कोरोना वायरस का पहला मामला भारत के केरल में

कोरोना वायरस

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भारत सरकार ने अब इस बात की पुष्टि कर दी है कि चीन के वुहान विश्वविद्यालय से आए एक छात्र में कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हैं.

उस छात्र के मेडिकल रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है.

छात्र फ़िलहाल केरल में है. उसकी स्थिति स्थिर है और उसे निगरानी में रखा गया है.

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भारत में हर दिन कोरोना वायरस को लेकर समीक्षा बैठक चल रही थी. सरकार की तरफ से संदिग्ध लोगों की पहचान चल रही थी.

28 जनवरी तक भारत को लगभग 450 लोगों को निगरानी में रखने की बात आ रही थी. उस वक्त सरकार ने भी दावा किया था कि सबसे ज्यादा लोग केरल में हैं.

इनमें से बहुत सारे लोग हाल ही में चीन से लौटे हैं और उन्होंने एहतियात के तौर पर ख़ुद ही मेडिकल सलाह के लिए संपर्क किया था.

केरल में निगरानी

पीटीआई ने केरल के लोकल अधिकारियों के हवाले से ख़बर दी है कि पिछले कुछ दिनों में चीन से लौटे कम-से-कम 436 लोगों की निगरानी की जा रही है.

अधिकारियों ने बताया कि अब तक जितने भी लोगों के ख़ून के नमूने पुणे स्थित नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भेजे गए थे उनमें किसी का भी नमूना पॉज़िटिव नहीं पाया गया.

केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने पत्रकारों से कहा कि ज़िला स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ तालमेल के ज़रिए आवश्यक क़दम उठाए जा रहे हैं.

मंत्री ने कहा, "हमने ऐसे वॉर्ड खोले हैं जहाँ लोगों को एकांत में रखा जा रहा है, हालाँकि अभी तक हमारे पास एक भी मामले की पुष्टि की ख़बर नहीं है."

इस बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोरोना वायरस से प्रभावित चीन के वुहान प्रांत में अटके भारतीयों को बाहर निकालने की व्यवस्था करने का आग्रह किया है जिनमें केरल के भी कई लोग हैं.

उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में बताया है कि सरकार को चीन में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के संबंधियों से जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक़ वहाँ स्थिति गंभीर है.

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भारत सरकार की एडवाइजरी

केंद्र सरकार ने आज चीन से लौट रहे लोगों के लिए ट्रेवल एडवाइजरी जारी की है. एडवाइजरी के मुताबिक चीन से लौटने पर 14 दिनों तक-

घर में अलग थलग रहें

अलग कमरे में रहें

केवल परिवार से सम्पर्क में रहे. बाहर आने जाने वालों से सम्पर्क न करें.

भारत में चिंता

इसके पहले सरकार ने दिल्ली समेत देश के सात हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की ताकि अगर चीन या हांगकांग से लौटे किसी शख़्स में संक्रमण के असर दिखते हैं तो उसकी तुरंत जांच कराई जा सके.

भारत में नेशनल सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल के डायरेक्टर डॉ. सुजीत कुमार सिंह ने बीबीसी को बताया कि यह वायरस मर्स और सार्स वायरस की तरह जानवरों से ही आया है. दस से बीस दिनों के भीतर ही यह वायरस 40 से 550 लोगों को संक्रमित कर चुका है. जो वायरस अब तक चीन तक ही सीमित था वो अब 5-6 देशों तक भी पहुंच चुका है.

वो कहते हैं, "यह वायरस अमरीका तक पहुंच चुका है तो हमारे देश के लोग भी चीन की यात्रा करते हैं. क़रीब 1200 मेडिकल स्टूडेंट चीन में पढ़ाई कर रहे हैं, जिसमें से ज़्यादातर वुहान प्रांत में ही हैं. ऐसे में अगर वो वहां से लौटते हैं तो इस वायरस के भारत में आ जाने की आशंका बहुत बढ़ जाती है."

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