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दिल्ली हिंसा: घर जलाए जाने पर क्या बोले बीएसएफ़ जवान मोहम्मद अनीस
- Author, पीयूष नागपाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में कई लोगों की मौत हुई है और कईयों के घर-दुकान को भीड़ ने नष्ट कर दिया.
हिंसक भीड़ ने जिन घरों को आग के हवाले कर दिया उनमें हिंदुओं के घर भी शामिल थे और मुसलमानों के भी. इन्हीं में से एक घर था बीएसएफ़ के जवान मोहम्मद अनीस जिसे 25 फरवरी को हिंसक भीड़ ने जला दिया.
मंगलवार को हम करावल नगर के नज़दीक मौजूद ख़जूरी ख़ास में मोहम्मद अनीस के घर जाने के लिए निकले. उनके घर की तरफ़ जाने वाले रास्ते भी दंगे के निशान स्पष्ट मौजूद थे. जहां-तहां जल चुकी गाड़ियां पड़ी थी, कहीं-कहीं गैस के सिलेंडर और अधिकतर दुकानें बंद थी.
दंगे के दौरान गोली लगने से एक कुत्ते की मौत हो गई थी और उसके शव की बदबू इलाके भर में फैली हुई थी. सड़क पर कुछ जगह हमें सफ़ाई कर्मचारी भी दिखे जो दंगों से हुए नुक़सान को गाड़ियों में समेट रहे थे.
इस हिंसा में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हैं.
मोहम्मद अनीस का घर एक बार फिर बनाने में बीएसएफ़ उनकी मदद कर रहा है. बीएसएफ़ के डायरेक्टर जनरल का कहना है कि जवान की शादी तीन महीने में है और उनका घर बनाने में हम उनक मदद करना चाहते हैं.
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा है कि मोहम्मद अनीस नक्सल प्रभावित मालकानगिरी में बीएसएफ़ की नौवीं बटालियन में तैनात थे और ओडिशा सरकार मोहम्मद अनीस की मदद के लिए उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख की मदद देगी.
मंगलवार दोपहर जब हम ख़जूरी ख़ास में मोहम्मद अनीस के घर पर पहुंचे तो वहां बीएसएफ़ के जवान उनका घर फिर से रहने लायक बनाने में लगे थे.
इस घर में मोहम्मद अनीस अपने पिता मोहम्मद मुनीस और परिवार के साथ रहते हैं. जिस वक्त उनके इलाके में दंगे हुए उस वक्त घर में उनके पिता मौजूद थे.
मोहम्मद अनीस हमें बताया कि उनका परिवार फ़िलहाल गांव में है और यहां केवल वो और उनके पिता मौजूद हैं, घर दुरुस्त हो जाने के बाद वो अपने परिवार को ले कर आएंगे.
मोहम्मद अनीस के पिता मोहम्मद मुनीस कहते हैं, "25 फरवरी को रात दस बजे के आसपास हल्ला होना शुरु हो गया था. हमारी गली में कम से कम 40-50 आदमी घुस गए थे और वो लोग हेलमेट से चेहरा ढके हुए थे. उन्होंने गाड़ियों को आग लगा दी."
दंगे के वक्त वो घर पर थे. वो कभी छत पर जाते थे तो कभी नीचे लौट आते थे. लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें और कैसे खुद को बचाएं.
वो बताते हैं कि "तीन-चार घंटे के बाद सुरक्षाबल यहां आए और वो यहां फंसे लोगों को बाहर निकाल कर लेकर गए. हमने अपने घर पर ताला लगा दिया और चले गए. इसके बाद लोगों ने हमारे घर में आग लगा दी."
मोहम्मद अनीस कहते हैं, "पिताजी ने फ़ोन पर बताया कि यहां दंगा हो गया है तो बहुत बुरा लगा. मैं चाहता हूं कि आगे कभी ऐसा न हो क्योंकि इससे किसी का भला नहीं होता. इससे देश का बहुत नुक़सान होता है. बाहर के देशों में हमारी बदनामी होती है. हम सभी को मिलजुल कर रहना चाहिए."
हिंसा के बारे में वो कहते हैं कि उनके घर को आग लगाने वाली भीड़ नासमझ भीड़ थी.
वो कहते हैं, "मुझे गर्व है कि मैं इस देश का नागरिक हूं. ये बहुत प्यारा देश है और मैं चाहता हूं कि इसमें रहने का सभी का हक है."
मोहम्मद मुनीस कहते हैं, "दुल्हन की तरह हमने घर सजाया था लेकिन मुसीबत आ गई. बस जान बच गई यही बहुत है. घर तो फिर से बन जाएगा."
"1985 से मैं दिल्ली में रहता हूं लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं देखा था. यहां हम मिल जुल कर रहते थे."
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