अलीगढ़ दंगा: बीबीसी की पड़ताल पर हुई पुलिस कार्रवाई

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- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हाल ही में हुई साम्प्रदायिक हिंसा के मामले में प्रशासन ने गुरुवार को छह गिरफ़्तारियाँ की हैं.
इनमें प्रमुख गिरफ़्तारी बीजेपी यूथ विंग 'भारतीय जनता युवा मोर्चा' के महानगर महामंत्री रह चुके विनय वार्ष्णेय की है. बीबीसी ने दो हफ़्ते पहले हिंसा की पड़ताल की थी और घटना से जुड़े कुछ अहम वीडियोज़ जाँच के लिए ज़िला प्रशासन को सौंपे थे.
गुरुवार को हुई गिरफ़्तारी पर बात करते हुए अलीगढ़ के एसएसपी मुनिराज जी. ने कहा, "बीबीसी की ओर से सौंपे गए वीडियोज़ की फ़ॉरेंसिक जाँच के आधार पर विनय वार्ष्णेय की गिरफ़्तारी हुई है. वीडियो इस बात का प्रमाण है कि हिंसा के समय गोली लगने से घायल हुए तारिक़ के घर के पास की छत पर विनय मौजूद थे. अब बैलिस्टिक रिपोर्ट्स का इंतज़ार है जिससे गोली चलने की दिशा और असलहे का पता लग सके".
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क्या है पूरा मामला?
अलीगढ़ शहर के तीन इलाक़ों में 22 फ़रवरी को दो समुदायों के बीच हिंसक झड़पें हुईं थीं.
चश्मदीदों और प्रशासन के मुताबिक़ पिछले कई दिनों से शहर के तीन इलाक़ों में विवादास्पद रहे नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध जारी थे.
इसी विरोध के दौरान दो समुदायों के बीच हिंसा बढ़ने की घटनाएँ हुईं जो तेज़ी से फैली थीं.
शुरुआत दिल्ली गेट से हुई. ऊपर कोट, तुर्कमान गेट के बाद बाबरी मंडी में भी झड़पें हुईं.

दोनों समुदायों ने एक-दूसरे पर गोली चलाने और जानलेवा हमले के आरोप लगाए और झड़पों में कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे.
अलीगढ़ कोतवाली के पास हिंसा का दौर क़रीब तीन घंटे चला था जिसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और हिंसा पर काबू पाया जा सका.
मामले में दोनों समुदायों से एक दूसरे के ख़िलाफ़ एक दर्जन से ज़्यादा एफ़आईआर दर्ज हुई और जाँच शुरू हुई.
बीबीसी की पड़ताल
बीबीसी की टीम 24 फ़रवरी, 2020 की सुबह अलीगढ़ पहुँची थी. यहाँ धारा 144 लगी हुई थी और प्रशासन ने अफ़वाहों को रोकने के लिए पूरे ज़िले में इंटरनेट पर बैन लगा रखा था.
हमारी जाँच की शुरुआत एक-एक कर सभी घायलों से जाकर मिलने से हुई.
पहला पड़ाव अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज था जहाँ हिंसा के दौरान घायल हुए तारिक़ मुनव्वर, सलमान इम्तियाज़, मोहम्मद इब्राहिम, रशीद और कलीम का इलाज चल रहा था.
इनमें से सबसे गंभीर हालात तारिक़ की थी जो आइसीयू में भर्ती थे. वो बोल भी नहीं पा रहे थे.
उस दिन अस्पताल के सीएमओ ने बताया था, "तारिक़ के पेट में गोली लगी थी जो अभी भी उनके लिवर में मौजूद है. उनकी हालत नाज़ुक इसलिए है क्योंकि गोली लगने से ख़ून बहुत बहा था और अब तारिक़ हमेशा की तरह अपाहिज हो चुके हैं".
तारिक़ की हालत अभी भी नाज़ुक बनी हुई है और हमारी मुलाक़ात के एक हफ़्ते बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रख दिया गया था.

