YES BANK में पुरी जगन्नाथ मंदिर के फंसे 545 करोड़ की सीबीआई जांच की मांग

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- Author, सुब्रत कुमार पति
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, भुवनेश्वर (ओडिशा) से
रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के यस बैंक पर पाबंदी के बाद पुरी स्थित प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर के 545 करोड़ रुपये फंस गए हैं. जिसको लेकर जगन्नाथ मंदिर के भक्त और पुजारी चिंतित हैं.
जगन्नाथ मंदिर हिंदू श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है और इसे हिंदुओं के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है.
जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने पिछले साल सितंबर तक यस बैंक में 592 करोड़ रुपये जमा किए थे. केवल हाल ही में बैंक से 47 करोड़ रुपये निकाला गया था.
बचे हुए 545 करोड़ रुपये इस साल 29 मार्च तक परिपक्व होने थे लेकिन आरबीआई के 50,000 रुपये से अधिक की निकासी पर रोक से अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है.

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एसजेटीए राज्य सरकार के एक अधिनियम के तहत काम करने वाला एक वैधानिक प्राधिकरण है जो 11 वीं शताब्दी के इस मंदिर का प्रबंधन करता है.
ओडिशा के क़ानून मंत्री प्रताप जेना ने हाल ही में कहा कि मंदिर प्रशासन के यस बैंक में दो फिक्स्ड डिपॉजिट हैं. जो 16 मार्च और 29 मार्च को परिपक्व होने वाला है.
अतः मैच्युरिटी के बाद पैसा वापस लेने और नेशनलाइज्ड बैंक में जमा करने की योजना थी. लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के फ़ैसले बाद स्थिति बदल गयी है.

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वित्त मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
मामले को गंभीरता से लेते हुए, ओडिशा सरकार के वित्त मंत्री निरंजन पुजारी ने रविवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है. जिसमे आरबीआई अधिकारियों को जगन्नाथ मंदिर प्रशासन द्वारा 545 करोड़ रुपये की जमा राशि को संकटग्रस्त यस बैंक से निकालने की अनुमति देने का अनुरोध किया है.
राज्य के वित्त मंत्री ने कहा है की यह भक्तों के लिए धार्मिक महत्व का मुद्दा है.
सीतारमण को लिखे अपने पत्र में, ओडिशा के वित्त मंत्री ने कहा, "राशि को सावधि जमा (टर्म डिपोज़िट) के रूप में रखा गया है और इसे जल्द ही लाखों हिंदू भक्तों के चिंता को नज़र में रखते हुए निकला जाना चाहिए. यह भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए धार्मिक महत्व का मुद्दा है."
राज्य भाजपा के महासचिव पृथ्वीराज हरिचंदन ने बीबीसी को बताया कि यह श्रीमंदिर फंडों को ठगने की साजिश है.
उन्होंने कहा, "विकास आयोग 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की निधि को 25 बैंकों में रखने का निर्णय लिया गया था. उस समय, यस बैंक सूची में नहीं था. बाद में, जुलाई 2019 में, यस बैंक को सूची में शामिल किया गया और धनराशि जमा की गई.
उन्होंने सवाल किया कि क्या विभाग या संबंधित मंत्री अब इसकी ज़िम्मेदारी लेंगे?

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सीबीआई जांच की मांग
जगन्नाथ मंदिर के वरिष्ठ 'दइतापति' (सेवक) बिनायक दास मोहपात्रा ने बीबीसी को कहा की यस बैंक पर रिजर्व बैंक के लगाए प्रतिबंधों से भक्तों में निराशा फैल गई है.
उन्होंने कहा, "एक निजी बैंक में इतनी अधिक राशि जमा करने के लिए ज़िम्मेदार व्यक्तियों के ख़िलाफ़ पूरी तरह से जांच और कार्रवाई की मांग करते हैं."
पुरी मे रहने वाले वकील प्रियदर्शन पटनायक जगन्नाथ सेना संगठन के संयोजक है. जगन्नाथ सेना की तरफ से इसकी सीबीआई जांच की मांग की गयी है.
पटनायक ने बीबीसी को कहा, "मंदिर के धन को निजी बैंक में जमा करना गैर क़ानूनी है. इसके लिए जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) और मंदिर की प्रबंध समिति को ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए."
अभी तक श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) की तरफ से कोई अधिकारी इस मामले में मीडिया से बात नहीं कर रहे हैं.

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सदन में हंगामा
इस मामले को लेकर बुधवार ओडिशा विधानसभा चल नहीं पाई. शुरुआत में ही कांग्रेस के विधायकों ने शोर मचाया और सदन के मध्य भाग में आकर प्रदर्शन किया.
कांग्रेस विधायकों ने "जय जगन्नाथ" के नारे लगाए और यस बैंक में मंदिर के पैसे जमा करने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की. विधायकों ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से भी बयान मांगा. जिसके चलते बार बार सदन को मुल्तवी रखने की घोषणा की गई. बुधवार बजट सत्र के दूसरे चरण का पहला दिन था.
सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में कांग्रेस विधायक संतोष सिंह सलूजा ने कहा, "निजी बैंक में भगवान के पैसे जमा करके श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है. हम भगवान के पैसे को एक निजी बैंक को हस्तांतरित करने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं. क़ानून के ख़िलाफ़ जाने वाले अधिकारिओं को अरेस्ट किया जाना चाहिए."
उधर नई दिल्ली में बीजू जनता दल के कुछ सांसद मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिल कर मामले पर अपनी चिंता जाहिर की. और मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की.
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