सिंधिया और कमलनाथ की लड़ाई सड़क पर?- प्रेस रिव्यू

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दैनिक जागरण ने पहले पन्ने पर मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री कमलनाथ और प्रदेश के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच अनबन की रिपोर्ट छापी है.
अख़बार ने लिखा है कि कमलनाथ और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच चल रही खींचतान अब पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी तक पहुंच गई है.
अख़बार के अनुसार, ''शनिवार को दिल्ली में वैसे तो सरकार और संगठन के बीच आपसी समन्वय को मज़बूत बनाने के लिए मध्य प्रदेश कांग्रेस ने बैठक रखी थी, लेकिन इसमें तल्खी इस क़दर दिखी कि सिंधिया बैठक को बीच में छोड़कर चले गए. वहीं कमलनाथ भी सिंधिया को लेकर सख़्त दिखे.
बैठक ख़त्म होने के बाद जब उनसे सिंधिया के सरकार के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरने के ऐलान को लेकर सवाल किया गया, तो नाराज़गी भरे अंदाज़ में उन्होंने इसका जवाब दिया और कहा कि 'तो उतर जाएं.''
इसी ख़बर को टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी 13वें नंबर पेज पर प्रकाशित किया है.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच तल्खी बढ़ने की ख़बर सामने आने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं. रिपोर्ट में लिखा गया है कि पूरे मामले से सोनिया को भी अवगत कराया गया है. इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा है, ''पूरी कांग्रेस पार्टी सिंधिया जी के साथ है. हम सबने घोषणापत्र में मिलकर वादे किए थे. पाँच सालों में कमलनाथ जी सभी वादों को पूरा करेंगे. ज्यादातर वादों पर काम तेजी से चल रहा है.''
अख़बार के अनुसार मध्य प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया ने बताया कि बैठक में पार्टी नेताओं की बयानबाजी और अनुशासनहीनता को लेकर चर्चा हुई है, लेकिन बैठक में सिंधिया के बयानों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई. इस बीच उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया के बैठक छोड़कर जाने के सवाल पर उनका बचाव किया और कहा कि 'पहले से उनकी कोई बैठक तय थी, इसलिए वह जल्दी चले गए.'
सिंधिया चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों के मुताबिक़ किसानों के क़र्ज़ माफ़ और गेस्ट शिक्षकों को नियमित नहीं किए जाने से नाराज़ हैं. इसी को लेकर उन्होंने गुरुवार को कहा था कि वादे पूरे नहीं हुए तो वो कमलनाथ सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरेंगे. कमलनाथ का कहना है कि घोषणापत्र में पाँच साल के लिए वादे किए गए हैं, पाँच महीने में पूरे करने के लिए नहीं.

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NPR पर राज्यों को मना रही है मोदी सरकार
दिल्ली से प्रकाशित नवभारत टाइम्स ने दूसरे पन्ने पर एक ख़बर छापी है कि केंद्र सरकार NPR पर राज्यों को मना रहा है और इसकी शुरुआत पंजाब से की है.
अख़बार ने लिखा है, ''राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) में प्रस्तावित बदलाव के विरोध में ग़ैर-बीजेपी शासित राज्यों में हो रहे प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने कवायद शुरू कर दी है. इसके तहत रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (आरजीआई) और जनगणना आयुक्त इन राज्यों में जाकर वहां के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात करेंगे और उनकी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश करेंगे.''
इसी सिलसिले में आरजीआई और जनगणना आयुक्त विवेक जोशी ने पंजाब के सीएम अमरिंदर से मुलाक़ात की है. उन्होंने अमरिंदर को जनगणना 2021 के लिए हाउसलिंस्टिंग फेस की जानकारी दी. उन्हें बताया कि हाउसलिस्टिंग फेज के साथ ही इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच प्रस्तावित एनपीआर अपडेशन का काम शुरू किया जाएगा. जनगणना आयुक्त केरल, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी जा सकते हैं.

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रेपो रेट में कटौती का लाभ मिलेगा: आरबीआई
इकनॉमिक टाइम्स अख़बार की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शनिवार को कहा कि रेपो रेट में कटौती का लाभ बैंक अपने ग्राहकों को धीरे-धीरे दे रहे हैं.
बैंक आने वाले में दिनों में लोन को और सस्ता कर सकते हैं. आरबीआई की बोर्ड मीटिंग के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर की मौजूदगी में दास ने यह बात कही.
गौरतलब है कि रिटेल महंगाई बढ़ने के कारण रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने फ़रवरी की मॉनिटरी पॉलिसी समीक्षा में रेपो समेत किसी अन्य रेट में कोई बदलाव नहीं किया था. रेपो वह रेट है, जिस पर आरबीआई दूसरे बैंकों को क़र्ज़ देता है.
शक्तिकांत दास ने कहा कि क्रेडिट ग्रोथ में तेजी आ रही है, यानी बैंक अब तेज गति से ज्यादा लोन दे रहे हैं और लोग ले भी रहे हैं. मॉनिटरी पॉलिसी की समीक्षा के बाद वे पहले भी कह चुके हैं कि परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई रेट कट को लेकर कोई फ़ैसला करेगा. इसका मतलब है कि अगर परिस्थितियां ठीक रहीं और उसमें सुधार आया तो रेट कट आगे भी जारी रहेगा. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बजट में वित्तीय घाटे का लक्ष्य बढ़ाकर जीडीपी के परिप्रेक्ष्य में 3.8 फीसदी कर दिया गया, मगर इसका ज्यादा असर महंगाई पर नहीं पड़ेगा.
बेशक इस वक़्त महंगाई में तेजी है, लेकिन आने वाले समय में यह नियंत्रण में आ जाएगी. उन्होंने कहा कि वित्तीय घाटे का सीधा संबंध महंगाई से होता है, पर वित्तीय घाटे का लक्ष्य बढ़ाने के साथ सरकार ने ऐसे उपाय भी किए हैं, जिससे महंगाई नियंत्रण में रहे. ऐसे में वित्तीय घाटे में बढ़ोत्तरी को लेकर ज्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.

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तीन राज्यों में बीजेपी के नए प्रमुख
हिन्दुस्तान टाइम्स की एक ख़बर के अनुसार बीजेपी प्रमुख जेपी नड्डा ने शनिवार को पार्टी के तीन प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की. केरल में पार्टी के युवा महासचिव के. सुरेंद्रन को प्रमोट कर प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है जबकि मध्य प्रदेश की कमान संघ के करीबी समझे जाने वाले वीडी शर्मा को सौंपी गई है. दल बहादुर चौहान सिक्किम के प्रदेश अध्यक्ष बरकरार रखे गए हैं.
वामदलों के गढ़ केरल को लंबे समय बाद बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष मिला है. पिछले साल पीएस श्रीधरन को मिजोरम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली चल रहा था. विपक्ष के प्रति आक्रामक रहने वाले सुरेंद्रन को पार्टी ने उनके 50वें जन्मदिन से कुछ हफ्ते पहले ही यह पद दिया है.
सुरेंद्रन ने कहा कि वो पार्टी के भरोसे पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे. मध्य प्रदेश में खजुराहो से सांसद विष्णुदत्त शर्मा यानी वीडी शर्मा जबलपुर के सांसद राकेश सिंह का स्थान लेंगे, जिन्हें विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. शर्मा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से पार्टी में आए थे. माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से निकटता के चलते उन्हें यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई गई है. मुरैना के रहने वाले शर्मा को चंबल क्षेत्र में बीजेपी की ओर से ब्राह्मणों का सशक्त चेहरा माना जाता है.
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