गुजरात: पीरियड्स पर धर्मगुरु का अजीबोग़रीब बयान, विवाद

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गुजरात के भुज शहर में स्थित स्वामीनारायण मंदिर के कृष्ण स्वरूप स्वामी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

ये वही मंदिर है जिसके परिसर में चलने वाले श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट की कई छात्राओं ने शिक़ायत की थी कि 'पीरियड्स की जाँच करने के लिए प्रशासन ने ज़बरन उनके अंडरवियर उतरवाए'.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कृष्ण स्वरूप स्वामी कहते दिख रहे हैं, "अगर आप एक ऐसी औरत के हाथ का बना खाना खाते हैं जिसका मासिक धर्म चल रहा हो तो आप अगले जन्म में बैल बनेंगे और अगर कोई महिला मासिक धर्म के दौरान खाना बनाती है तो वो अगले जन्म में वो कुतिया बनेगी. आपको जैसा लगता है लगे, लेकिन ये नियम शास्त्रों में लिखे हुए हैं."

स्वामीनारायण संप्रदाय से सम्बन्धित कृष्ण स्वरूप के इस बयान की सोशल मीडिया पर बहुत आलोचना हो रही है.

स्वामीनारायण संप्रदाय से जुड़े कुछ लोगों के अनुसार कृष्ण स्वरूप का यह वीडियो क़रीब एक साल पुराना है जो सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट की घटना के बाद वायरल हुआ है.

बीबीसी ने इस वीडियो के बारे में अधिक जानकारी के लिए संस्थान से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन संस्थान की ओर से जवाब देने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ.

पीड़ित छात्राएं

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पीरियड्स के दौरान भयानक भेदभाव

इस घटना के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग की एक टीम ने संस्थान पहुंचकर पीड़ित छात्राओं से बात की थी और पुलिस ने मामले की जांच के लिए एक विशेष दल गठित किया था.

इस जांच के ज़रिए हर दिन कोई न कोई ऐसी भयानक जानकारी सामने आ रही है जिससे पता चल रहा है कि संस्थान में पढ़ने वाली छात्राओं को पीरियड्स के दौरान कितने बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ता था. मिसाल के तौर पर, मासिक धर्म से गुज़र रही छात्राओं को बेसमेंट में सोने पर मजबूर किया जाता था.

भुज के स्वामीनारायण मंदिर से प्रकाशित हुए काग़जात में लिखा है कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. संप्रदाय मासिक धर्म के बारे में अपने विचारों को सही ठहराने के लिए शिक्षा पत्री (स्वामीनारायण संप्रदाय का एक पवित्र ग्रंथ) का हवाला देता है.

शिक्षा पत्री के 174वें श्लोक में उन बुनियादी नियमों का वर्णन है जिनका मासिक धर्म से गुज़र रही महिलाओं को 'अवश्य पालन करना चाहिए.'

इस श्लोक के अनुसार महिलाओं को मासिक धर्म के शुरुआती तीन दिनों तक किसी व्यक्ति या सामान को नहीं छूना चाहिए. मासिक धर्म के चौथे दिन उन्हें 'शुद्धि स्नान' बाद अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में वापस लौटना चाहिए.

स्वामीनारायण संप्रदाय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए डॉक्युमेंट के अनुसार संप्रदाय का पालन करने वाले पुरुषों की पत्नियों को अपने मासिक धर्म के बारे के में कभी न तो छिपाना चाहिए और न ही झूठ बोलना चाहिए.

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डॉक्युमेंट में लिखी अन्य बातें कुछ इस तरह हैं:

  • महिलाओं को मासिक धर्म के शुरुआती तीन दिनों तक खाना नहीं बनाना चाहिए.
  • मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को किसी को छूना नहीं चाहिए.
  • मासिक धर्म के चौथे दिन 'शुद्धि स्नान' के दौरान बाल ज़रूर धोने चाहिए.
  • 'शुद्धि स्नान' के बाद भी चौथे दिन महिला का बनाया खाना देवताओं को प्रसाद के तौर पर नहीं चढ़ाया जा सकता है.
  • अगर मासिक धर्म के दौरान महिला किसी को ग़लती से छू देती है तो उसे एक ख़ास हिंदू तिथि पर उपवास करना चाहिए.
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मासिक धर्म को 'अपवित्र' बताया गया

हालांकि शादी, त्योहार, किसी धार्मिक कार्यक्रम या आपात स्थिति में महिलाओं को इन नियमों से राहत दी गई है.

स्वामीनारायण संप्रदाय की इस किताब में ये भी बताया गया है कि आधुनिक समय में भी महिलाओं को इन नियमों का पालन क्यों करना चाहिए

इस किताब में मासिक धर्म को 'अपवित्र' बताया गया है और कहा गया है कि अगर महिलाएं इन नियमों का पालन करती हैं तो खाने, परिवार के सदस्यों और घर की बाकी चीज़ों की पवित्रता बरक़रार रहती है.

किताब में ये दलील भी दी गई है कि मासिक धर्म से जुड़े ये नियम असल में महिलाओं के हित में ही हैं क्योंकि वो घर-परिवार की देखभाल करने के लिए कड़ी मेहनत करती हैं.

किताब के अनुसार, "कड़ी मेहनत के कारण महिलाओं का शरीर पूरी तरह थक जाता है और इसीलिए उन्हें मासिक धर्म के दौरान पूरा आराम मिलना चाहिए, अलग रखा जाना चाहिए."

वेबसाइट swaminarayan.faith पर छपे एक लेख में पीरियड्स और धर्म के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है.

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मासिक धर्म के ख़ून में जीवाणु होने का दावा

लेख के अनुसार पीरियड्स के दौरान महिलाएं गंभीर शारीरिक और मानसिक तनाव से गुज़रती हैं. रक्तस्राव की वजह से महिलाओं के मन में मौत का डर और कमज़ोरी पैदा होती है.

इस लेख में मासिक धर्म के ख़ून की गंध को 'बहुत बुरा' बताया गया है और कहा गया है कि महिलाओं को अलग रखे जाने के पीछे एक वजह मासिक धर्म के ख़ून की गंध भी है.

लेख के अनुसार पीरियड्स के ख़ून में कुछ जीवाणु होते है और इसलिए मासिक धर्म से गुज़र रही महिलाओं को खाना बनाने की मनाही है.

लेख में कहा गया है, "पीरियड्स के दौरान महिलाएं बेहद भावुक हो जाती हैं. वो बहुत चिंतित रहती हैं और उनका रवैया बहुत निराशाजनक हो जाता है."

लेख में ये भी कहा गया है कि कुछ लोग मासिक धर्म के दौरान भी औरतों से काम करवाते हैं, जो समझ से परे है. लेख के अनुसार, "मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मरीज़ जैसी होती हैं और हमें उन पर तरस खाना चाहिए.''

इधर, स्वामी नारायण मंदिर के संतों ने भुज में जिलाधिकारी कार्यालय तक एक रैली की और 'बिना सही संदर्भ' के वीडियो क्लिप वायरल करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की.

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