मध्य प्रदेश: बाग़ी विधायकों ने बताया, कमलनाथ से क्यों हैं नाराज़

बाग़ी विधायक

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बेंगलुरु में मौजूद मध्य प्रदेश के बाग़ी विधायकों ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेस कर बताया कि उन्होंने किन वजहों से कमलनाथ सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है.

विधायकों ने कहा कि उन्हें बंधक नहीं बनाया गया है. हालांकि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया है कि इन विधायकों को बंधक बनाया गया है.

इन विधायकों ने कहा कि पार्टी ने उन विधायकों को बंदी बनाया है जो कि सरकार के ख़िलाफ़ अपनी भावनाएं ज़ाहिर करना चाहते हैं.

मध्यप्रदेश के पूर्व परिवहन मंत्री और विधायक गोविंद सिंह राजपूत कहते हैं, "बहुत बार हमने मीडिया में सुना कि हम लोग बंधक बनाए गए हैं. लेकिन हम लोग बताना चाहते हैं कि हम लोग बंधक बनाकर नहीं बल्कि स्वेच्छा से आए हैं. 15 साल तक विपक्ष में बैठने के बाद जब हम सरकार में आए तो राहुल गांधी ने दो लोगों के नाम सामने रखे - सिंधिया जी और कमलनाथ."

"लेकिन ये पूरा प्रदेश जानता है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाने में सिंधिया जी की बड़ी भूमिका थी. सरकार बनने के बाद सिंधिया जी को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया और कमलनाथ जी मुख्यमंत्री बना दिए गए."

कमलनाथ

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"हम लोगों को लगा कि सब कुछ ठीक ठाक रहेगा लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद हम लोगों ने कमलनाथ जी का जो व्यवहार देखा...मैं मंत्री होते हुए कह सकता हूँ कि कमलनाथ जी ने 15 मिनट भी शांति से हमारी बात नहीं सुनी. आख़िर हम क्षेत्र की समस्या के बारे में किससे बात करें."

"लोगों ने हमें विधायक के रूप में चुना और हम उनके बंदूक के लाइसेंस बनवाने जैसे काम न करवा पाएं, छोटा सा स्थानांतरण न करवा पाएं. विकास की बात करें तो मुख्यमंत्री के द्वारा मेरे क्षेत्र में एक पैसे का विकास का काम नहीं करवा पाए."

"हर कैबिनेट बैठक में ये बात होती थी कि छिंदवाड़ा को इतना पैसा, उतना पैसा...छिंदवाड़ा को हज़ारों करोड़ रुपए दिए गए. एक बार तो मैंने मज़ाक मज़ाक में मुख्यमंत्री जी से ये कह दिया कि मुख्यमंत्री जी छिंदवाड़ा में तो काम करने के लिए जगह बची नहीं होगी तो क्या वहां इमारत दर इमारत बनाई जा रही है?"

प्रेस से क्यों बात की?

जब बागी विधायकों से पूछा गया कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की वजह क्या थी तो इस पर राजपूत ने कहा कि हमारे बारे में मीडिया में तमाम तरह की बातें चल रही हैं.

उन्होंने कहा, "मीडिया में हमारे बारे में तमाम बातें चल रही हैं कि हमें बंधक बनाया गया है आदि आदि लेकिन आप देख सकते हैं कि हम कितने आज़ाद हैं, आपसे बात कर रहे हैं."

कमलनाथ का पत्र

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वहीं, एक अन्य विधायक तुलसी सिलावट ने कहा, "हम मीडिया से इसलिए बात कर रहे हैं क्योंकि हमारे बारे में बंधक बनाए जाने जैसी बातें की जा रही हैं. लेकिन हम सब स्वेच्छा से आए हैं."

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वरिष्ठ विधायक ने ज़ाहिर किया दर्द?

मध्य प्रदेश के सबसे वरिष्ठ विधायकों में से एक बिसाहुलाल सिंह बीजेपी में शामिल हो चुके हैं.

वे कहते हैं, "मैं छह बार का विधायक हूँ, मुझसे सीनियर पूरी विधानसभा में कोई नहीं है. जब हम किसी काम के लिए जाते हैं. तो उनके पास समय नहीं होता है. वे कह देते हैं - चलो - चलो..."

उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार ने जो आदिवासियों से वादे किए थे, उन वादों को पूरा नहीं किया.

इसके बाद बिसाहुलाल समेत अन्य विधायकों से पूछा गया कि उनकी नाराज़गी कमलनाथ से हैं और अगर कमलनाथ को हटा लिया जाए तो क्या वे कांग्रेस में रहेंगे.

इस सवाल के जवाब में विधायकों ने कहा कि वे स्वतंत्र हैं और आगे फ़ैसला करेंगे.

ज्योतिरादित्य सिंधिया

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आख़िर क्या है मामला?

मध्य प्रदेश की राजनीति में सिंधिया गुट और कमलनाथ गुट के बीच तनातनी की ख़बरें यहां सरकार गठन के बाद से ही आ रही थीं.

लेकिन कमलनाथ सरकार पर छाए इस मौजूदा राजनीतिक संकट की शुरुआत बीती दस मार्च से हुई थी जब कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफ़ा देकर बंगलुरु में डेरा डाल दिया. इन विधायकों में मध्य प्रदेश सरकार के छह मंत्री भी शामिल थे.

इस्तीफ़ा देने वालों में सिंधिया गुट से लेकर दिग्विजय गुट के विधायक भी शामिल थे. क्योंकि बिसाहूलाल सिंह दिग्विजय सिंह के क़रीबी माने जाते हैं जिन्होंने बीजेपी की सदस्यता भी ले ली है. इसके साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया.

इसके बाद बीजेपी ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार अल्पमत में हैं.

अमित शाह, सिंधिया, कमलनाथ

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इसके बाद सोमवार को जब विधानसभा में बजट सत्र की शुरुआत होनी थी तब ये माना जा रहा था कि विधानसभा अध्यक्ष फ़्लोर टेस्ट कराएंगे.

लेकिन कमलनाथ ने सोमवार को विधानसभा सत्र शुरु होने से ठीक पहले, राज्यपाल को पत्र लिखकर फ़्लोर टेस्ट नहीं कराए जाने की मांग की.

पत्र में उन्होंने लिखा, "किसी राजनीतिक दल की गतिविधियां जो कि उनके आंतरिक कलह या भेदभाव से संबंधित हों यह राज्यपाल के लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए."

इसके बाद राज्यपाल के अभिभाषण के कुछ देर बाद ही विधानसभा सत्र को स्थगित कर दिया गया.

इसके बाद शिवराज सिंह चौहान अपने 106 विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे और राज्यपाल के सामने अपने विधायकों की परेड करवाई.

राज्यपाल लालजी टंडन ने इसके बाद कहा कि विधायकों के अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जाएगा.

सोमवार को घटे इस पूरे वाक्ये में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने का फ़ैसला किया है.

और राज्यपाल ने कमलनाथ सरकार को 17 मार्च को फ़्लोर टेस्ट कराने को कहा है.

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