मेघालय: CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में दो की मौत, कर्फ़्यू और दिन की बड़ी ख़बर

शिलॉन्ग में हुआ संघर्ष

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मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में हुई झड़प के दौरान दो व्यक्तियों की मौत हो गई है. इसके बाद शहर में कर्फ़्यू लगा दिया गया है और इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई हौ.

व्यक्ति की मौत शनिवार की सुबह शिलॉन्ग के बारा बाज़ार इलाके में खासी छात्र संघ (केएसयू) के सदस्यों और ग़ैर-आदिवासी समूहों के बीच हुई झड़प में हुई. इनमें से एक मृतक की पहचान खासी यूनियन के नेता के तौर पर हुई है.

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ये झड़प नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) और इनर लाइन परमिट (आईएलपी) के मुद्दे पर निकाले जा रहे एक जुलूस के दौरान हुई.

झड़प के दौरान हुई चाकूबाजी में कम से कम छह लोग घायल भी हो गए हैं. फ़िलहाल वहां स्थिति बहुत तनावपूर्ण है.

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मिली जानकारी के मुताबिक़ जुलूस में स्थानीय लोगों ने प्रवासियों को निशाना बनाया. इस घटनाक्रम के बाद वहां रहने वाले प्रवासी, ख़ासकर उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग डरे हुए हैं.

निर्भया मामले के दोषी

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निर्भया मामला: फिर अदालत पहुंचे दोषी

निर्भया गैंगरेप मामले के दोषी अक्षय सिंह और पवन कुमार गुप्ता ने अपने डेथ वॉरंट पर स्टे लगाने के लिए अदालत का रुख़ किया है.

साल 2012 के दिल्ली गैंगरेप के चारों दोषियों को तीन मार्च को फांसी दिए जाने का आदेश दिया है.

अब दोषियों की याचिका के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेद राणा ने तिहाड़ जेल के अधिकारियों को नोटिस भेजा है और दो मार्च तक जवाब देने को कहा है.

अक्षय सिंह ने दावा किया हैकि उसने राष्ट्रपति के पास एक नयी दया याचिका भेजी है जो अभी लंबित है.

अक्षय सिंह के वकील एपी सिंह का कहना है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पहले जो दया याचिकाएं ख़ारिज की थीं, उनमें पूरे तथ्य नहीं थे.

वहीं, पवन कुमार गुप्ता ने कहा है कि अभी उसकी क्यूरेटिव पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

निर्भया मामले में दोषियों को फांसी देने के लिए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी किया है. पहले भी दो बार अदालत ने फांसी की तारीख़ तय की थी जो अलग-अलग याचिकाओं के कारण टल गई थी.

निर्भया गैंगरेप मामले में छह लोग पकड़े गए थे और अदालत ने उन्हें दोषी पाया. एक दोषी ने सज़ा काटने के दौरान जेल में आत्महत्या कर ली थी. जबकि एक नाबालिग़ था, तो उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया था. जबकि बाक़ी चारों के ख़िलाफ़ डेथ वॉरंट जारी किया जा चुका है.

राम सिंह को इस मामले में मुख्य संदिग्ध बताया गया था जिसने मार्च 2013 में तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी.

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