अस्पताल में हमारी मुलाक़ात तारिक़ के पिता मुनव्वर ख़ान से हुई थी और उन्होंने कहा था, "मेरे छोटे बेटे का मेरे पास फ़ोन आया था कि मोहल्ले के अंदर सामने छत पर विनय वार्ष्णेय, सुरेन्द्र दूधवाले के यहाँ चढ़ा हुआ है. हम लोग तीनों भाई बालकनी में से देख रहे थे. सुरेन्द्र के लड़के त्रिलोकी ने कहा कि मारो सालों को गोली. विनय ने गोली मार दी, मेरे बेटे को गोली लग गई."
मुनव्वर ने विनय समेत उन तीनों के ख़िलाफ़ नामज़द पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाई थी.
तारिक़ के भाई शारिक़ ने अपनी छत से कुछ मोबाइल वीडियो बनाए थे.
शारिक़ ने बीबीसी को वो वीडियो दिखाते हुए कहा था, "मैं अपनी बालकनी में खड़ा था. मैं और मेरा भाई आमिर और तारिक़- जो सबसे छोटा है-हम तीनों बालकनी में थे...............देखिए मैं कितनी दूर ही और ये देखिए, ये विनय वार्ष्णेय है, यहाँ"
वहाँ हमारी मुलाक़ात इब्राहिम से भी हुई जो अपने घर से बाज़ार तक सामान ख़रीदने गए थे.
उन्होंने बताया, "कहीं से गोली तो चल ही रही थी. किसी के सीने पर छर्रे लगे. मेरी आँख में गोली लगी थी और बाईं आँख की रौशनी हमेशा के लिए जा चुकी है".

इस अस्पताल में सभी घायलों से मिलने के बाद हमारी टीम अलीगढ़ शहर के मलखान ज़िला अस्पताल पहुँची, जहाँ हिंसा की चपेट में आए पाँच अन्य लोगों का इलाज जारी था.
एक बड़े हॉल में पड़े बिस्तरों पर पाँच लोग लेटे मिले. बाबरी मंडी के रहने वाले राकेश कुमार वार्ष्णेय, मनीष गुप्ता, युशांत मिश्रा, महेश कुमार वार्ष्णेय और सुमित वार्ष्णेय इस कमरे में अपने परिजनों के साथ मौजूद थे.
लगभग सभी के सर पर पट्टियाँ बंधी हुई थीं और एक के पैर में प्लास्टर भी चढ़ा हुआ था. हमारी बात मनीष गुप्ता से हुई.
मनीष ने कहा, "उन लड़कों ने मुँह पर कपड़े बाँध रखे थे. उनके पास कहाँ से इतना असलहा बारूद आया इसकी हमें कोईं जानकारी नहीं थी. ये सीएए तो बस प्रोटेस्ट का बहाना है. औरतों को, बच्चों को आगे करके, इनके पास इतनी तादाद में बन्दूकें, कट्टे कहाँ से आए".
हिंसा में दूसरी साइड के लोगों को भी गोलियाँ लगीं हैं, किसने चलाईं वो गोलियाँ? मनीष ने जवाब दिया, "ऐसा कुछ नही है. ये झूठ बोला जा रहा है. उन्हीं की गोलियाँ उन पर लगी हैं".
यहाँ मौजूद घायलों के पास घटना से जुड़े कोई वीडियो नहीं थे.
क्योंकि हमारी जाँच में भाजयुमो सदस्य विनय वार्ष्णेय का नाम बार-बार आ रहा था. हमारा उद्देश्य उनसे सम्पर्क कर उन वीडियो के बारे में जानकारी लेना था, जिसमें वे कथित तौर पर देखे जा सकते थे.
काफ़ी मुश्किलों के बाद विनय से सम्पर्क हुआ और एक बंद पड़े रेस्टोरेंट के फ़र्स्ट फ़्लोर पर मुलाक़ात हुई.

