भुज में कॉलेज छात्राओं से अंडरवियर उतरवाने का आरोप

गुजरात के भुज शहर में एक कॉलेज की छात्राओं से कथित तौर पर जबरन इस बात की जाँच के लिए अंडरवियर उतरवाए गए कि उन्हें कहीं पीरियड्स तो नहीं हो रहे.

बताया जा रहा है कि श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टीच्यूट (SSGI) के होस्टल प्रमुख ने प्रिंसिपल से शिकायत की थी कि कुछ लड़कियों ने पीरियड्स के दौरान छात्रावास की धार्मिक परंपरा की अवमाननना की है.

इस शिकायत के बाद छात्राओं को स्वामीनारायण संप्रदाय के नियमों को लेकर सख़्त बातें कही गईं और कहा गया कि जो भी छात्रा पीरियड्स से ग़ुजर रही है वो अपनी इच्छा से सामने आए.

स्वामीनारायण संप्रदाय के नियमों के तहत माहवारी के दौरान महिलाओं को मंदिरों और रसोई में जाने की मनाही होती है.

छात्राओं का कहना है कि इस घटना से उन्हें मानसिक सदमा पहुँचा है और वे इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की माँग कर रही हैं.

गुजरात राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष लीलाबेन अंकोलिया ने बीबीसी गुजराती के सहयोगी पत्रकार भार्गव पारीख़ को बताया कि आयोग की ओर से पुलिस के सामने चार लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की गई है जिनमें कॉलेज की प्रिंसिपल भी शामिल हैं.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस घटना की जाँच के लिए एक समिति गठित की है जो कॉलेज का दौरा करेगा.

कॉलेज प्रशासन ने इस घटना पर हैरानी जताते हुए कहा है कि इस बारे में जाँच की जाएगी और किसी भी चूक को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

हालाँकि कच्छ यूनिवर्सिटी की उप-कुलपति ने कहा है कि ये मामला कॉलेज नहीं बल्कि होस्टल का है और इस मामले में नियमों को तोड़ने वाली छात्राओं ने माफ़ी भी माँगी है.

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छात्राओं का क्या कहना है?

बीबीसी की गुजराती सेवा के सहयोगी स्थानीय पत्रकार प्रशांत गुप्ता ने इस कॉलेज की कुछ छात्राओं से बात की.

इनमें से एक छात्रा ने बताया, "11 फ़रवरी को सारे होस्टल और कैम्पस के सामने हमें एक-एक कर बाथरूम ले जाया गया और देखा गया कि हमें पीरियड्स तो नहीं हो रहा."

उसने बताया, "उन्होंने हमें हाथ नहीं लगाया मगर उनकी बातों से हमें इतना डर गए कि हमने अपने कपड़े उतारकर उन्हें जाँच करने दिया."

छात्राओं ने ये भी आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी की एग्ज़ेक्युटिव काउंसिल के सदस्य प्रवीण पिंडोरिया ने उनसे कहा कि वे कोई क़ानूनी कार्रवाई तभी कर सकते हैं जब वो होस्टल छोड़ देंगी.

छात्राओं ने आरोप लगाया कि कॉलेज की प्रिंसिपल रीताबेन, कोऑर्डिनेटर अनिताबेन और स्कूल की प्रिंसिपल दक्षाबेन ने उन्हें भावुक बनाते हुए ब्लैकमेल किया.

एक छात्रा ने कहा, "उन्होंने हमसे चिट्ठी लिखवाई कि हम इस मुद्दे को आगे नहीं बढ़ाएँगे और हमें इस संप्रदाय या कॉलेज से कोई दिक़्क़त नहीं है."

स्वामीनारायण संप्रदाय के अनुयायी एक छात्रा के पिता ने कहा, नियमों में मेरा भी विश्वास है, मगर उन्हें इस प्रकार मेरी बेटी को प्रताड़ित करने का कोई अधिकार नहीं है."

हालाँकि कुछ छात्राओं ने ये भी कहा कि उनके साथ कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं हुई.

एक छात्रा ने बताया, "संस्थान में नियम है कि पीरियड्स के दौरान छात्राओं को अलग रहना पड़ता है, मगर लड़कियों ने इसे नहीं माना. दो महीने तक किसी ने इसके लिए बने रजिस्टर में अपना नाम नहीं लिखवाया."

छात्रा ने बताया कि एक दिन टीचर ने आकर पूछा कि किसे पीरियड हो रहा है, तो सबने कहा नहीं और वे चाहें तो चेक करवा सकती हैं.

छात्रा ने कहा, "लड़कियों ने ख़ुद जाँच करवाया. मगर इसके एक दिन बाद कुछ लड़कियों ने दावा किया कि उनसे ज़बरदस्ती ऐसा करने के लिए कहा गया जबकि ऐसा हुआ नहीं था."

कॉलेज प्रशासन का क्या कहना है?

कॉलेज प्रशासन ने जाँच की बात की है मगर वो ये मानता है कि ग़लती छात्राओं की ही है क्योंकि उन्होंने नियम तोड़ा.

कच्छ यूनिवर्सिटी की वीसी दर्शना ढोलकिया ने कहा, "होस्टल का एक नियम है कि माहवारी के दौरान महिलाएँ अन्य लोगों के साथ मेस में खाना नहीं खा सकतीं क्योंकि ये कॉलेज स्वामीनारायण संप्रदाय से संबद्ध है.

उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने लड़कियों से जानना चाहा.

उन्होंने कहा, "लड़कियों ने ख़ुद आकर जाँच करवाई, तो स्टाफ़ ने जाँच किया मगर उन्हें छुआ नहीं और लड़कियों को पीरियड्स हो रहे थे. उन्होंने माफ़ी भी माँगी. तो ग़लती उनकी भी है, उन्होंने झूठ बोला."

वीसी ने साथ ही इस बारे में दोषी पाए गए लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई का भी भरोसा दिया.

श्री स्वामीनारायण कन्या विद्यामंदिर संस्था के ट्र्स्टी प्रवीण पिंडोरिया ने भी कार्रवाई का भरोसा दिया है.

उन्होंने कहा, ''ये बहुत पुराना संस्थान है. इतने सालों में कभी ऐसी घटना नहीं हुई. मुझे जब पता चला कि शिक्षकों और छात्राओं के बीच कुछ टकराव है तो मैंने हस्तक्षेप किया और इसे सुलझाने की कोशिश की. हम जाँच करेंगे और जो भी दोषी होगा उसे नहीं बख़्शा जाएगा.

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