनवाई नहीं करेगा.
मुकेश ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दाख़िल करके कहा था कि घटना वाले दिन यानी 16 दिसंबर 2012 को वो दिल्ली एनसीआर में नही था.
मुकेश की ये याचिका दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही ख़ारिज कर चुका था लेकिन उसने दोबारा इसे चुनौती थी.
इस याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा था कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में दख़ल देने का कोई आधार नहीं है.
इस मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पहले ही सुनवाई पूरी हो चुकी है. निर्भया गैंगरेप के चारों दोषियों को 20 मार्च सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दी जानी है.

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रंजन गोगोई ने ली राज्यसभा में शपथ
भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने गुरुवार सुबह राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली. जब वो शपथ ले रहे थे तब विपक्षी पार्टियों के कुछ सांसद 'शेम-शेम' के नारे लगा रहे थे.
कुछ सदस्यों ने विरोध जताने के लिए सदन से वॉकवाउट भी किया.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा की सदस्यता के लिए रंजन गोगोई को मनोनीत किया था. विपक्षी पार्टियां और विरोधी इसे न्यायपालिका की स्वंतत्रता के लिए ख़तरा बताकर इसकी आलोचना कर रहे हैं.
रंजन गोगोई महज चार महीने पहले ही चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया के पद से रिटायर हुए हैं. उन्होंने विरोधियों की आलोचना के जवाब में कहा था कि संसद में उनकी उपस्थिति न्यायपालिका के मुद्दों को विधायिका के सामने रखने में मदद करेगी.
हालांकि इसके बाद भी उनके राज्यसभा में आने का विरोध कम नहीं हुआ और इन्हीं विरोधी सुरों के बीच उन्होंने गुरुवार को शपथ भी ली.

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बचाव में आए वेंकैया नायडू और रविशंकर प्रसाद
रंजन गोगोई जैसे ही शपथ लेने के लिए उठे, विरोधी सांसद ज़ोर-ज़ोर से 'शेम-शेम' के नारे लगाने लगे. कुछ ने विरोध स्वरूप सदन से वॉक आउट भी किया.
उप राष्ट्रपति और सदन के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने विरोधी सांसदों को यह कहकर रोकने की कोशिश की कि 'ये आवाज़ें रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होंगी, इसलिए इनका कोई मतलब नहीं है.'
नायडू नारा लगाने वाले सांसदों को बैठ जाने और शांत होने को भी कहते रहे.
उन्होंने कहा, "ये ग़लत है. आप ये सब सदन में मत कीजिए. सदन के बाहर अपनी राय रखने, अपना विरोध दर्ज कराने के लिए आप स्वतंत्र हैं. हम सब राष्ट्रपति के अधिकारों और नियमों से वाकिफ़ हैं. इसलिए सदन में नारे लगाने का कोई मतलब नहीं है."
गोगोई के शपथ लेने के बाद केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, "राज्यसभा में अलग-अलग क्षेत्रों से विशेषज्ञों और जानकारों को लाने की परंपरा रहा है. इनमें पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं. मुझे यक़ीन है कि रंजन गोगोई राज्यसभा सांसद के रूप में अपना पूरा योगदान देंगे. आज कुछ सांसदों ने जिस तरह विरोध किया, वो बेहद ग़लत है."
कांग्रेस ने रंजन गोगोई की नियुक्ति को संविधान के बुनियादे ढांचे का 'गंभीर, अभूतपूर्व और अक्षम्य' अपमान बताया है.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस जोसेफ़ कुरियन ने भी राज्यसभा की सदस्यता स्वीकार करने के लिए रंजन गोगोई की आलोचना की है. कुरियन ने कहा कि गोगोई का यह कदम न्यायपालिका की स्वंतत्रता और आम जनता के भरोसे को कमज़ोर करेगा.

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रंजन गोगोई से जुड़ी कुछ ख़ास बातें
सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस रहते हुए कई महत्वपूर्ण फ़ैसले दिए थे जिसमें राम मंदिर फ़ैसला भी शामिल है.
इससे पहले वो सबसे ज़्यादा चर्चा में तब आए थे जब उन्होंने 12 जनवरी 2018 को एक चिट्ठी लिखकर और सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य जजों के साथ एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर राजनीति से लेकर न्यायपालिका तक में भूचाल ला दिया था. भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जज, प्रेस से मुख़ातिब थे.
उस समय रंजन गोगोई समेत चार जजों ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा को एक बड़ी नाराज़गी और चिंता के साथ एक चिट्ठी लिखी थी.
इसके अलावा गोगोई उस वक़्त भी सुर्खियों में थे जब सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाली एक युवती ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था.
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