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शाहीन बाग़: सुप्रीम कोर्ट के जज बोले, "वार्ताकारों की रिपोर्ट सिर्फ़ कोर्ट के लिए"
सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए नियुक्त किए गए वार्ताकारों की रिपोर्ट के बारे में कहा कि इन वार्ताकारों की रिपोर्ट सिर्फ़ कोर्ट के लिए ही है.
शाहीन बाग़ में पिछले दो महीने से ज़्यादा वक़्त से लोग नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इन प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए तीन वार्ताकार- संजय हेगड़े, साधना रामचंद्रन और वजाहत हबीबुल्लाह को नियुक्त किया था.
हालांकि, इन वार्ताकारों से बातचीत में भी कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है.
अब सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एएसके कौल ने कहा है, "वार्ताकारों की रिपोर्ट सिर्फ़ कोर्ट के लिए ही है और इसे रिकॉर्ड में नहीं रखा जाएगा."
शाहीन बाग़ के इन वार्ताकारों ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट बंद लिफ़ाफ़े में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई के लिए बुधवार की तारीख़ मुक़र्रर की है.
कन्हैया के बारे में याचिका पर सुनवाई से कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीपीआई नेता कन्हैया कुमार से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
बीजेपी नेता और दिल्ली के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. याचिका में गर्ग ने 2016 के कथित राजद्रोह केस में कन्हैया कुमार के खिलाफ मुक़दमा चलाने की इजाज़त मांगी.
कोर्ट ने अभी इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
गर्ग ने इससे पहले 2015 में दिल्ली के तत्कालीन कानून मंत्री जितेंद्र तोमर पर फ़र्ज़ी डिग्री के आधार पर वकालत करने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रनेता कन्हैया कुमार पर 2016 में कथित तौर पर भारत-विरोधी नारे लगाने के आरोप में राजद्रोह का केस लगा था. अभी दिल्ली सरकार के इजाज़त न देने के चलते केस रुका हुआ है.
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