सीएए का विरोध शुरू होने के बाद पहली बार असम आ रहे पीएम मोदी

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- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, गुवाहाटी से
असम में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के ख़िलाफ़ शुरू हुए विरोध के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 फरवरी को राज्य के दौरे पर आ रहे हैं.
दरअसल, हाल ही में नई दिल्ली में अलगाववादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफ़बी) के सभी चार गुटों, ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (आब्सू) और केंद्र सरकार के बीच बोडो शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे.
बोडो शांति समझौता होने की खुशी में वेस्टर्न असम के कोकराझाड़ शहर में शुक्रवार को एक जनसभा का आयोजन किया जा रहा है, जिसे संबोधित करने प्रधानमंत्री मोदी पहुंचेंगे.
प्रधानमंत्री मोदी के असम दौरे को लेकर चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि इससे पहले पीएम मोदी यहां हो रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए कई कार्यक्रमों में भाग लेने से पीछे हट गए थे.
इन विरोध प्रदर्शनों के कारण ही बीते दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे की गुवाहाटी में होने वाली मुलाकात को रद्द कर दिया गया था.

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असम में नागरिकता क़ानून
वहीं, पीएम मोदी गुवाहाटी में आयोजित हुए खेलो इंडिया- यूथ गेम्स के तीसरे संस्करण के उद्घाटन समारोह में भी नहीं आए.
हालांकि असम के कई इलाकों में अब भी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध हो रहा है.
नागरिकता कानून के खिलाफ लगातार विरोध कर रहे ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के महासचिव लुरिन ज्योति गोगोई ने प्रधानमंत्री मोदी के असम दौरे पर बीबीसी से कहा, "पीएम मोदी के असम दौरे का विरोध करने को लेकर आसू ने अभी तक किसी तरह का आधिकारिक निर्णय नहीं लिया है."
"हम चाहते है बोडो शांति-समझौता हो और इस समस्या का राजनीतिक स्तर पर सम्मानजनक समाधान निकले. अब बोडो समझौता हो गया है और प्रधानमंत्री उस कार्यक्रम में आ रहे हैं अगर इस बीच हम किसी तरह का विरोध करेंगे तो बोडो जनजाति के लोगों के मन में हमारे प्रति गलत भावना पैदा होगी."
"इसके अलावा जो कट्टरपंथी ताकतें हैं वो भी बोडो लोगो को हमारे खिलाफ भड़का सकती है. हम चाहते है कि असम की सभी जनजातियों के बीच हमेशा एक अच्छा समन्वय कायम रहे."

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बोडो शांति समझौता
आसू नेता लुरिन ज्योति गोगोई ने आगे कहा, "दरअसल प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के जरिए असम में आना चाहते है लेकिन जब बोडो समझौता पर हस्ताक्षर किए जा रहें थे तो उस समय वे वहां मौजूद ही नहीं थे. पीएम का यहां आने का मक़सद असम में मौजूदा माहौल को सामान्य दिखाने का है."
"अब तक वे असम में हो रहे विरोध का सामना नहीं कर पा रहें थे. बोडो शांति समझौते के सहारे प्रधानमंत्री असम का दौरा कर रहे है ताकि वे और उनके लोग देश के बाकि हिस्सों में बोल सके कि असम अब पूरी तरह शांत है और यहां नागरिकता कानून के खिलाफ कोई आंदोलन नहीं हो रहा है."
"लेकिन हम लगातार अपना आंदोलन जारी रखेंगे और आने वाले दिनों में सभी जनजातियों को साथ लेकर इस कानून के खिलाफ आंदोलन करेंगे."
इसी क्रम में बात करते हुए कोकराझाड़ से सोकसभा सांसद नब कुमार शरणीया ने कहा, "अबोडो सुरक्षा समिति के लोगों ने 7 फरवरी को असम बंद बुलाया था लेकिन फिर वापस ले लिया. प्रधानमंत्री के इस बार के दौरे के समय बंद बुलाना ठीक नहीं होगा."
"हमारे लोगों ने नागरिकता कानून का विरोध किया था लेकिन बोडोलैंड में हमारा प्रमुख मुद्दा अलग है. यहां बोडो और गैर बोडो के अधिकारों का मुद्दा है. ऐसा कहा जा रहा है कि इस समझौते से क्षेत्र में शांति आएगी और अलग बोडोलैंड राज्य की मांग भी आगे नहीं की जाएगी."
"लेकिन प्रधानमंत्री जी को गैर बोडो लोगों की मांगे भी पूरी करनी होगी ताकि आगे चलकर बोडो लोगो के साथ किसी तरह का कोई मतभेद न हो."