23 फ़रवरी को हुई इस बातचीत के अंश
विनय: पहली बात तो ये है कि मैं कुछ भी करने से पहले सौ बार सोच लेता हूँ कि ठीक कर रहा हूँ या नहीं. जो भी करता हूँ वो डंके की चोट पर करता हूँ.
सवाल: पीड़ित तारिक़ के परिवार का आरोप है कि इस वीडियो में आप एक छत पर खड़े हैं?
विनय: (मोबाइल पर वीडियो देखते हुए) ये? हाँ ये मैं ही हूँ.
सवाल: हमें बताया गया कि आपके हाथ में हथियार है?
विनय: हथियार नहीं है. मैं तो हाथ के इशारे से सबको हटा रहा हूँ, सबसे हटने को कह रहा हूँ.
सवाल: कुछ दूसरे भी लोग वीडियोज़ में पत्थर फेंकते नज़र आ रहे हैं. उनके चेहरे खुले हुए हैं और आपके चेहरे पर नक़ाब है?
विनय: मेरा भी चेहरा खुला हुआ है. नक़ाब तो छोड़िए अगर आप मुझे बोरे में भी ले जाएँगे तो मोहल्ले के लोग मुझे आराम से पहचान लेंगे.
सवाल: तब दंगे के समय, चेहरे पर नक़ाब डाल कर आओ किसी दूसरे की छत पर क्या कर रहे थे?
विनय: अगर छत पर नहीं जाऊँगा तो लोगों को हटाऊँगा कैसे. मैं तो वहाँ लोगों को कहने गया था कि हटो यहाँ से. ये सब बंद करो.
सवाल: क्या आप पर पहले भी मुक़दमे दर्ज हो चुके हैं?
विनय: मेरे ऊपर आरोप अभी ही नहीं, 2016 में भी लगे थे. दो बार 307 लगाई गई थी. एक इमामबाड़े पर गोली चलाने को लेकर. मैंने देखा ही नहीं इमामबाड़ा कहाँ पर है. पूरा मुस्लिम इलाक़ा है. वहाँ के शिया समुदाय मुझे बहुत प्यार करते हैं".
विनय से बातचीत करने के बाद हमने इलाक़े में जाकर कई स्थानीय लोगों से बात की और उनसे घटना के बारे में पड़ताल की.
साथ ही हमने बात की थी अलीगढ़ के बीजेपी प्रमुख विजय सारस्वत से जिनके मुताबिक़, "विनय पार्टी के अच्छे कार्यकर्ता हैं".
बीबीसी: कुछ वीडियोज़ आ रहे और उन पर गोली चलाने के आरोप हैं?
विवेक सारस्वत: एफ़आइआर ज़रूर हुई है लेकिन वो अपराधी नहीं हैं. न ही उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड है. दरअसल, उस इलाक़े की हिंदू लीडरशिप को लगातार टारगेट किया जाता रहा है. विनय अपराधी नही हैं और न वीडियो में उनकी कोई फ़ोटो है.
बीबीसी: वीडियो में उनकी फ़ोटो है और उन्होंने बीबीसी से इस बात की पुष्टि की है कि वो एक छत पर नक़ाब पहन कर खड़े हुए हैं?
विवेक सारस्वत: नहीं वो तो नहीं कह रहे हैं! हमारी तो कल ही बात हुई है. मैं बात करता हूँ उनसे, ऐसा उन्होंने मुझसे तो नहीं कहा.

23 फ़रवरी को मुनिराज जी. ने बीबीसी से कहा था, "जितनी भी इलेक्ट्रोनिक एविडेंस हैं उसकी जाँच की जाएगी. मैं पब्लिक से रिक्वेस्ट भी करता हूँ कि उनके पास जो भी एविडेंस है वो हमें दें. उसके बाद दोषियों के ऊपर 100% कार्रवाई होगी".
इसके तुरंत बाद प्रशासन ने पुलिस अधीक्षक, क्राइम की अगुआई में एक एसाईटी के गठन की घोषणा की और मामले की जाँच आगे बढ़ी.
गुरुवार शाम को अलीगढ़ प्रशासन ने मामले में छह गिरफ़्तारियों की सूचना मीडिया को दी.
विनय वार्ष्णेय के अलावा पाँच और व्यक्ति गिरफ़्तार किए गए हैं.
फईमउद्दीन, मुस्तकीम, शाबिर, इमरान और अनवार पर बाबरी मंडी में हुई हिंसक घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं.
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