बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंहः 'सांप्रदायिकता और RSS के एजेंडे से लड़ने की ज़रूरत है'

नागरिकता संशोधन क़ानून

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"सिविल सोसायटी और पढ़े लिखे नौजवानों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे का मुक़ाबला करने के लिए गांव जाकर काम करना चाहिए."

मुंबई के हज हाउस में रविवार को नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में आयोजित एक कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह ने ये बात कही.

बॉलीवुड में फ़िल्म एक्टर्स को राजनीतिक विषयों पर खुलकर बोलते हुए कम ही देखा गया है.

समाचर एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ सुशांत सिंह ने कहा, "हमें भारतीय समाज से सांप्रदायिकता ख़त्म करनी है. लगातार मुहिम चलाकर हम भले ही नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी को रोकने में कामयाब हो जाएं पर सांप्रदायिकता का ख़तरा बरकरार रहेगा."

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा थे जिनमें आईआईटी के प्रोफ़ेसर, सामाजिक कार्यकर्ता राम पुनियानी और सेंट ज़ेवियर कॉलेज के पूर्व प्रिसपल फादर फ़्रेज़र मैस्करहंस जैसे लोग मौजूद थे.

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पिछले दिनों बॉलीवुड फ़िल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने भी नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर खुलकर अपना विरोध जाहिर किया था.

कश्मीर

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कश्मीर में इंटरनेट सेवाएं

कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं रविवार शाम को फिर से चालू कर दी गई हैं.

संसद पर हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु की बरसी के मौके पर रविवार सुबह प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं.

अफ़ज़ल गुरु को 9 फरवरी 2013 को फांसी दी गई थी. बता दें कि भारत सरकार ने बीते 25 जनवरी को कश्मीर घाटी में 2G इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी थीं.

सत्तर लाख लोगों की आबादी वाली कश्मीर घाटी में बीते छह महीने से इंटरनेट बंद था.

केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया था.

इसके बाद से कश्मीर में इंटरनेट और प्री-पेड मोबाइल फ़ोन पर प्रतिबंध जारी था.

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सुप्रीम कोर्ट में मामला

कश्मीर की पत्रकार अनुराधा भसीन ने सुप्रीम कोर्ट में इंटरनेट पर जारी पाबंदियों को हटाने के लिए याचिका दाख़िल की थी.

अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए फ़ैसला दिया था.

कोर्ट ने इस मसले पर बात करते हुए इंटरनेट को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के इस्तेमाल करने के लिए ज़रूरी चीज़ बताया था.

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट बंद किए जाने से जुड़े आदेश और प्रक्रियाएं तार्किक होनी चाहिए.

कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत इंटरनेट इस्तेमाल करना मूलभूत अधिकार है.

कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को एक हफ़्ते के अंदर इंटरनेट पर पाबंदी लगाए जाने वाले सभी आदेशों की समीक्षा करने का आदेश दिया था.

दुर्घटना

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ओडिशाः बस में आग लगने के कारण पांच की मौत

ओडिशा के गंजाम ज़िले में एक बस हादसे का शिकार हो गई. इस दुर्घटना में पांच लोगों के मरने और 30 लोगों के घायल होने की ख़बर है.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ बिजली के तार के संपर्क में आने के बाद बस में आग लग गई. घायलों में कुछ लोगों की स्थिति गंभीर है.

पुलिस ने बताया कि जंगलपाडु से चिकाराडा जा रही थी. रास्ते में 11 किलोवॉट पावर ट्रांसमिशन लाइन से संपर्क में आने के बाद ये दुर्घटना हुई.

बस में सवार लोग पास के एक गांव में शादी में शरीक होने जा रहे थे.

स्थानीय लोगों ने घटनास्थल पर पहुंचकर घायलों को बस से निकाला.

घायलों को बहरामपुर के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है.

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मुख्य अग्निशमन पदाधिकारी ने जानकारी दी कि ट्रांसमिशन लाइन की बिजली सप्लाई बंद करने के बाद आग पर काबू पा लिया गया है और घायलों को बस से बाहर निकाल लिया गया है.

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