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प्रधानमंत्री का कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम को देखते हुए असम सरकार ने सात फरवरी को बोडोलैंड टेरिटोरियल एरिया वाले चारों जिलों में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है.
असम पुलिस के एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) जीपी सिंह के अनुसार चार स्तर पर सुरक्षा बंदोबस्त किए गए है. इस दौरान इलाके में किसी भी संगठन को रैली या सभा करने की कोई अनुमति नहीं दी गई है.
असम प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता कहते है, "नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हो रहे विरोध का कोई आधार नहीं है. आवेग में आकर कुछ लोगों ने विरोध की तख्ती हाथ में उठा ली थी. लेकिन हमारी सरकार ने जो कानून बनाया है उससे जनता पूरी तरह खुश है."
"प्रधानमंत्री मोदी जी की सभा में जो भीड़ आएगी वो इस बात का सबूत होगा कि हम जो कुछ कर रहें है सही कर रहें है. मोदी जी देश के प्रधानमंत्री है वो लोगों के हित में कहीं का भी दौरा कर सकते है. वे कोकराझाड़ में आ रहे हैं जहा लोग बंदूक़ छोड़कर शांति के पथ पर आगे आए है इस कार्यक्रम को नागरिकता कानून से जोड़ देना ठीक नहीं है."
राजनीतिक मायने
दरअसल, गुवाहाटी के बाद ऊपरी असम के आठ जिलों में नागरिकता कानून के खिलाफ सबसे ज्यादा विरोध देखने को मिला है.
असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल भी ऊपरी असम से ही आते है जहां भाजपा को पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें मिली थी.
लेकिन विरोध के कारण क्षेत्र में ऐसा माहौल उत्पन्न हो गया कि मंत्री- विधायक तथा भाजपा कार्यक्रता जनता के बीच जाने से कतरा रहें थे.
मंत्री-नेताओं को काले झंडे दिखाकर लोग अपना विरोध जता रहें थे.
अब भी ऊपरी असम के कई शहरों में लोगों ने अपने घर-दुकानों के बाहर और गाड़ियों पर नागरिकता कानून के विरोध में स्टीकर चिपका रखें है.
प्रदेश भाजपा नेताओ की बेचैनी
लिहाजा ऐसी स्थिति के बाद पहली बार प्रधानमंत्री मोदी बोडोलैंड के प्रशासनिक मुख्यालय कोकराझाड़ में रैली को संबोधित करने आ रहें है, जिसके कई राजनीतिक मायने हैं.
प्रधानमंत्री असम के एक ऐसे इलाके में रैली करने पहुंचेगें जो संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आता है और जहां नागरिकता संशोधन कानून का कोई लेना-देना नही होगा.
लेकिन पीएम मोदी की असम यात्रा न केवल प्रदेश भाजपा नेताओ की बेचैनी को कम करेगी बल्कि ऐसी उम्मीद है कि इससे ग्रांउड लेवल पर काम करने वाले पार्टी कार्यक्रताओं का मनोबल बढ़ेगा और वे एक बार फिर से लोगों के बीच जा सकेंगे.
क्योंकि भाजपा को अगले साल होने वाले असम विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में फिर से अपनी पकड़ मजबूत करनी है.
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